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सुप्रीम कोर्ट की यूपीएससी उम्मीदवारों को बड़ी राहत, कहा

8 लाख से अधिक आय तो भी ओबीसी क्रीमी लेयर नहीं
News

2026-03-14 17:06:51

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के क्रीमी लेयर से जुड़े मुकदमे में अहम टिप्पणी की। दो जजों की खंडपीठ ने आज अपने फैसले में कहा कि आरक्षण के इस मामले में अभ्यर्थी के क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल माता-पिता या अभिभावकों की सैलरी के आधार पर नहीं किया जा सका। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने अपने फैसले में सरकार की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि क्रीमी लेयर दर्जा का निर्धारण करते समय माता-पिता या अभिभावकों के पदों और स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। बेंच ने केंद्र सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जो हाई कोर्ट के फैसलों के खिलाफ थीं। कोर्ट ने उन यूपीएससी उम्मीदवारों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद नौकरी नहीं दी गई थी। सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी को आधार मानकर उन्हें गलत तरीके से क्रीमी लेयर की श्रेणी में डाल दिया था। अदालत ने साफ किया कि अधिकारियों ने उम्मीदवारों को आरक्षण से बाहर करने के लिए गलत पैमाना अपनाया। जस्टिस महादेवन ने फैसले में लिखा कि कोई उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आता है या नहीं, इसका फैसला केवल आय के आधार पर नहीं हो सकता।यह पूरा विवाद उन उम्मीदवारों से जुड़ा था जिनके माता-पिता सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू), बैंकों या इसी तरह के संस्थानों में काम करते थे। सरकार ने 2004 के एक स्पष्टीकरण पत्र का सहारा लेकर उनकी सैलरी को आय में जोड़ दिया था। इस वजह से वे आरक्षण के लाभ से वंचित हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के सरकारी आदेश का हवाला दिया। यह आदेश इंदिरा साहनी मामले के बाद बना था। इसमें स्पष्ट है कि क्रीमी लेयर तय करने के लिए माता-पिता का पद (जैसे ग्रुप ए या ग्रुप बी अधिकारी) मुख्य आधार है। इस नियम के तहत सैलरी और खेती से होने वाली कमाई को आय/संपत्ति टेस्ट में शामिल नहीं किया जाता।

कोर्ट ने कहा कि 2004 का एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता। अदालत ने यह भी पाया कि सरकारी कर्मचारियों और पीएसयू कर्मचारियों के बीच भेदभाव करना गलत है। अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को पद के आधार पर छूट मिलती है, तो पीएसयू कर्मचारियों के बच्चों को केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण से बाहर करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह 6 महीने के भीतर इन उम्मीदवारों के दावों पर फिर से विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरी हो तो इन उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए अलग से पद बनाए जाएं।

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01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

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18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

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24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

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