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शिक्षकों की जान पर ‘एसआईआर’

सात राज्यों में 22 दिन में 25 बीएलओ की मौत, कहीं सुसाइड तो कहीं आया हार्ट अटैक
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2025-11-29 15:19:35

नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद भारत का चुनाव आयोग अब उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत देश के 9 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कर रहा है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की गहन जांच की जा रही है और इसे नए सिरे से तैयार किया जाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर लागू करने वाले बीएलओ यानी बूथ लेवल आॅफिसर की स्थिति और उनपर काम के बोझ को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कई जिÞलों में बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ काम में लापरवाही और आधिकारिक आदेशों की अवहेलना के आरोप में मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। चुनाव आयोग ने इस संबंध में 27 अक्तूबर को आदेश जारी किया था। इसके तहत 9 राज्यों- छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल एवं तीन केंद्र शासित प्रदेशों निकोबार, लक्षद्वीप और पुद्दुचेरी में 4 नवंबर से मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस दौरान 321 जिÞलों में 843 विधानसभाओं के 51 करोड़ से अधिक मतदाताओं की जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत 4 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच गणना पत्र (एन्यूमरेशन फॉर्म) भरे जाएंगे. देशभर में 5.3 लाख बूथ लेवल आॅफिसर इस काम में लगाए गए हैं। बीएलओ यानी बूथ लेवल आॅफिसर को इस काम के लिए घर-घर जाना है. उन्हें गणना पत्र भरवाने और जमा करने हैं। दौरान काम के दबाव के चलते बीएलओ की मौतें और आत्महत्या की खबरें एक राजनीतिक मुद्दा बन रही हैं। इसपर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं।

सात राज्यों में 22 दिन में 25 बीएलओ की मौत

देश के 12 राज्यों में 51 करोड़ से अधिक मतदाताओं के घर जब अभी पांच लाख 32 हजार बीएलओ या तो फॉर्म दे चुके हैं या फॉर्म ले रहे हैं, तब इस बार के एसआईआर के 22 दिनों में 7 राज्यों में 25 बीएलओ की मौत ने चिंता बढ़ा दी है। जहां मध्य प्रदेश में 9, उत्तर प्रदेश और गुजरात में चार-चार पश्चिम बंगाल और राजस्थान में तीन-तीन, तमिलनाडु-केरल में तीन-तीन बीएलओ के काम करने के दौरान या फिर काम के दबाव की वजह या तो जान गई या फिर आरोप लगा कि काम का दबाव बढ़ने पर जान दे दी।

कहीं सुसाइड तो कहीं हार्ट अटैक से मौत

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक परिवार इसलिए टूट गया है, क्योंकि बेटा जो गोंडा में शिक्षक था इछड की ड्यूटी कर रहा था, उसने सुसाइड कर लिया। विपिन यादव ने गोंडा में बीएलओ का काम करते हुए अधिकारियों पर काम के दबाव का आरोप लगाकर जहर खा लिया। उन्हें जान बचाने को लखनऊ तक भेजा गया, पर वह नहीं बच सके। काम का दबाव विपिन यादव पर कैसा था? क्या केवल 4 दिसंबर तक फॉर्म देने, जमा करने और डेटा भरने को लेकर दबाव था या फिर कुछ और। इसी तरह यूपी के ही बरेली में बीएलओ का काम करते सर्वेश कुमार की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई. उनके परिवार के भाई जो खुद बीएलओ सुपरवाइजर हैं, बताते हैं कि वर्क लोड बहुत ज्यादा हो चुका है। अब बात पश्चिम बंगाल की करें तो राज्य के दक्षिण 24 परगना जिले में बीएलओ का काम करते कमल नस्कर को हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई. दावा है कि बीएलओ कमल ने लगभग 1160 एसआईआर फॉर्म इलाके के वोटरों के घर-घर पहुंचा दिए थे, लेकिन उनमें से वह केवल 20 फॉर्म ही वापस ला पाए. जबकि दबाव था कि 26 से पहले सारे फॉर्म लेकर आ जाओ। मृतक की बेटी ने आरोप लगाया कि उनके पिता इस काम की वजह से मानसिक तनाव में थे, इसलिए वे बीमार पड़ गए और यह दबाव सहन नहीं कर पाए।

उत्तर प्रदेश में 60 बीएलओ पर एफआईआर

इसी बीच, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) बहराइच और बरेली में काम में लापरवाही का हवाला देते हुए बीएलओ और एसआईआर के काम में लगे अन्य कर्मियों पर कई मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। गौतम बुद्ध नगर में दर्ज की गई अलग-अलग एफआईआर में 60 से अधिक कर्मचारियों को नामजद किया गया है. इनमें बीएलओ, सहायक और सुपरवाइजर शामिल हैं। इन कर्मचारियों पर बार-बार निर्देश, चेतावनी देने और नोटिस देने के बाद भी अपने क्षेत्र में एसआईआर से जुड़ा काम न करवाने और उच्च अधिकारियों के आदेश ना मानने के आरोप लगाए गए हैं। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में कुल चार मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इनमें से दो एफआईआर दादरी थाना क्षेत्र में दर्ज हैं, एक इकोटेक फेज-1 और एक जेवर थाना क्षेत्र में।

बीएलओ की स्थिति को कोई नहीं समझ रहा

बीएलओ और खास कर शिक्षकों पर दर्ज किए गए मुकदमों को शिक्षक संगठन अपमान के रूप में देख रहे हैं। टीचर्स फेडरेशन आॅफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मेघराज भाटी ने बताया कि अध्यापक शिक्षण कार्य के साथ बीएलओ की जिÞम्मेदारी का अतिरिक्त भार उठा रहे हैं, काम के बोझ की वजह से इस्तीफा दे रहे हैं और बदले में शिक्षकों को एफआईआर मिल रही है, ये शिक्षकों का अपमान है। मेघराज भाटी कहते है कि बीएलओ अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, रात में बारह बजे तक डेटा अपलोड करना सामान्य बात है, हमारी स्थिति को समझने के बजाए हमारे खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। काम के बोझ में दबे बीएलओ को इस समय सहयोग और काउंसलिंग की जरूरत है, इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई उनका मनोबल ही तोड़ रही है। हम अपनी मांगें सरकार के सामने रखेंगे और जिन शिक्षकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए उन्हें कानूनी सहायता मुहैया कराई जाएगी। बीएलओ को किस तरह का प्रशिक्षण और सहायता दी जा रही है और अधिक काम के दबाव को लेकर चुनाव आयोग क्या कर रहा है यह जानने के लिए हमने उत्तर प्रदेश चुनाव आयुक्त के कार्यालय में फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका. उनके निजी सचिव ने भी कॉल नहीं उठाया। चुनाव आयोग ने बीएलओ की स्थिति और काम के दबाव को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।

शिक्षकों को बीएलओ बनाकर राम भरोसे चल रहे स्कूल

ग्रेटर नोएडा के जनकपुर के अचार प्राइमरी स्कूल में कक्षा 1 और कक्षा 2 के बच्चे एक साथ बैठे हुए हैं। ब्लैकबोर्ड को दो हिस्सों में बांट दिया गया है—एक हिस्सा कक्षा 2 के लिए, तो दूसरा कक्षा 1 के लिए। बड़े बच्चों को जहां भी जगह मिल रही है, वहीं बैठा दिया गया है। कक्षा 3 और कक्षा 4 के बच्चे ओपन कोर्टयार्ड में बैठे हैं, जबकि कक्षा 5 के बच्चे एक टिन शेड के नीचे बरामदे में बैठने को मजबूर हैं। इस स्कूल में इस समय 155 बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन शिक्षक केवल दो हैं। स्कूल की प्रिंसिपल बताती हैं, हमारे स्कूल में कुल आठ शिक्षक हैं, लेकिन चार की बीएलओ ड्यूटी लगी हुई है। परीक्षा नजदीक हैं, ऐसे में सबकुछ मैनेज करना बेहद मुश्किल हो रहा है। वह कहती हैं कि अकेले अटेंडेंस लेने में ही 30 मिनट लग जाते हैं और बच्चों का सिलेबस पूरा नहीं हो पाया है। जब से उत्तर प्रदेश सरकार ने हजारों शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी पर लगाया है, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के राज्य स्तरीय स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्टॉप-गैप अरेंजमेंट के तहत कई कक्षाओं को आपस में मिला दिया गया है। कुल 1,800 शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ के रूप में लगाई गई है। कई ऐसे स्कूल हैं जहां सिर्फ 2-3 शिक्षक पूरा स्कूल चला रहे हैं। इस तरीके से चीजें संभालना नामुमकिन है, लेकिन कोई हमारी बात नहीं सुन रहा। बीएलओ प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई स्कूलों में केवल कुछ ही विषय पढ़ाए जा रहे हैं—गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी। नोएडा के सबसे बड़े कंपोजिट स्कूल में 653 बच्चे हैं, लेकिन कई बच्चे जमीन पर बैठे थे। प्रिंसिपल कहती हैं, क्लासरूम तो हैं, लेकिन 20 में से सिर्फ 6 शिक्षक मौजूद हैं। हमारा काम क्या है—बच्चों को पढ़ाना, मिड-डे मील कराना या फिर सिर्फ मैनेज करना? इस माहौल में बच्चों को पढ़ाना संभव नहीं है। कुछ माता-पिता शिकायत कर रहे हैं कि बच्चों को होमवर्क नहीं मिल रहा और पढ़ाई पर गहरा असर पड़ा है।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05