




2026-01-10 14:33:40
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के एक छोटे से गांव में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। स्थानीय कंपाउंडर पारस राजपूत ने दलित महिला सुनीता की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। लगभग 40 वर्ष की सुनीता, अपनी बेटी के साथ खेत की ओर जा रही थीं जब पारस ने रूबी के साथ दुर्व्यवहार की कोशिश की। मां के बीच में आने पर आरोपी ने गुस्से में धारदार हथियार से सुनीता के गले पर वार कर दिया, इसके बाद पारस रूबी को अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी में डालकर फरार हो गया। सुनीता को अस्पताल ले जाया गया जहां उपचार के दौरान शाम को उनकी मौत हो गई।
कमजोरों पर जुल्म ही हिंदुत्व का एजेंडा है
दुनियांभर में शायद ही कहीं ऐसी बर्बरता, हिमाकत व बदमाशी की जाती हो जहाँ दिन के आठ बजे, बिना किसी शत्रुता के, माँ के साथ जाती बेटी का अपहरण कर लिया जाए। और माँ द्वारा बदमाशी का विरोध करने व बेटी का संरक्षण करने पर फरसे से दिनदहाड़े कत्ल कर दिया जाए। दोहरे जघन्य अपराधों के बावजूद न तो प्रदेश सरकार का और न ही केन्द्र सरकार का कोई बयान आया। दूसरी ओर दिन-रात हिन्दू संगठन और संस्कृति की बात करने वाले भी कमजोर वर्गों पर अन्याय व अत्याचारों पर चुप्पी साध लेते हैं। सन 2026 के दौरान पूरे भारत में हिन्दू सम्मेलनों की चर्चा लगभग रोज ही दैनिक समाचार पत्रों में देखने को मिलती है। और तो और बांग्लादेश में हो रही हिन्दुओं की हत्याओं पर भी यहां का मीडिया और हिन्दुत्ववादी संगठन गला फाड़कर चिल्ला रहे हैं, लेकिन अपने ही देश में कमजोर वर्गों पर होते अत्याचारों पर ये सारे के सारे हिन्दूवादी संगठन पीड़ितों को संरक्षा व सुरक्षा देने की बजाय प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर अपराधियों के बचाव में लग जाते हैं। कहीं कमजोरों पर जुल्म और ज्यादतियों को बढ़ाना ही हिंदुत्व का एजेंडा तो नहीं है। मुसलमानों व ईसाईयों के खिलाफ हिंसा और नफरत फैलाना ही तो हिन्दुत्व का एजेंडा नहीं है। और यदि ऐसा नहीं तो भारत में होते इन अन्याय और अत्याचारों पर हिन्दू संगठन चैन की सांस कैसे लेते हुए रह पाते हैं? ऐसे अन्याय अत्याचारों का प्रतिकार व प्रतिरोध कभी भी आरएसएस, हिन्दू महासभा, बजरंग दल, अभिनव-भारत जैसे आदि-आदि संगठनों को करते भारत-भूमि पर नहीं देखा गया। फिर वह कौन सी परिसंकल्पना है रास्ट्रवाद की जिसके लिए ये सभी संगठन कार्य कर रहे हैं? और तो और प्रदेश सरकार का बुल्डोजर मामूली से मामूली मामलों में मुस्लिमों, पिछड़ों व अनुसूचितों के मकानों व गरीबों की झुग्गी-झोंपड़ियों पर कठोर ठंड में भी अक्सर उनके आशियाने उजाड़ते दिखाई देता है, लेकिन उक्त वर्गों के खिलाफ दुर्दांद अपराधियों के मकानों पर कभी ऐसा विकल्प बनते नहीं देखा गया। यह दोहरी नीति ऐसा नहीं कि आम जनता नहीं देख या समझ पा रही, समझती है। इसलिये सरकार को चाहिए कि अगर इस पक्षपाती रवैये पर कुछ धंधलका फेरना चाहती है तो थाना सरधना क्षेत्र के गांव कपसाड़ कांड में अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही कर शीघ्रातिशीघ्र कठोरतम उपायों से दंडित करे ताकि गरीबों, मजलूमों, वंचितों व अल्पसंख्यकों का सरकार पर भरोसा बने व दुर्दांत अपराधियों की रूह ऐसे अपराध करने से पहले कांप उठे। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए यदि अपराधियों के परिवारजनों को भी कष्ट हो तो भी कोई अतिरेक नहीं। कम से कम वे इन अपराधियों को उस कष्ट के लिए जिम्मेदार तो मानेंगे। आशा है, सरकारें आमजन में अपने भरोसे को कायम करने का प्रयास करेंगी।





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