




2026-10-10 14:27:35
सतना। शोषितों, वंचितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के सजग प्रहरी तथा बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम साहब का 20वां बलिदान दिवस शुक्रवार 9 अक्टूबर को ग्राम घूँघचिहाई के सामुदायिक भवन में अत्यंत आदर, वैचारिक गौरव और संकल्पबद्धता के साथ मनाया गया। बेगमपुरा स्वराज संघ के प्रदेश सचिव मा. हरिलाल साकेत जी की अगुआई में आयोजित इस ऐतिहासिक वैचारिक सभा ने क्षेत्र के बहुजन समाज में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और बेगमपुरा स्वराज संघ के संस्थापक आदरणीय एडवोकेट अशोक सिंह जी ने अपने करीब आधे घंटे के ओजस्वी, तार्किक और ऐतिहासिक वक्तव्य से जनसमूह को उद्वेलित कर दिया। उन्होंने मान्यवर कांशीराम साहब के संघर्षों को भारत की महान संत-गुरु परंपरा का आधुनिक विस्तार बताते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किए।
गुरु नानक साहिब जी की करुणा और साहेब का संघर्ष: एडवोकेट अशोक सिंह ने कहा कि समतामूलक समाज का सपना नया नहीं है। इसकी शुरूआत साहिब श्री गुरु नानक देव जी ने समाज के सबसे शोषित तबके का हाथ थामकर ऊंच-नीच के अहंकार को तोड़कर की थी। ठीक उसी राह पर चलते हुए मान्यवर कांशीराम साहब ने सत्ता और महलों की परवाह न कर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को गले लगाया।
गुरु रविदास जी का बेगमपुरा संकल्प: उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे संगठन का नाम बेगमपुरा गुरु ग्रंथ साहिब जी में दर्ज क्रांतिकारी गुरु रविदास जी के दर्शन से प्रेरित है, जिन्होंने एक ऐसे आदर्श समाज की परिकल्पना की थी जहाँ कोई दु:ख, ऊंच-नीच या शोषण न हो। मान्यवर साहब ने इसी सपने को आधुनिक लोकतंत्र में अमली जामा पहनाया और हमें याचक नहीं, शासक बनने का मंत्र दिया।
कबीर साहिब का स्वाभिमान और गुरु अर्जुन साहिब का बलिदान: सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कबीर साहिब ने सभ एका ही माटी के भांडे कहकर पाखंड की चूल्हें हिला दी थीं। इस स्वाभिमान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की प्रेरणा हमें शहीदों के सरताज साहिब श्री गुरु अर्जुन देव जी से मिलती है। मान्यवर कांशीराम साहब ने भी अपने ऐश-ओ-आराम, नौकरी और परिवार को तिलांजलि देकर समाज के सम्मान के लिए कष्टों का मार्ग चुना।
गुरु गोबिंद सिंह जी की सैन्य-क्रांति का आधुनिक रूप: उन्होंने मान्यवर साहब के ऐतिहासिक नारे जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी को साहिब-ए-कमाल गुरु गोबिंद सिंह जी की समतावादी सैन्य-क्रांति का रूप बताया, जिन्होंने दबे-कुचले लोगों को अमृत चखाकर सिंह (शेर) और कौर बनाया।
कार्यक्रम का सफल और प्रभावी संचालन प्रदेश प्रवक्ता मा. राजाराम मानव जी ने किया। इस ऐतिहासिक वैचारिक मंच को संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने भी संबोधित किया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे। मा. पुष्पेंद्र साकेत (राष्ट्रीय अध्यक्ष), मा. अनूप सिंह प्रजापति (राष्ट्रीय महासचिव), मा. अरुण साकेत (राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष), मा. नत्थूलाल सिंह प्रजापति (राष्ट्रीय मार्गदर्शक), मा. रामनरेश जायसवाल (प्रदेश अध्यक्ष) समेत इस वैचारिक महाकुंभ में प्रदेश महासचिव मा. बद्री प्रसाद साकेत, जिला अध्यक्ष मा. रिंकू साकेत, जिला सचिव मा. धीरेन्द्र सिंह प्रजापति, रामपुर ब्लॉक महासचिव मा. राजाराम चौधरी सहित सैकड़ों पदाधिकारियों एवं स्थानीय गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभा के समापन पर सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक सुर में बेगमपुरा स्वराज की स्थापना और मान्यवर कांशीराम साहब के अधूरे कारवां को गति देने का सामूहिक संकल्प लिया।
-एडवोकेट अशोक सिंह





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