




2026-07-25 14:53:44
नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 में हुई कथित धांधली, परीक्षा प्रणाली की विफलता और देश की राजधानी में जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए भीषण लाठीचार्ज के बाद चौतरफा घिरी केंद्र सरकार में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते आक्रोश, संसद में विपक्ष के आक्रामक तेवरों, देश भर के विश्वविद्यालयों में जारी आंदोलनों और विदेश में भारतीय डायस्पोरा द्वारा जताई गई चिंता के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसे देश की शिक्षा व्यवस्था में आए अब तक के सबसे बड़े संकट और सरकार पर बने अभूतपूर्व नैतिक व राजनीतिक दबाव के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।
इस्तीफे के पीछे के मुख्य कारण: सड़क से संसद तक का दबाव
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि यह पिछले कई हफ्तों से देश भर में उबल रहे छात्र आक्रोश और राजनीतिक दबाव की परिणति है:
1. NEET-UG परीक्षा धांधली और NTA पर उठे सवाल
वर्ष 2026 की NEET-UG परीक्षा के परिणाम सामने आने के बाद से ही देश के लाखों परीक्षार्थी, अभिभावक और शैक्षणिक संस्थान आंदोलनरत थे। पेपर लीक के आरोपों, ग्रेस मार्क्स में अनियमितताओं और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान पर यह आरोप लगा कि शुरुआत में उन्होंने गड़बड़ियों को खारिज करने का प्रयास किया, जिससे छात्रों का भरोसा टूट गया।
2. 20 जुलाई का जंतर-मंतर लाठीचार्ज और पुलिसिया कार्रवाई
20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तथा विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में आयोजित संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा किया गया लाठीचार्ज इस पूरे घटनाक्रम में टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार: सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो में सुरक्षा बलों द्वारा महिला छात्रों के साथ की गई बर्बरता ने नागरिक समाज और अदालतों तक में आक्रोश की लहर पैदा कर दी।
दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: जंतर-मंतर पर हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
3. वैश्विक स्तर पर हुई थू-थू और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन
नीट विवाद और जंतर-मंतर पर छात्रों के दमन की गूंज केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दी। न्यू यॉर्क, लंदन (भारतीय उच्चायोग के बाहर), टोरंटो, बर्लिन और डबलिन में प्रवासी भारतीयों और अंतरराष्ट्रीय छात्र समूहों ने विरोध प्रदर्शन किए। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत के लोकतांत्रिक साख पर उठ रहे सवालों ने सरकार पर नैतिक दबाव को और बढ़ा दिया।
धर्मेंद्र प्रधान का बयान और इस्तीफे का पत्र
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा एक शिक्षा मंत्री के रूप में मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता देश के युवाओं का भविष्य और उनका विश्वास है। यदि परीक्षा प्रणाली में उत्पन्न तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ियों के कारण हमारे होनहार छात्रों को कष्ट सहना पड़ा है, तो मैं इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं। जंतर-मंतर पर घटी घटनाएं दुखद थीं और निष्पक्ष जांच के हित में तथा विभाग की जवाबदेही तय करने के लिए मैं अपने पद से त्यागपत्र दे रहा हूं।
राजनीतिक घमासान और विपक्षी प्रतिक्रियाएं
विपक्ष का रुख: कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस्तीफे को छात्र शक्ति की जीत बताया है। हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि सिर्फ शिक्षा मंत्री का इस्तीफा काफी नहीं है। विपक्ष ने मांग की है कि: पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों और इसमें शामिल बाहरी तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
छात्र संगठनों का रुख: CJP और छात्र नेताओं का कहना है कि इस्तीफा उनके आंदोलन की पहली सफलता है, लेकिन जब तक NEET परीक्षा का निष्पक्ष समाधान नहीं निकलता और हिरासत में लिए गए या लापता छात्रों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आगे की राह और प्रशासनिक असर
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भारत की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में एक गहरे संस्थागत सुधार (Institutional Reform) की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित करता है।
नए शिक्षा मंत्री की चुनौती: नए शिक्षा मंत्री के समक्ष सबसे पहली और बड़ी चुनौती लाखों निराश छात्रों में भरोसा बहाल करना और NEET परीक्षा के भविष्य पर एक पारदर्शी निर्णय लेना होगी।
NTA का पुनर्गठन: सरकार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की संरचना और सुरक्षा प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा करनी होगी ताकि भविष्य में पेपर लीक और तकनीकी धांधली जैसी घटनाओं पर रोक लग सके।
न्यायिक जांच और पुलिस सुधार: 20 जुलाई की घटना पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में चल रही सुनवाइयों के बीच सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा यह स्पष्ट संदेश देता है कि जब युवाओं के भविष्य और देश की संवैधानिक मर्यादा का सवाल उठता है, तो सत्ता को जवाबदेह बनना ही पड़ता है। जंतर-मंतर से उठी छात्र आंदोलन की चिंगारी ने न केवल एक केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर किया, बल्कि देश की पूरी शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्था को अपने रवैये पर पुनर्विचार करने के लिए विवश कर दिया है।
नीट पेपर लीक समेत मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा- जो हमारे छात्र हैं, जो अनशन पर थे, उनसे मेरी मीटिंग हुई, चर्चा हुई, आंदोलन के बारें में, आरएसएस के बारे में, हिंदुस्तान का जो शिक्षा का सिस्टम है, उस पर कैसे कब्जा किया गया है। मुख्य बात जो हम कहना चाहते हैं कि छात्रों की तीन मांगें हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। ये मैं नहीं कह रहा, देश के छात्र कह रहे हैं।





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