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तेलंगाना: 10 गांवों के आदिवासियों ने पेश की मिसाल

दहेज प्रथा और खचीर्ली शादियों पर लगाई पूर्ण रोक
News

2026-03-21 16:51:08

नई दिल्ली। तेलंगाना के आदिलाबाद जिले से समाज को आईना दिखाने वाली एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। यहां के लगभग 10 गांवों के आदिवासियों ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपनी मर्जी से दहेज प्रथा और भव्य शादियों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। कोलाम समुदाय के लोगों ने हाल ही में एक बैठक के दौरान यह अहम प्रस्ताव पारित किया। उनका यह कदम दुल्हन के परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने और पूरे समाज के लिए एक बेहतरीन मिसाल कायम करने वाला है।

दहेज और खचीर्ली शादियों का बहिष्कार करने की यह शपथ कोलाम जनजाति के लोगों ने शुक्रवार को न्यू टेमरीगुडा में आयोजित एक विवाह समारोह के दौरान ली। इस फैसले में साठनाला मंडल के न्यू टेमरीगुडा, सहजदुब्बागुडा और जुन्नापानी गांव शामिल हैं। इसके अलावा आदिलाबाद ग्रामीण मंडल के हट्टीघाट और टिप्पा, बेला मंडल के पोहर, मसाला (के), मारुतिगुडा और दुब्बागुडा (एम) तथा गादीगुडा मंडल के अजुर्नी गांव के निवासी भी इस पहल का हिस्सा बने। समुदाय के प्रमुख नेताओं की देखरेख में इन सभी ग्रामीणों ने यह कसम खाई कि वे भविष्य में न तो दहेज का लेन-देन करेंगे और न ही शादियों में अनावश्यक दिखावा करेंगे। कोलाम संघम एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कोडापा सोन राव और जिला अध्यक्ष गोविंद राव ने लोगों को यह शपथ दिलाई। इन नेताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि दहेज और शादियों में होने वाले भारी-भरकम खर्च के कारण आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवार लगातार कर्ज के दलदल में फंस रहे थे।

उन्होंने जानकारी दी कि इस फैसले का असर भी जमीनी स्तर पर दिखने लगा है और पिछले पंद्रह दिनों के भीतर बिना दहेज व बिना किसी तामझाम के कम से कम पांच शादियां संपन्न हो चुकी हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि जल्द ही यह सकारात्मक बदलाव आसपास के अन्य गांवों तक भी पहुंचेगा। इस बैठक में पारित किए गए प्रस्तावों में कई अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार भी शामिल हैं। आदिवासियों को स्पष्ट रूप से सलाह दी गई है कि वे शादी के पंडालों या विवाह स्थलों के निर्माण पर बड़ी रकम बर्बाद न करें। विवाह संपन्न कराने वाले पुजारियों और समाज के बुजुर्गों के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं, जिसके तहत वे शादी की रस्मों के दौरान शराब या गांजे का सेवन बिल्कुल नहीं करेंगे। इसके साथ ही शादियों में बजने वाले लाउड म्यूजिक सिस्टम पर भी रोक लगा दी गई है और लोगों से अपील की गई है कि वे समारोहों के दौरान सिर्फ अपने पारंपरिक वाद्ययंत्रों का ही इस्तेमाल करें। समुदाय के नेताओं ने इस बात पर गौर किया कि दहेज की यह कुप्रथा धीरे-धीरे आदिवासी समाज में भी अपनी जड़ें जमा चुकी थी, जिससे लड़कियों के माता-पिता पर भारी आर्थिक दबाव आ गया था। भव्य दावत, महंगी सजावट और तेज संगीत के चलन के कारण गरीब परिवारों को अपनी बेटियों की शादी के लिए मजबूरन कर्ज लेना पड़ रहा था।

वहीं, आदिवासी विवाह परंपराओं के जानकारों और बुजुर्गों के अनुसार, मूल रूप से आदिवासी समाज में दूल्हे को दहेज देने की कोई रस्म कभी थी ही नहीं। वे हमेशा से बिना दहेज के बेहद सादे तरीके से शादियां करने के लिए जाने जाते रहे हैं, जिसमें उपहार के तौर पर नकदी के बजाय सिर्फ मवेशी या कृषि भूमि देने का ही पुराना रिवाज हुआ करता था। बहुजन समाज के सभी जातीय घटकों को इसका पालन अवश्य करना चाहिए।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05