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बौद्ध मठों के लिए मशहूर है नॉर्थईस्ट

आईये जानते हैं पूर्वोत्तर भारत के प्रसिद्ध मठों के बारे में
News

2022-09-15 09:04:57

भारत एक ऐसा देश है, जहां सभी धर्मो का आदर सत्कार किया जाता है। यहां सभी भाई चारे के साथ एक दूसरे से मिलकर प्रेम से वास करते हैं। बात अगर भारत के धर्मों की हो और ऐसे में हम बौद्ध धर्म पर चर्चा न करें तो सारी बात फिर अधूरी रह जाती है। बौद्ध धर्म भारत में जन्मा और श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है। अगर ऐतिहासिक साक्ष्यों की माने तो इस धर्म की जड़ें 483 ईसा पूर्व से 563 ईसा पूर्व के मध्य मिलती हैं। इतिहासकारों के लिए इस धर्म की शुरूआत हमेशा से ही कौतुहल का विषय रही है।

आपको बताते चलें कि बौद्ध धर्म को 38 करोड़ से अधिक लोग मानते हैं और यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है। भारत में कई सारे मठ है जोकि हिमालय की तलहटी में स्थित है। मठों का हिमालय में होने का कारण एक यह भी है, क्योंकि यहां एकांत में आत्मिक ध्यान लगाना काफी आसान होता है।

मठ बौद्ध भिक्षुओं के घर, जो खुद को दुनिया से काट कर भगवान की उपासना करते हैं, हालांकि अब इन मठों को लोगो के लिए भी खोल दिया गया है।

रूमटेक मठ

रूमटेक मठ सिक्किम के रूमटेक में स्थित है जो गंगटोक से 24 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह मठ, तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्रों में से एक है। इसे धर्म चक्र केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। यह मठ, समुद्र स्तर से 5800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और गंगटोक शहर के समीप ही बना हुआ है। यह मठ तिब्बत के बाहर, काग्यु वंश के महत्वपूर्ण केन्द्रों में से एक है। रूमटेक मठ, तिब्बत के सुरफू मठ के समान बनवाया गया है। यह मठ चार मंजिला है जो पूरे सिक्किम में सबसे बड़ा मठ है। तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद, तिब्बत के ग्यालवा कारमापा के 16 वें गुरु अपने कुछ भिक्षुओं के साथ यहां आकर बस गए। इसके बाद, चोग्याल (राजा) ने रूमटेक के इस क्षेत्र को इन भिक्षुओं को तोहफे के रूप में दे दिया था, जिसे बाद में धार्मिक अध्ययन के लिए एक केन्द्र बना दिया गया था।

लिंग्दम मठ

लिंग्दम मठ गंगटोक शहर से लगभग 20 किमी स्थित है और पूर्व सिक्किम में सबसे सुंदर मठों में से एक है। यह मठ एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है जो महान प्राकृतिक दृश्य प्रदान करता है। जब आप यहां आएँगे तो यहां आपको एक बिलकुल नया कल्चर देखने को मिलेगा जिसको देखने के बाद आपको ये एहसास होगा कि आप तिब्बत में हैं। फोदोंग मठ

फोदोंग मठ गंगटोक से 28 किमी दूर स्थित है, इस मठ का निर्माण 18 वीं सदी की शुरूआत में किया गया था। इस मठ के निर्माण के दौरान सिक्किम के 9 वें करमापा ने तीन और मठो की स्थापना की थी- रुमटेक, फोडोंग और रलांग जिसमें से रूमटेक सबसे महत्वपूर्ण है।

एंचे मठ

एंचे मठ सिक्किम की राजधानी गंगटोक में एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण 1909 में थुतोब नामग्याल के शासनकाल के दौरान हुआ था। एन्केई एकांत के लिए अनुवादित है; किंवदंतियों के अनुसार, गुरु पद्मसंभव को यहां खांगेन्दांगों, यब्बियन और महाकाल की आत्माओं को मिलाया था।

दुर्पिन मठ

दुर्पिन मठ कालिम्पोंग (प. बंगाल) का सबसे बड़ा मठ है। यह तिब्बती मठ बेहद पुराना है जोकि 108 संस्करणों में शामिल हैं। ये पांडुलिपियां दलाई लामा ने 1956 में कालिम्पोंग की यात्रा के दौरान उपहार में दी थी और 1976 में दलाई लामा ने इस मठ की स्थापना की थी।

बोमिडला मठ (अरुणाचल प्रदेश)

जहाँ बौद्ध लामा और भिक्षु रहते हैं, जी.आर.एल मठ के नाम से भी प्रसिद्ध है। इसे महायान बौद्ध धर्म की लामाई आस्था का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है। जी.आर.एल मठ अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग जिले में स्थित है और इसे 1965-66 में त्सोना गोंटसे रिनपोछे के 12वें गुरु द्वारा बनवाया गया था। मुख्य गोम्पा की तीन डिवीजनें हैं- लोअर गोम्पा, मध्य गोम्पा और ऊपरी गोम्पा। ऊपरी गोम्पा को मुख्य मठ माना जाता है। लोअर गोम्पा तिब्बती वास्तुकला की समृद्धि को दशार्ते हुए मुख्य बाजार के अंत में स्थित है। तवांग मठ

तवांग मठ (अरूणाचल प्रदेश) भारत का सबसे बड़ा और एशिया का दूसरा सबसे बड़ा मठ है। इसकी स्थापना मेराक लामा लोड्रे ने 1860-1861 में की थी। तवांग जिले के बोमडिला से यह मठ 180 किमी दूर है। समुद्र तल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ पर स्थित इस मठ को गालडेन नमग्याल लहात्से के नाम से भी जाना जाता है।

सेला दर्रा

यह अरुणाचल प्रदेश की मशहूर जगहों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। यह दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ों में से एक है। सर्दियों में यहां की झील बर्फ की तरह जम जाती है।

बुमला दर्रा

यह दर्रा तवांग से लगभग 37 किमी दूर है। यहां जाने वाली सड़क की हालत पूरे साल अच्छी नहीं होती, इसलिए इस खूबसूरत जगह की सैर आप मई से अक्टूबर के बीच ही कर सकते हैं।

नूरानांग फॉल्स

इसे जंग फॉल्स के नाम से भी जाना जाता है जो लगभग 100 मीटर की ऊंचाई पर है। नूरानांग नदी और नूरानांग फॉल्स एक नूरा नाम की स्थानीय महिला के नाम पर पड़ा है जिसने 1962 में भारत-चीन की युद्ध में सैनिकों की मदद की थी।

तवांग युद्ध स्मारक

तवांग युद्ध स्मारक का आकार स्तूप की तरह है। यह स्मारक 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के शहीदों की याद में बना है। यह स्मारक नामग्याल चोरटेन के रूप में मशहूर है। इस पर करीब 2420 शहीद सैनिकों के नाम लिखे हैं।

तवांग जाने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट तेजपुर है जो यहां से करीब 317 किलोमीटर दूर है। दूसरा गुवाहाटी एयरपोर्ट है जो तवांग से करीब 480 किलोमीटर दूर है। गुवाहटी तक ट्रेन या हवाई जहाज से आने के बाद सड़क के रास्ते तवांग जाना होगा। यहां कि सड़कें बहुत घुमावदार व खतरनाक हैं। अप्रैल से सितंबर तक तवांग जाना बहुत जोखिम भरा है।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 11:08:05