




2026-03-21 16:27:40
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया है कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है। साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि सफाई एक पेशा आधारित गतिविधि है, न कि जाति आधारित काम। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी के सवाल के लिखित जवाब में 17 मार्च को सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा में राज्यवार आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 539 परिवारों को पूरा मुआवजा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवजा मिला है। हालांकि, आंकड़ों के अनुसार 52 प्रभावित परिवारों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है, और छह मामलों को बिना किसी समाधान के बंद कर दिया गया. इनमें से उत्तर प्रदेश में 13 परिवारों को कोई मुआवजा नहीं मिला और तीन मामलों को बंद कर दिया गया।
मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है। मुआवजे की राशि कितनी दी गई, इस बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई। अठावले ने कहा कि हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत किए गए नए सर्वेक्षण में देश के किसी भी जिले में कोई भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं पाया गया। हालांकि, उन्होंने बताया कि 2013 और 2018 में किए गए दो सर्वेक्षणों में कुल 58,098 मैनुअल स्कैवेंजर की पहचान की गई थी, जिनमें से 32,473 उत्तर प्रदेश में थे. साल 2025 में दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (डीएएसएएम) ने एक बयान जारी कर देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग से जुड़ी मौतों पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने और स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की थी. संगठन के अनुसार 2024 में 116 और 2025 में 158 मजदूरों की मौत हुई। पिछले साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने छह महानगरों में मैनुअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश भी दिया था और इसके उन्मूलन को लेकर केंद्र सरकार की अस्पष्टता पर कड़ी टिप्पणी की थी। मंत्री ने यह भी कहा कि सफाई कार्य पेशा आधारित है, न कि जाति आधारित, और सफाईकर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने तथा उनके पूर्ण पुनर्वास के लिए कदम उठाए गए हैं। हालांकि, आंकड़ों से यह भी सामने आया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 842 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 130 उत्तर प्रदेश से थीं. ये शिकायतें वेतन न मिलने, सुरक्षा उपकरणों की कमी और जाति आधारित भेदभाव से जुड़ी थीं। सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों की सुरक्षा और गरिमा के लिए शुरू की गई नेशनल एक्शन फॉर मेकनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते) योजना के तहत सरकार ने कई कदम उठाने की बात कही। 12 मार्च तक इस योजना के तहत 89,248 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों तथा 2,34,425 कचरा बीनने वालों का सत्यापन किया जा चुका है, जिनमें उत्तर प्रदेश के 12,424 सीवर/सेप्टिक कर्मी और 35,641 कचरा बीनने वाले शामिल हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि पहले की मैनुअल स्कैवेंजर्स के पुनर्वास की योजना को अब इस योजना में समाहित कर दिया गया है।





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