




2025-11-29 18:37:36
दिल्ली में लालकिले के सामने विस्फोट हुआ। एक चलती कार में विस्फोटक भरा था, वह फट गया। लोग मारे गए और घायल भी हुए। यह आतंकवादी काम था। प्लान किसी का भी हो, किसी ने भी किया हो, काम तो आतंकवाद का ही था। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। यह काम बिहार में दूसरे फेज की वोटिंग से पहले हुआ। इसलिए ज्यादा डर लगा। डर लगा कि कहीं बिहार चुनाव को प्रभावित करने के लिए तो नहीं हुआ है? वैसे तो ज्ञानेश जी ने पहले ही ज्ञान दे दिया था कि उन्होंने रकफ के जरिये मतदाता सूची पवित्र कर दी है। काम पूरा कर दिया गया है पर सरकार जी को और चाणक्य जी को पूरा भरोसा नहीं हो रहा था...। और फिर इस विस्फोट ने सबका भरोसा हिला दिया.. विस्फोट पुलवामा की तर्ज पर किया गया था। एक विस्फोटक से भरी कार पूरी दिल्ली में दिन भर घूमती रही और देर शाम को विस्फोट कर दिया गया। यह कार कर्तव्य मार्ग पर भी गई पर पकड़ी नहीं गई। हाँ, अब जरूर धड़पकड़ जारी है।
पहले कानून का पालन करने वाले सबको एक आंख से देखते थे पर पर अब वहाँ पर भी दो आंख वाले होते हैं। खबर है कि विस्फोट करने वाले को आठ लाख की सहायता देने वाली हिन्दू डॉक्टर को क्लीन चिट मिल गई है, और विस्फोट करने वाले को सौ रुपए उधार देने वाला और मैस में साथ खाना खाने वाला मुसलमान डॉक्टर जेल में है। एज यूजयल, सरकार जी ने कहा है कि आतंकवादियों को छोड़ा नहीं जायेगा। उनको कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। हमें उम्मीद है सरकार जी अपनी इस बात को हमेशा की तरह अगली वारदात में भी दोहरायेंगे?
एक बात और एज यूजयल हुई। सरकार जी ऐसी किसी घटना के समय राजधानी में नहीं होते हैं। एक बार जंगल में मंगल कर रहे थे। दूसरी बार किसी अरब देश में थे और इस बार दुर्घटना होते ही भारी मन से भूटान चले गए। सरकार जी के विमान का पायलेट भी बता रहा था कि इस बार विमान बहुत भारी था।
खैर, इस बार भी, हर बार की तरह सरकार जी और उनके मंत्रियों ने समझाया कि आतंकवादी घटनाओं से देश को बचाने के लिए उनकी सरकार कितनी जरूरी है। और हर बार की तरह इस बार भी हम मान गए। हम भी मान गए कि आतंकवादी घटनाएं होती रहें, और सरकार जी हमें उनसे बचाते रहें, इसके लिए सरकार जी कितने जरूरी हैं। सरकार जी के ग्यारह साल के कार्यकाल में आतंकवाद ने इतनी उन्नति अवश्य की है कि यह कृत्य पहले कम पढ़े लिखे, बेरोजगार लोगों का काम माना जाता था। अब पढ़े लिखे इंजीनियर और डॉक्टर भी इसमें शामिल होने लगे हैं। उन्हें भी लगने लगा है कि वे देश की मुख्य धारा में शामिल नहीं हैं, कि उनसे भी दुभात होता है।
व्यंग्य अपार्ट, सच में तो सरकार ऐसी हो जो सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा ही नहीं दे, उस पर अमल ीाी करे। सर्वधर्म सम्भाव सिर्फ भाषणों में न हो, जीवन में और सरकार के काम में झलके। सरकार और सरकार के सभी मंत्री, देश के सभी नागरिकों को, भले ही वे किसी भी जाति, संप्रदाय या धर्म के हों, अपना समझें, अपने देश का समझें और बात बात पर विदेश न भेजें। और जब वह दिन आएगा, तभी देश आतंकवाद से मुक्त हो पायेगा।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)
वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में आतंकी हमलों में गयी 5000 से अधिक जानें
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने मार्च 1998 से मई 2004 तक सत्ता संभाली। इस अवधि में भारत ने कई प्रमुख आतंकी हमलों का सामना किया, मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और महानगरों में। सरकारी आंकड़ों (गृह मंत्रालय और साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल) के अनुसार, 1998-2004 के बीच लगभग 3,500-4,000 आतंकी घटनाएं हुईं, जिनमें 5,000 से अधिक मौतें दर्ज की गईं। ये हमले पाकिस्तान समर्थित समूहों (जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद) और नक्सली/अलगाववादी तत्वों से जुड़े थे।
=14 फरवरी 1998 कोयंबटूर, तमिलनाडु
श्रृंखला बम विस्फोट; राजनीतिक रैली को निशाना बनाया।
58 मारे गए, 200+ घायल
=18 मार्च 1999 सिनारी, बिहार
नक्सली हमला गांव पर।
32 मारे गए
=24 दिसंबर 1999
कंधार, (भारतीय विमान)
इंडियन एयरलाइंस उड़ान कउ-814 का अपहरण; तालिबान नियंत्रित क्षेत्र में उतारा।
1 यात्री मारा गया (अपहरण के दौरान), कई घायल
3 आतंकियों को रिहा किया गया (मसूद अजहर सहित)।
=21 मार्च 2000
चड्डा सिंहपुरा, जम्मू-कश्मीर
सिखों पर नरसंहार।
35 मारे गए
=1 अगस्त 2000
पहलगाम, जम्मू-कश्मीर
अमरनाथ यात्रियों पर हमला।
35 मारे गए
=20 मई 2000
बागबर, त्रिपुरा
बंगाली प्रवासियों पर नरसंहार।
25 मारे गए
=1 अक्टूबर 2001
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर
विधानसभा पर कार बम हमला।
38 मारे गए, कई घायल
=13 दिसंबर 2001
नई दिल्ली
संसद भवन पर हमला; 5 आतंकियों ने घुसपैठ की।
9 सुरक्षाकर्मी मारे गए, 18 घायल
=14 मई 2002
कलूचक, जम्मू-कश्मीर
बस स्टैंड पर ग्रेनेड हमला।
34 मारे गए (मुख्यत: परिवार सहित यात्री)
=13 मई 2002
जौनपुर, यूपी
12 मारे गए, 80 घायल
=24 सितंबर 2002
अक्षरधाम, गुजरात
मंदिर परिसर पर हमला; आतंकियों ने घुसपैठ की।
33 मारे गए, 80+ घायल
=23 मार्च 2003
नदीमार्ग, जम्मू-कश्मीर
कश्मीरी पंडितों पर नरसंहार।
25 मारे गए
=25 अगस्त 2003
मुंबई, महाराष्ट्र
श्रृंखला बम विस्फोट ट्रेनों और स्टेशनों पर।
52 मारे गए, 100+ घायल
=15 अगस्त 2004
धेमाजी, असम
स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल पर बम हमला।
18 मारे गए (मुख्यत: बच्चे), 40 घायल
=2 अक्टूबर 2004
डिमापुर, नागालैंड
बाजारों में श्रृंखला बम विस्फोट।
30 मारे गए, 100 घायल
सूची विकिपीडिया, द हिंदू, बीबीसी, और टेलर एंड फ्रांसिस जर्नल जैसे स्रोतों पर आधारित है।





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