Saturday, 25th July 2026
Follow us on
Saturday, 25th July 2026
Follow us on

विदेशी धरती पर भी गूंजी जंतरमंतर की आवाज

विश्वगुरु मोदी और उसके संघी अंधभक्तों ने पूरी दुनिया में करवाई थू-थू
News

2026-07-25 17:33:21

संवाददाता

नई दिल्ली। भारत में जारी नीट-यूजी परीक्षा धांधली विवाद और 20 जुलाई को दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई की गूंज अब देश की सीमाओं को पार कर वैश्विक मंच तक पहुंच गई है। विश्व पटल पर खुद को विश्वगुरु के रूप में प्रस्तुत करने वाले भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों और अप्रवासी भारतीय समुदाय का यह आक्रोश एक नई प्रशासनिक व कूटनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है। दुनिया के विभिन्न देशों—अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और आयरलैंड—में भारतीय छात्रों, शोधकतार्ओं और प्रवासियों ने एकजुट होकर जंतर-मंतर के आंदोलनकारियों का समर्थन किया है और केंद्र सरकार व दिल्ली पुलिस के रवैये की कड़ी आलोचना की है।

न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका): मैनहट्टन के यूनियन स्क्वायर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने सैकड़ों छात्रों और भारतीय मूल के लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथ में तख्तियां लेकर मैं भी कॉकरोच जैसे नारों के साथ जंतर-मंतर के छात्रों के प्रति एकजुटता जताई और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की।

लंदन (यूनाइटेड किंगडम ): यूके में सबसे बड़ा प्रदर्शन देखा गया। भारतीय उच्चायोग और ट्रैफलगार स्क्वायर के बाहर स्टूडेंट्स फेडरेशन आॅफ इंडिया व अन्य छात्र संगठनों के आह्वान पर भारी भीड़ जुटी। वहीं मैनचेस्टर एवं एडिनबर्ग शहरों में भी भारतीय छात्रों और पेशेवरों ने एकत्र होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए।

टोरंटो (कनाडा ): डाउनटाउन टोरंटो के प्रसिद्ध ईटन सेंटर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां लेकर विरोध दर्ज कराया। वहीं वैंकूवर में भी भारतीय समुदाय और छात्रों ने रैली निकालकर दिल्ली में जंतर-मंतर पर संसद मार्च करने वाले छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

बर्लिन (जर्मनी): बर्लिन के ऐतिहासिक ब्रैंडनबर्ग गेट पर भारतीय छात्रों और नागरिकों ने इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया।

डबलिन (आयरलैंड): भारतीय दूतावास के बाहर एकत्र होकर छात्रों ने भारतीय परीक्षा प्रणाली और एनटीए में निष्पक्षता, उत्तरदायित्व और सुधार की मांग उठाई।

नीदरलैंड्स: नीदरलैंड्स के प्रमुख शैक्षणिक शहरों में भी प्रवासी भारतीय छात्रों ने जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध जताया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

वहीं वैश्विक मीडिया ने भारत में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन को बड़े पैमाने पर कवर किया और इसे हाल के वर्षों में मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन के रूप में देखा है।

बीबीसी: बीबीसी ने इस आंदोलन को हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष की सबसे बड़ी और स्पष्ट अभिव्यक्तियों में से एक करार दिया। इसने तिरंगा लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और रास्तों को सील करने वाली पुलिस के बीच के तीखे अंतर को उजागर किया, जहां पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारी सिर से खून बहते हुए या लंगड़ाते हुए वापस लौटे।

द न्यूयॉर्क टाइम्स: अखबार ने रिपोर्ट दी कि दिल्ली की सड़कों पर अराजक दृश्य देखने को मिले, जहां पुलिस ने आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि एक तरफ जहां संसद में मुस्कुराते हुए संघी मोदी संघी शांति दिखाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ युवा सड़कों पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे। अखबार ने कहा है कि सरकार की ओर से युवाओं के इस भारी गुस्से को कम आंकने से मोदी की मनगढ़त मजबूत नेता की छवि खत्म हई है।

फाइनेंशियल टाइम्स: फाइनेंशियल टाइम्स ने छात्रों के इस प्रदर्शन को राजधानी में बीते वर्षों का सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बार-बार आंसू गैस के गोले दागे और उन्हें लाठियों व प्लास्टिक के डंडों से पीटा। अखबार के मुताबिक, हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों (जैसे पश्चिम बंगाल और असम) में सत्ताधारी भाजपा की जीत के बावजूद इस बड़े पैमाने के प्रदर्शन से मोदी सरकार के सामने एक व्यापक और गंभीर चुनौती खड़ी होने का खतरा पैदा हो गया है।

ब्लूमबर्ग: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की सख्त कार्रवाई के एक दिन बाद भी प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने के बजाय अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि सोमवार को दिल्ली में हुआ यह प्रदर्शन 2021 के किसान आंदोलन के बाद से राष्ट्रीय राजधानी में हुआ सबसे बड़ा प्रदर्शन था। रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही भाजपा ने हाल ही में राज्य चुनावों में जीत हासिल की हो, लेकिन यह आंदोलन उस पनपते हुए असंतोष का संकेत दे रहा है, जो आगामी चुनावों में मोदी की भाजपा के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा। इसमें विशेष रूप से भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश का जिक्र किया गया है, जहां अगले साल चुनाव होने वाले हैं।

द गार्डियन: ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने कहा है कि इस अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन में 50,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से छात्र और जेन-जेड पीढ़ी के युवा शामिल थे। अखबार ने लिखा कि दिल्ली की सड़कों पर गुस्सा साफ महसूस किया जा सकता था, जहां प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा पर देश के युवाओं को विफल करने का आरोप लगाया। अखबार ने चश्मदीदों के हवाले से बताया कि पुलिस ने बिना उकसावे के महिलाओं और बच्चों तक पर हमला किया, जिससे करीब 60 लोग घायल हो गए। द गार्डियन ने विपक्ष के प्रदर्शन पर भी विस्तृत रिपोर्ट छापी। अखबार ने कहा कि पुलिस ने राहुल गांधी को हाथ और पैर से पकड़कर जबरन भीड़ से निकाला और एक बस में डाल दिया, जब वह प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे थे। राहुल ने पीएम मोदी पर भारत के युवाओं का भविष्य तबाह करने का आरोप लगाया।

सीएनएन: अमेरिकी न्यूज नेटवर्क सीएनएन ने इन प्रदर्शनों को दिल्ली की सड़कों पर उबलता राजनीतिक गुस्सा करार दिया है। सीएनएन ने बताया कि मुख्य रूप से युवा प्रदर्शनकारियों को आंसू गैस और पुलिस के डंडों का सामना करना पड़ा। सोमवार को हुई हिंसा में करीब 150 प्रदर्शनकारी घायल होकर अस्पताल पहुंचे और पुलिस की बर्बरता के वीडियो वायरल होने के बाद सरकार की ओर से इंटरनेट बंद करने के आदेश से लोगों का आक्रोश और भड़क गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी सरकार आलोचकों के निशाने पर है, जिनका मानना है कि इस सरकार ने अपने एक दशक से अधिक के शासन में लगातार असहमति को बेरहमी से कुचला है। सीएनएन ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर से बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर कॉकरोच से किए जाने के बाद जो आंदोलन एक मजाक के रूप में शुरू हुआ था, वह अब लाखों युवाओं की हताशा को व्यक्त करने वाली एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन गया है। रिपोर्ट में प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाकर अस्पताल ले जाने और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके आवास के बाहर धरना दे रहे विपक्षी नेताओं को लेकर भी बात की गई है।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल और एजेंसी फ्रांस प्रेस (एएफपी): द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने छात्रों के इस आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए इसे उन सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बताया है जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कई वर्षों में सामना किया है। दूसरी तरफ एएफपी समाचार एजेंसी ने भारत में चल रहे छात्रों के इस आंदोलन को पिछले पांच साल का ऐसा सबसे बड़ा प्रदर्शन करार दिया, जो हिंसक हो गया। इसमें भीड़ की तरफ से पथराव किए जाने और पुलिस द्वारा आंसू गैस व लाठियों का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, जिसमें 60 नागरिक और 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। एजेंसी ने सोशल मीडिया से उपजे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के इस आंदोलन को 2024 में मोदी के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती करार दिया है।

Post Your Comment here.
Characters allowed :


01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05