




2026-01-10 14:28:54
संवाददाता
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘जीएसटी बचत उत्सव’ के प्रचार पर महज 55 दिनों में 4.76 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर दिये। सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि यह राशि केवल प्रिंट मीडिया विज्ञापनों पर खर्च की गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा दिए गए आरटीआई जवाब के मुताबिक, सरकार ने जीएसटी सुधारों यानी बचत उत्सव के प्रचार पर 4 सितंबर 2025 से 28 अक्टूबर 2025 के बीच 4,76,12,276 रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए। यह जानकारी महाराष्ट्र के अमरावती बसुदेव बोस द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई है।
सिर्फ प्रिंट मीडिया का आंकड़ा
आरटीआई के जवाब में साफ किया गया है कि यह खर्च केवल प्रिंट मीडिया में दिए गए विज्ञापनों से संबंधित है, जिसे केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय संचार ब्यूरो ने जारी किया। इलैक्ट्रोनिक मीडिया पर खर्च का ब्यौरा इससे अतिरिक्त होगा। दोनों को मिलकर शायद यह खर्च 10 करोड़ के ऊपर पहुँच सकता है। हालांकि, आरटीआई में यह पूछा गया था कि जीएसटी सुधारों के प्रचार पर प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया, होर्डिंग्स और बिलबोर्ड्स पर कुल कितना खर्च हुआ, लेकिन जवाब में सिर्फ प्रिंट मीडिया का आंकड़ा ही दिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि यदि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया और आउटडोर विज्ञापनों का खर्च जोड़ा जाए, तो कुल राशि इससे कहीं अधिक हो सकती है।
क्या है जीएसटी बचत उत्सव? ‘जीएसटी बचत उत्सव’ केंद्र सरकार द्वारा नई पीढ़ी के जीएसटी सुधारों (नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स) को जनता तक पहुंचाने के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी संघियों का पाखंडी प्रचार अभियान है। संघी मानसिकता के सभी अंधभक्त कभी भी काम में विश्वास नहीं रखते वे हमेशा जनता को झूठ और पाखंड ही परोसते रहते हैं जिसके तहत भारतीय जनता को उनके पाखंड का पता न चल सके। जीएसटी सुधार के नाम पर यह उनका जनता के बीच बने रहने का एक छलावा व दिखावा है। सरकार का दावा है कि इन सुधारों से रोजमर्रा की जरूरतों की कई वस्तुएं कर-मुक्त हुई हैं या उन पर 5 प्रतिशत तक की न्यूनतम जीएसटी दर लागू की गई है। इन सुधारों के तहत खाने-पीने की वस्तुएं, कपड़े, साबुन, टूथपेस्ट जैसी जरूरी चीजों के साथ-साथ घर बनाना, गाड़ी खरीदना, बीमा प्रीमियम जैसी सेवाओं पर टैक्स बोझ कम होने का दावा किया गया है। ‘जीएसटी बचत नाम के पाखंडी उत्सव’ की शुरूआत के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए एक औपचारिक पत्र भी लिखा था, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया था। जीएसटी बचत उत्सव सिर्फ एक सुनियोजित छलावा है जिसके माध्यम से भाजपा कार्यकर्त्ताओं व अंधभक्तों को व्यस्त रखकर देश की आम जनता के बीच में दिखते रहना है। इस तरह के पाखंडी उत्सव का फायदा केवल भाजपा संघियों से जुड़े अंधभक्तों को है जो विज्ञापन आदि के व्यवसाय में लगे हुए है। ऐसे व्यक्ति भाजपा संघियों के प्रचार तंत्र का हिस्सा हैं। भाजपा सरकारों के व्यापारी मित्र ऐसे उत्सवों के अभिन्न अंग रहते हैं और सरकारें भी उन्हें अंधा फायदा पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है। संघी भाजपा सरकार ब्राह्मण बनिया गठजोड़ के साथ देश में बनी हुई है बाकी अन्य समुदाय इनमें उलझकर मूर्ख बन रहे हैं।
देश की बहुजन जनसंख्या को मनुवादी संघियों के छलावे से दूर रहना चाहिए, ये हमेशा भोली-भाली जनता को अपने पाखंडी कुकृत्यों में फँसाते हैं। अपने छलावे में फँसाने का माध्यम इन्होंने धर्म को बनाया हुआ है जिसके लिए इन्होंने लाखों की संख्या में कथित साधु-संत, अंधभक्त आदि की फौज खड़ी की हुई है, वे सारे दिन देश की गली-गली घूमकर सत्ताबल के धन से इनके झूठों का प्रचार जनता में करते रहते हैं और देश की भोली-भाली जनता का वोट देने का या चुराने का षड्यंत्र करते रहते हैं। इन्हें किसी के दुख दर्द से कोई मतलब नहीं है और न ही इन्हें जनता के कल्याण के लिए काम करना है। इन्हें हर रोज जनता के बीच एक नए झूठ पाखंड आदि को उत्सव कहकर प्रचारित करना है, इन धूर्तों से कोई पूछे कि उत्सव क्या होता है? इस तरह के उत्सव से जनता को कोई फायदा नहीं है इससे केवल और केवल भाजपा संघियों के व्यापारी मित्रों को ही फायदा है।





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