Thursday, 3rd April 2025
Follow us on
Thursday, 3rd April 2025
Follow us on

बाबा साहेब का अपमान, देश का अपमान

संघी अमित शाह को चुकानी पडेगी इस अपमान की कीमत, शाह को पद से हटायें या फिर खुद सत्ता गंवाने को तैयार रहें मोदी
News

2024-12-20 08:39:50

नई दिल्ली। 17 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में देश के गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. बी.आर अम्बेडकर के बारे में जो अपमान जनक टिप्पणी की थी हम उसकी घोर निंदा करते हुए मोदी सरकार से अपील करते हैं कि ऐसे लोगों को तुरंत पद से हटाया जाये और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाये।

ज्ञात हो, संसद में विपक्ष पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा था कि अभी एक फैशन हो गया है...आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर। इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता। जिसके बाद विपक्षी दल और अम्बेडकरवादी संगठन लगातार शाह के बयान की निंदा कर रहे हैं, देशभर में उनके पुतले जलाए जा रहे हैं और उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं। इन सबके बीच अप्रवासी भारतीयों में भी घटना को लेकर गहरा रोष है। अपनी नाराजगी दिखाने के लिए एनआरआई अंबेडकरवादियों ने गुरूवार को एक आॅनलाइन पिटीशन शुरू किया जो देखते ही देखते तेजी से लोगों का समर्थन प्राप्त कर रहा है। यह याचिका भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को संबोधित है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर पर की गई टिप्पणी पर कार्रवाई की मांग करती है।

हम यह भी याद दिलाना चाहते हैं कि मनुवादी संघी मानिसकता के लोगों का यह पहला कृत्य नहीं हैं उनके पूर्ववर्ती नेता 1950 और उससे पहले भी बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के ऊपर अपनी औच्छी मानसिकता का परिचय देते हुए अपमानजनक टिप्पणियां व कृत्य करते रहें हैं। बहुजन समाज उनके ऐसे कृत्यों पर गंभीर संज्ञान ले रहा है और सही समय आने पर सही जवाब भी देगा। अमित शाह का संसद में दिया गया बयान उनके पूर्ववर्ती संघियों जैसे दीनदयाल उपाध्याय, करपात्री महाराज जैसे पाखंडी मनुवादियों की याद दिलाता है। संघी मानसिकता के ब्राह्मणवादी लोग हमेशा एससी/एसटी लोगों के विरोधी ही रहें हैं। संघियों ने अपनी षड़यंत्रकारी नीतियों से एससी/एसटी के लोगों को हमेशा नीच मानकर पशुओं से भी बदत्तर व्यवहार किया है जिसका जीता-जागता उदाहरण उनकी मनुस्मृति में निहित है।

मगर आज का जागरूक एससी/एसटी समाज उनके ऐसे अपमानजनक बयानों को लेकर कम चिंतित है लेकिन भाजपा संघियों की गोद में बैठे जो राजनैतिक नेता वहां रहकर आनंद ले रहे हैं। आज का जागरूक एससी/एसटी समाज उन्हीं को ऐसे कृत्यों के लिए जिम्मेदार मानता है। संसद में आज 131 सांसद एससी/एसटी समाज से हैं। इनके अलावा अति पिछड़ी जातियां जैसे, नाई, कुम्हार, बढ़ई, लौहार, धोबी, तेली-तमोली आदि के कुछ सांसद संसद में मौजूद हैं। साथ ही कुछ मुस्लिम समुदाय के सांसद भी संसद में हैं। साथ ही संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी भी ठीक-ठाक है। ये सभी सांसद जो इस समय संसद में विराजमान हैं वे सभी बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के परिश्रम और त्याग की बदोलत ही वहां बैठे हैं। उन सभी को मनुवादी मोदी शासन के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर इस मुद्दे पर संसद में अपनी ताकत दिखानी चाहिए। अगर ये सभी सांसद एक होकर मोदी संघी मानिकता की सरकार के विरूद्ध एकजुट होकर सही कदम उठाते हैं तो मोदी संघी सरकार तुरंत गिर सकती है।

शाह का यह अपमानजनक बयान संघियों का पहला कृत्य नहीं है, संघी मानसिकता की मोदी सरकार ने पुरानी संसद के परिसर से बाबा साहेब की प्रतिमा जो 2 अप्रैल 1967 को बी.पी. मौर्य जी के अथक संघर्ष और बहुजन समाज के पैसे से लगाई गई थी उसे 3 जून 2024 की रात को बिना किसी पूर्व सूचना के वहां से हटाकर देश के पूरे बहुजन समाज का अपमान किया।

उसके बाद भी भाजपा संघी सरकार में आरक्षित सीटों से जीतकर जो आ रहे हैं उन्हें कोई शर्म महसूस नही हो रही है अगर उनमें जरा भी शर्म होती तो वह इस मुद््दे पर संसद से सामुहिक त्यागपत्र देकर बाबा साहेब की प्रतिमा को संसद में लगवाने का प्रयास करते।

उनकी इस जहरीली मानसिकता का इसका दूसरा उदाहरण तुगलकाबाद, दिल्ली में देखने को मिला था। जहां पर करीब 510 वर्ष पुराना संत शिरोमणी रविदास जी का मंदिर जिसका क्षेत्रफल करीब 7 एकड़ था यह भूमि सिकंद लोदी ने गुरू महाराज को दान में दी थी। उसे संघी मोदी सरकार ने डीडीए को आदेशित करके ध्वस्त करवा दिया था। जिसके बाद पूरे देश में गुरु जी के अनुयायियों में भारी रोष देखने को मिला और जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन हुए फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने करीब 28000 वर्ग मीटर जमीन में से मात्र 200 वर्ग मीटर जमीन मंदिर के लिए सीमित करके दे दी। इस मुद्दे पर भी एससी/एसटी समुदाय के जो सांसद भाजपा सरकार में बैठे थे वे इसे चुपचाप बैठकर देखते रहे और उन्होंने अपने जीवित रहने का जनता में कोई साक्ष्य पेश नहीं किया था।

देश के सभी एससी/एसटी समुदाय से निवेदन है कि मनुवादी संघी मानसिकता के किसी भी व्यक्ति को चाहे वह किसी भी राजनैतिक दल से संबंध रखता हो उसे न वोट दें और न किसी प्रकार का समर्थन दें बल्कि अपने पूरे सामर्थ से संघी मानसिकता के ऐसे व्यक्तियों को हराने का काम करें।

Post Your Comment here.
Characters allowed :


01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 11:08:05