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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आस्था का व्यवसायीकरण

News

2026-06-27 14:14:41

राम जन्मभूमि मंदिर से सामने आया चढ़ावा चोरी का यह घटनाक्रम केवल एक वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह उस संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र का नैतिक पतन है जिसे इस परिसर की शुचिता और सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। न्यास के शीर्ष अधिकारियों—महासचिव चंपत राय का इस्तीफा और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की छुट्टी—इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पानी सिर से ऊपर जा चुका था। लेकिन क्या केवल चेहरों को बदल देना ही इस गंभीर व्यवस्थागत विफलता का समाधान है? इस पूरे मामले ने तब सबसे वीभत्स रूप ले लिया जब जांच की आंच ट्रस्ट के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के भीतर तक पहुंच गई। महासचिव चंपत राय के निजी चालक टिन्नू समेत आठ लोगों की गिरफ्तारी यह साफ करती है कि यह कोई बाहरी डकैती या झपटमारी नहीं थी। यह घर का भेदी लंका ढाए वाली कहावत का साक्षात उदाहरण है। यह घटना उन दावों की धज्जियां उड़ाती है जिनमें राम मंदिर परिसर को देश के सबसे सुरक्षित और अभेद्य क्षेत्रों में से एक बताया जाता था।

राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली शुरूआत से ही अत्यधिक केंद्रीकृत रही है। कुछ ही हाथों में असीमित वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार होने के कारण स्वतंत्र आॅडिट और बाहरी निगरानी की व्यवस्था को दरकिनार किया गया। जब करोड़ों रुपये का चढ़ावा रोजाना आ रहा हो, तो वहाँ डिजिटल ट्रैकिंग, रीयल-टाइम काउंटिंग और सीसीटीवी की त्रिस्तरीय कमान होनी चाहिए थी। ड्राइवर जैसे गैर-प्रशासनिक स्टाफ का वित्तीय गतिविधियों के इतने करीब होना प्रशासनिक ढिलाई की पराकाष्ठा है। चंपत राय का इस्तीफा और अनिल मिश्रा की विदाई स्वागत योग्य कदम हो सकते हैं, लेकिन यह कार्रवाई तब हुई है जब बदनामी का घड़ा भर चुका था। सवाल यह उठता है कि क्या आंतरिक सतर्कता विंग पूरी तरह सो रही थी? क्या इतने बड़े परिसर में चढ़ावे की पेटियों से लेकर बैंक खातों में जमा होने तक की प्रक्रिया का कोई वीकली या डेली मिलान नहीं हो रहा था? ट्रस्ट में काम करने वाले कर्मचारियों, सहायकों और यहाँ तक कि शीर्ष अधिकारियों के निजी स्टाफ की पृष्ठभूमि की गहन जांच क्यों नहीं की गई?

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

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