




2026-05-16 15:51:10
भारत में मोदी संघी शासन के दौरान जितने प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं उस अनुपात में पेपर लीक होने के मामले हॉर्वड से पढ़कर आने वाले शासनकर्ताओं के शासन में नहीं हो रहे थे, जितने आज हार्डवर्क करने वाले संघी शासन के दौरान हो रहे हैं। इस संबंध में पीएम मोदी ने महाराजगंज की रैली में कहा कि देश के ईमानदार लोगों, किसानों और नौजवानों के ‘कठिन परिश्रम’ (Hard Work) ने सिद्ध कर दिया है कि यह ‘हॉर्वड’ (Harvard) की पढ़ाई से अधिक शक्तिशाली है। पूरा विश्व जानता है कि मोदी की शैक्षणिक योग्यता और ईमानदारी हॉर्वड से पढ़कर आने वालों के सापेक्ष नगण्य है, फिर भी मोदी जी अपनी बेशर्म संघी मानसिकता से बाज न आकर अपनी विफलता को भी झूठ के बल पर जनता में श्रेष्ठ बताकर परोसने का काम करते हैं।
पेपर लीक के मामले में भ्रष्टाचार: पेपर लीक मामले में सीबीआई ने राजस्थान के जामवारामगढ़ से बीजेपी नेता दिनेश बिश्वाल और उनके भाई मंगीलाल बिश्वाल को गिरफ्तार किया है। दोनों पर 30 लाख रुपए में पेपर खरीदने और उसे आगे बेचने का आरोप है, यह पहला मामला नहीं है, बीजेपी संघी शासन के दौरान जितने भी पेपर लीक के मामले हुए हैं उनमें अधिकाशत: बीजेपी के ही लोग लिप्त पाये गए हैं। सरकार ने बीजेपी नेताओं के लिप्त होने पर कहा है कि सीबीआई जांच कराई जा रही है, सरकार जनता को यह भी बताये कि आज तक जितने भी भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे सीबीआई या अन्य जाँचों के लिए दिये गए हैं उनकी जांच का परिणाम क्या रहा? और जांच में लिप्त पाये गए लोगों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई थी? यह आज तक किसी को नहीं मामूल चूंकि भ्रष्टाचार में लिप्त पाये गए व्यक्तियों में ज्यादातर संघी भाजपा से जुड़े नेता ही थे। नीट पेपर लीक के मामले में जांच एजेंसियों के अनुसार, गुड़गांव के एक डॉक्टर राकेश कुमार मांडवरिया (जिन्हें सीकर स्थित कंसल्टेंसी आॅपरेटर बताया जा रहा है) ने लीक पेपर प्राप्त किया और इसे 700 छात्रों तक पहुंचाया। दिनेश और मंगीलाल बिश्वाल भाइयों ने कथित तौर पर इस पेपर को परिवार के बच्चों के लिए 30 लाख रुपये में खरीदा था। बाद में उन्होंने इसे अन्य छात्रों और अभिभावकों को बेचकर मुनाफा कमाने की कोशिश की। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी लोगों को परीक्षा से करीब एक महीने पहले ही पेपर लीक होने की जानकारी थी। मांडवरिया को देहरादून से गिरफ्तार किया गया था। जांचकर्ता अब परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच कर रहे हैं, जिन्होंने मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल आपरेशंस ग्रुप ने पहले इन भाइयों को हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया। दोनों फिलहाल सीबीआई हिरासत में हैं। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि लीक का नेटवर्क कई राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि) तक फैला हुआ है। कोचिंग सेंटर्स, मध्यस्थों और छात्रों के बीच लिंक पाए गए हैं। सीबीआई अब पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों को नए तारीख पर बिना री-रजिस्ट्रेशन के परीक्षा देने का मौका मिलेगा। यह मामला छात्रों, अभिभावकों और पूरे शिक्षा तंत्र के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है।
सरकार पर विपक्ष का हमला
सीबीआई जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस गिरफ्तारी ने देश में तीखा राजनीतिक घमासान छेड़ दिया है। कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए दावा किया है कि दिनेश बिश्वाल जामवारामगढ़ क्षेत्र में सक्रिय बीजेपी कार्यकर्ता हैं। वे बीजेपी युवा मोर्चा से जुड़े रहे हैं और राजेंद्र सिंह राठौर जैसे मंत्रियों के साथ उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। कांग्रेस ने राजस्थान पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने में देरी का भी सवाल उठाया है। कांग्रेस ने इसे सिस्टम विफलता बताया। इससे साफ पता चलता है कि नीट पेपर लीक कांड में भाजपा-संघी कितनी गहराई से शामिल है। भाजपा लाखों छात्रों की मेहनत, सपनों और भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। इन पेपर लीक घोटालों के कारण निर्दोष छात्र कब तक पीड़ित होते रहेंगे। वहीं कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि सात साल में 70 पेपर लीक होना दुर्भाग्यपूर्ण है और बीजेपी सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
ताजा नीट पेपर लीक मामले के अलावा मोदी संघियों के अमृत काल में कई दर्जन परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं जिनके बारे में जनता को बार-बार भरोसा दिलाया गया, लेकिन जांच के परिणाम जनता को आजतक नहीं बताए गए। पिछले एक दशक के दौरान कुछेक पेपर लीक के मामलों की सूची हम जनता की जानकारी के लिए यहाँ दे रहे हैं जिन्हें पढ़कर जनता खुद आंकलन करे कि पेपर लीक मामले में बीजेपी के नेता ही सबसे ज्यादा भ्रष्टाचारी क्यों पाये जा रहे हैं?
पिछले 5-7 वर्षों में 70 से अधिक महत्वपूर्ण परीक्षाएं लीक और प्रभावित हुई
राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख परीक्षाएं
नीट-यूजी (2024): चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में धांधली और ग्रेस मार्क्स के विवाद ने देश भर में विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया।
यूजीसी-नेट (जून 2024): परीक्षा के अगले ही दिन शिक्षा मंत्रालय ने इसे रद्द कर दिया क्योंकि इनपुट मिले थे कि परीक्षा की शुचिता से समझौता हुआ है।
सीएसआईआर-नेट (2024): एहतियात के तौर पर इसे भी स्थगित किया गया था।
एसएससी सीजीएल (2017): इस परीक्षा के टायर-2 के पेपर लीक के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया और बड़े स्तर पर विरोध हुआ।
सीबीएसई 10/12 (2018): 10वीं के गणित और 12वीं के इकोनॉमिक्स का पेपर लीक होने के कारण लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी थी।
राज्य स्तर की बड़ी घटनाएं
उत्तर प्रदेश:
यूपी पुलिस कॉस्टेबल (2024): भारी विरोध के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द की।
यूपी आरओ/एआर (2024): समीक्षा अधिकारी परीक्षा भी लीक के कारण रद्द हुई।
यूपीटेट (2021): परीक्षा शुरू होने के कुछ ही समय बाद पेपर व्हाट्सएप पर वायरल हो गया था।
राजस्थान (सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक):
रीट (2021): बड़े स्तर पर नकल और लीक के कारण इसे रद्द करना पड़ा।
कॉस्टेबल रिक्रूटमेंट (2022): दूसरी पारी का पेपर लीक होने के कारण रद्द हुआ।
सीनीयर टीचर (2022): सामान्य ज्ञान का पेपर लीक हुआ था।
मध्य प्रदेश (व्यापमं के बाद):
एमपी टेट (2022): स्क्रीनशॉट वायरल होने के कारण विवादों में रही।
पटवारी एग्जाम (2023): एक ही सेंटर से टॉपर्स आने के कारण नियुक्ति पर रोक लगाई गई थी।
बिहार:
बीपीएससी 67 प्रीलिम्स (2022): परीक्षा शुरू होने से पहले पेपर टेलीग्राम पर आ गया था।
बिहार कॉस्टेबल (2023): बड़े पैमाने पर धांधली के बाद रद्द की गई।
वैसे भी आज पूरा देश यह सोचने के लिए विवश हो रहा है कि देश में जितने भी भ्रष्टाचारी है, व्याभिचारी है, महिलाओं का शोषण करने वाले हैं, देश के बैंकों से धन लेकर विदेश भागने वाले हैं, या अन्य किसी भी जघन्य अपराध में आरोपी पाये जा रहे हैं वे सभी भाजपा से ही जुड़े हुए क्यों हैं? देश की जनता को इस पर गंभीर संज्ञान लेना चाहिए। ये सभी आंकड़े देश की जनता को यह बताने के लिए पर्याप्त है कि अगर देश की शासन सत्ता से भाजपा-संघियों को हटा दिया जाये तो भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकती है।





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