2022-10-07 06:18:01
दीक्षाभूमि भारत में बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र है। यहां बौद्ध धर्म की पुनरूत्थान हुआ है। महाराष्ट्र राज्य की उपराजधानी नागपुर शहर में स्थित इस पवित्र स्थान पर बोधिसत्त्व डॉ. भीमराव आंबेडकर जी ने 14 अक्टूबर 1956 को पहले महास्थविर चंद्रमणी से बौद्ध धम्म दीक्षा लेकर अपने 5 लाख से अधिक अनुयायिओं को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। त्रिशरण, पंचशील और अपनी 22 प्रतिज्ञाएँ देकर डॉ. आंबेडकर ने हिंदू दलितों का धर्मपरिवर्तन किया। अगले दिन फिर 15 अक्टूबर को 3 लाख लोगों को बौद्ध धम्म की दीक्षा दी और स्वयं भी फिर से दीक्षीत हुए। देश तथा विदेश से हर साल यहां 25 लाख से अधिक आंबेडकरवादी और बौद्ध अनुयायी आते हैं। हर साल 14 अक्टूबर को यहां हजारों की संख्या में लोग बौद्ध धर्म परावर्तित होते रहते हैं। यहां 14 अक्टूबर 2015 में 50 हजार लोग बुद्ध धम्म में दीक्षीत हुए हैं। 14 अक्टूबर 2016 में 20 हजार और 25 अक्टूबर 2016 को मनुस्मृति दहन दिवस के उपलक्ष में 5 हजार ओबीसी लोगों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली है। महाराष्ट्र सरकार ने दीक्षाभूमि को अ वर्ग (ए क्लास) पर्यटन क्षेत्र का दर्जा दिया है। नागपुर शहर के सभी धार्मिक व पर्यटन क्षेत्रों में यह पहला स्थल है, जिसे ए क्लास का दर्जा हासिल हुआ है। यहां हर दिन कोने-कोने से हजारों लोग दीक्षा भूमि देखने के लिए आते हैं।
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