2024-11-23 11:34:17
संवाददाता
नई दिल्ली। गरीब किसानों के हक की बात हो या दलित, पिछड़ों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन जैसी गतिविधि हो, इनकी सूचना मिलते ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर की मूल निवासी सीमा गौतम को डर सताने लगता है कि कहीं किसी मामले में उनपर और भी गंभीर धाराओं में मामले न दर्ज हो जाएं। वह अब तनाव में हैं, क्योंकि उनका मानना है कि गरीब और हाशिए के समाज के लिए समय-समय पर धरना-प्रदर्शन करने, उन पर होने वाले उत्पीड़नों के खिलाफ आवाज उठाने, सरकार और प्रशासन से पत्राचार करने के कारण वह स्थानीय प्रशासन की क्रूर कार्रवाई का शिकार हो चुकी हैं। ‘अम्बेडकर जन मोर्चा’ संगठन से 2019 में जुड़ीं 31 वर्षीय सीमा गौतम संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। सीमा ने बताया कि संगठन का उद्देश्य दलित, पिछड़ों और गरीबों पर होने वाले अत्याचार, उत्पीड़न व उनकी मांगों को सरकार व शासन के सामने अनुशासित तरीके से रखना है। इस संगठन के अंतर्गत उन्होंने कई बार न्याय और जनहित के मांगों को लेकर आन्दोलन भी चलाया है।
अपनी चुनौतियों के बारे में बताते हुए सीमा गौतम ने बहुजन स्वाभिमान को बताया कि ‘गरीबों या दलितों के साथ अत्याचार या हिंसा जैसे मुद्दों पर मैं बात करती हूँ या काम करना चाहती हूँ तो हमारे संगठन के पदाधिकारियों को या मुझे पुलिस द्वारा उठा लिया जाता है।’ सीमा गौतम ने बताया कि उनकी मां की हत्या हो चुकी है। पिता की 2010 में ही मौत हो गई थी। घर में छोटे भाई-बहन हैं।
गरीब भूमिहीनों को जमीन दिलाने के लिए किया था आंदोलन
आगे बताया कि गोरखपुर जिले में 17 दिसबंर 2022 को गरीब भूमिहीन को जमीन दिलाने का गोरखपुर में आंदोलन किया गया, आंदोलन शांतिपूर्ण था। जमीन आंदोलन के 6 दिन बाद अचानक से शाम को श्रवण कुमार निराला जी का घर सीज कर दिया गया यह कहते हुए कि आंदोलन करने के लिए आपके पास इतना पैसा कहा से आया? बैंक डिटेल दीजिए, परेशान करने के नियत से बैंक डिटेल भी कोर्ट में दीजिए कह कर 12 दिन तक घर सीज कर दिया गया था। वहीं 25 दिसबंर 2022 को गोरखपुर में एक नाबालिक बच्ची का रेप करके हत्या कर दिया गया, आईपीसी की धारा 302, 376, 504, 506 के अंतर्गत नामजद मुकदमा दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं किया गया। जब पीड़ित परिवार के साथ अंबेडकर जन मोर्चा द्वारा न्याय की मांग किया तब 7 फरवरी 2023 को सीमा गौतम के घर आधी रात को गोरखपुर पुलिस द्वारा छापामारी किया गया, घर पर नोटिस चिपकाया गया।
आंदोलन सुबह 9 बजे से लेकर रात के लगभग 12 तक चला। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जनता को भरोसा दिया कि उनकी बात सरकार से जमीन के मुद्दे पर हो चुकी, दो महीने लगेगा सारी प्रक्रिया करने में। जिसके बाद आंदोलन समाप्त हो गया। जब जनता अपने-अपने घर चली गई तब अंबेडकर जन मोर्चा के मुख्य संयोजक श्रवण कुमार निराला जी समेत 15 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। जिसमें दलित पत्रकार, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। अगले दिन 11 अक्टूबर 2023 को सुबह 7 बजे गिरफ्तार हुए लोगों समेत 28 लोगों पर झूठा आरोप लगा कर मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ के दौरान 11 अक्टूबर 2023 को धारा 307 लगाकर इन लोगों को महीनों तक झूठे आरोपों में जेल में रखा गया। दो महीने तक लगातार सीमा गौतम के घर पर छापामारी की गई। उनके छोटे भाई को और रिश्तेदारों को 3 दिन बाद गिरफ्तार करके 5 दिन तक थाने में रखा गया।
कार्यकर्ता श्रवण कुमार निराला को बिना कारण बताए किया गिरफ्तार
गोरखपुर में अंबेडकर जन मोर्चा का कोई भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी अगर किसी भी सामाजिक आंदोलन या गतिविधियों का समर्थन करता है तो पुलिस उसको बिना कारण बताए गिरफ्तार कर लेती है। पुलिस ने श्रवण कुमार निराला को 15 अक्टूबर 2024 को लगभग 4:40 बजे पुराने आरटीओ आॅफिस के पास से सादे ड्रेस में गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस श्रवण कुमार निराला जी के साथ अपराधियों के जैसा व्यवहार कर रही है, इसके आड़ में श्रवण कुमार निराला जी के साथ कोई बड़ी अप्रिय घटना की साजिश रच रही है, जिसकी पूरी संभावना है। श्रवण कुमार निराला जी गरीब शोषित, दलित, कमजोरों की संवैधानिक तरीके से आवाज उठाते हैं। श्रवण कुमार निराला जी के साथ पिछले एक वर्ष में 5 बार स्थानीय पुलिस धोखे से गिरफ्तार कर चुकी है।
एक ही महीने में 2 एफआईआर दर्ज
सीमा ने बताया कि गोरखपुर के ग्रामीण इलाकों में दलित, गरीब और मजदूर वर्ग की हजारों महिलाओं को छोटे-मोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए कई माईक्रो फाइनेंस कंपनियों ने खूब ऋण दे रखा है। जिस परिवार के पास कोई काम काज या व्यवसाय नहीं है उन्हें कई लोन दे दिए हैं। लेकिन जब महिलाएं समय पर लोन की किस्तों को नहीं भर पातीं तो उनके साथ अभद्रता और गाली-गलौच भी की जाती है। उन्होंने कहा कि, राशन कार्ड कट जाएगा, सरकारी लाभ नहीं मिलेगा, आपकी जगह दूसरे को लाभ दे दिया जाएगा आदि बातों से ग्रामीण व अशिक्षित महिलाओं को बरगला कर लोन दे दिया गया या उनके पहचान पत्रों को लेकर लोन निकाल लिया गया।
कर्ज के चक्कर में कई परिवार उजड़ चुके हैं। जमीन बंधक रखने के बाद भी वह कर्ज नहीं चुका पाए। साथ ही ऐसे भी मामले सामने आए कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से लाखों रुपए कर्ज के तौर पर निकालकर आरोपी फरार हो गए, जिसके बाद कर्ज का बोझ समूह में शामिल महिलाओं पर आ गया।
चूंकि माईक्रो फाइनेंस कंपनियों के रवैये के प्रति वह मुखर थीं और लोगों को ऋण के नाम पर हो रहे शेषण के बारे में जागरूक कर रहीं थीं. जिसके बारे में इन कंपनियों को पता चल चुका था। जब गोरखपुर में ऋण माफी की अफवाह के कारण हजारों महिलाएं जुटने लगीं तो माईक्रो फाइनेंस कंपनियों को उन्हें फंसाने का मौका मिल गया।
ऋण माफी की अफवाह के मामले में आरोप लगाए गए थे कि अम्बेडकर जनमोर्चा के पदाधिकारियों की ओर से गांव-गांव जाकर फर्जी कर्जमाफी की सूचना फैलाई गई थी। सीमा गौतम और श्रवण निराला पर आरोप है कि वे लोगों को माइक्रो फाइनेंस कंपनी का लोन न चुकाने के लिए भड़काते थे। साथ ही कर्ज माफ करने के नाम पर एक फॉर्म को भरने के लिए 500-500 रुपए भी महिलाओं से वसूले और थाने की मोहर लगाकर ऋण माफी का प्रमाण पत्र भी दिया। मामले में माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन नेटवर्क के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट धीरज सोनी की शिकायत पर फरेंदा पुलिस ने पहले 15 अक्टूबर को जनमोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा गौतम, सहयोगी श्रवण कुमार निराला, व अन्य अज्ञात सहयोगी के खिलाफ बीएसएन 2023 के तहत, धारा 318 (4), 338, 336(3), 340(2), 56 के अंतगत मामला दर्ज किया गया है.। इसके एक दिन बाद 16 अक्टूबर को फिर उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक की डिविजनल हेड ऋतु साहू ने भी गोरखनाथ थाने में उक्त सभी लोगों के खिलाफ समान धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है. फिलहाल, अभी श्रवण कुमार जेल में हैं।
लगातार हुए इन दोनों एफआईआर पर सीमा ने कहा कि एक दैनिक अखबार ने छापा है कि हम पर आरोप लगाया गया है कि हम थाने की मोहर लगाकर ऋण माफी का प्रमाण पत्र बांट रहे थे। 500 रुपए ले रहे थे। लेकिन आरोप लगाने वाले लोगों ने यह नहीं बताया कि हम किस थाने का मुहर लगा रहे थे। किन महिलाओं से हमने पैसे लिए। किस गांव में हम लोग गए थे यह सब करने? यहां दलितों पर अत्याचार हो रहें हैं। उन्हें मारा-पीटा जा रहा है। पुलिस उनके मामले तक दर्ज नहीं कर रही है। हम मुख्यमंत्री जी के शहर में हैं जहां हम यह सब बात कर रहें हैं। हम दलित हैं, इसलिए हम दोषी हैं। मुख्यमंत्री के इशारे पर हमारा जातिगत उत्पीड़न किया जा रहा है। गोरखपुर प्रशासन से मुझे कोई उम्मीद नहीं है।
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