




2026-08-08 13:55:02
नई दिल्ली। मानसून की पहली कुछ बारिशों ने ही देश की राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर में नगर निगम व सरकार के प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा जलभराव से निपटने के लिए किए गए तमाम दावों और बड़े-बड़े कागजी वादों की पोल अब धरातल पर पूरी तरह खुल चुकी है। कुछ घंटों की बारिश के बाद ही दिल्ली की मुख्य सड़कें स्विमिंग पूल में तब्दील हो गईं, जिससे पूरी राजधानी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है और आम जनता की परेशानियां चरम पर पहुँच गई हैं।
मानसून की शुरूआत से पहले रेखा गुप्ता सरकार और संबंधित एजेंसियों (पीडब्ल्यूडी, एमसीडी) ने शहर के नालों की सफाई, नए ड्रेनेज सिस्टम और अत्याधुनिक सुपर-सकर मशीनों की तैनाती के लंबे-चौड़े दावे किए थे।करोड़ों रुपये के बजट आवंटन और जीरो वॉटरलॉगिंग के विज्ञापनों का ढिंढोरा पीटा गया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लुटियंस दिल्ली से लेकर बाहरी दिल्ली और एनसीआर के प्रमुख इलाकों तक, हर जगह घुटनों तक पानी भरा हुआ है। प्रशासन की नाकामी का आलम यह है कि अंडरपास जलमग्न हो चुके हैं, जिससे कई गाड़ियाँ बीच सड़क में बंद हो गईं। आईटीओ, धौला कुआँ, मिंटो रोड, और मुख्य रिंग रोड जैसे संवेदनशील और प्रमुख रास्तों पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला, जहाँ एम्बुलेंस से लेकर दफ्तर जाने वाले लोग भारी जलभराव में फंसे रहे। यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में बारिश के बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई हो, लेकिन वर्तमान सरकार की अक्षमता और ड्रेनेज मैनेजमेंट में दूरदर्शिता की कमी ने इस समस्या को और भयावह बना दिया है। जनता का आरोप है कि नाले-नालियों की गाद निकालनेका काम केवल फाइलों और कागजों तक सीमित रहा। ड्रेनेज मास्टर प्लान को लागू करने में सरकार की हीलाहवाली और प्रशासनिक लापरवाही के कारण आज पूरी दिल्ली बूंद-बूंद बारिश के लिए तरसने के बजाय थोड़ी सी बारिश में ही डूबने को मजबूर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल टैक्स देने के बावजूद उन्हें नारकीय जीवन जीने को मजबूर होना पड़ता है। जलभराव के कारण न केवल गाड़ियाँ खराब हो रही हैं, बल्कि हादसों का खतरा भी लगातार बना हुआ है। कई इलाकों में सड़कों के बीच बने गड्ढे पानी में छिप जाने के कारण राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। जहाँ एक ओर आम जनता घंटों जाम में फंसकर पानी से भरी सड़कों पर संघर्ष कर रही है, वहीं दूसरी ओर रेखा गुप्ता सरकार और प्रशासनिक अधिकारी केवल निरीक्षण का नाटक कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। बुनियादी नागरिक सुविधाओं को मुहैया कराने में यह नाकामी सीधे तौर पर प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी और भ्रष्टाचार को उजागर करती है। यदि शुरूआती बारिश में ही पूरी दिल्ली का यह हाल है, तो आने वाले मानसून के दिनों में शहर की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। अब देखना यह होगा कि जनआक्रोश और बदहाली की इन तस्वीरों के बाद सरकार कोई ठोस कदम उठाती है या फिर हमेशा की तरह केवल खोखले दावों के पीछे छुपती रहेगी।





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