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चंदा चोरों को हटाओ, देश बचाओ

पप्पू यादव बने पुजारी, राहुल ने दान पात्र में डाले पैसे
News

2026-08-01 18:43:13

संवाददाता

नई दिल्ली। मोदी-संघी सरकार जबसे बनी है तभी से देश में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा का गिरता स्तर, स्वास्थ्य के क्षेत्र में बढ़ती अनियमितताएं, बढ़ती भुखमरी और विभिन्न क्षेत्र में उथल-पुथल मची हुई है। हर दिन समाचार पत्रों के माध्यम से जनता को खबरें मिल रही है कि मोदी शासन में भ्रष्टाचार और जनता से इकट्ठा किये गए मंदिर निर्माण के लिए चंदा चोरी धड़ल्ले के साथ चली, जिसका कोई पुख्ता हिसाब-किताब नहीं है। राम मंदिर के निर्माण के बहाने देश की जनता से जो धन सम्पदा इकट्ठी की गई वह भी मोदी और मोहन भागवत के विश्वास पात्र व्यक्तियों ने चंपत कर दी है। मोदी के विश्वास पात्र चंपत राय बंसल व अन्य साथियों ने मिलकर देशभर से इकट्ठा हुए अकूत धन को किस तरह से चंपत किया, उसका कोई सही रास्ता और साक्ष्य पता नहीं है। मोदी सरकार ने लीपा-पोती के इरादे से जांच कमेटियाँ तो बनाई है परंतु बनाई गई जांच कमेटियों से कुछ भी सत्य बाहर नहीं आने दिया जा रहा है। शायद इसका कारण यह भी हो सकता है कि मोदी और भागवत ने राम मंदिर ट्रस्ट के बहाने जिन व्यक्तियों को उस ट्रस्ट में शामिल किया वे सभी संघी मानसिकता और मोदी व भागवत के विश्वासपात्र व्यक्ति थे। उन सभी में संघ के प्रति श्रद्धा और पूर्ण विश्वास था। ऊपरी तौर पर आम जनता को देखने से लगता है कि मोदी और भागवत अप्रत्यक्ष रूप से इस मंदिर के धन की चोरी में शामिल थे।

बड़ी चालाकी से मोदी और संघी भागवत ने मिलकर राम मंदिर ट्रस्ट का निर्माण किया। शायद उनके मन में तब यह रहा होगा कि कानूनी रूप से अगर मंदिर निर्माण में कोई भ्रष्टाचार होता है तो उसके लिए मोदी और भागवत की तरफ उंगली नहीं उठ पाएगी, चूंकि कानूनी रूप में किसी भी गड़बड़ी के लिए ट्रस्ट ही जिम्मेदार होगा। इस प्रकार का खेला गया यह खेल बहुत ही शातिर और चालाकी भरे दिमाग की उपज है। इस प्रकार के कृत्यों को मूर्त रूप देने में मोदी, शाह और भागवत से उत्तम व्यक्ति विश्वभर में कोई हो ही नहीं सकता!

राम मंदिर चोरी का पदार्फाश: राम मंदिर की चोरी का अब पदार्फाश हो चुका है, मोदी इस षड्यंत्रकारी खेल को देखकर मौन साधे हुए हैं, वे शायद यह सोच रहे हैं कि कुछ दिनों तक मौन रहने से ही राम मंदिर की चोरी का मुद्दा स्वत: ही शांत हो जाएगा। जैसे देश के अन्य गंभीर मामलों पर भी मौन रहने से वे स्वत: ही शांत हो गए और उन पर लोगों की प्रतिक्रिया भी आनी बंद हो गई। मोदी व उनके संघी साथियों द्वारा किया गया यह घोटाला देश का अकेला घोटाला नहीं है, मोदी शासन में अनेकों अन्य घोटाले भी घटित हुए हैं। जिनपर मोदी सरकार ने आजतक न देश की जनता को अपनी सफाई दी और न पब्लिक के सामने उनकी सत्यता सामने आने दी।

ऐसा ही दूसरा गंभीर घोटाला पीएम केयर फंड का है, जिसके तहत कई लाख करोड़ रुपए का धन एकत्रित हुआ और कोविड महामारी के नाम पर नामात्र के लिए कुछ धन खर्च दिखाया गया। देश की जनता, देश पर आए संकट के लिए अपनी सभी जरूरतों को काटकर भरपूर चंदा देती है। सवाल यहाँ पर ये भी है कि देश में पहले से ही पीएम रिलीफ फंड के तहत जनता से चंदा देने का प्रावधान था तो मोदी संघी शासन ने इस तरह का अनुदान लेने का दरवाजा अलग से क्यों खोला? मोदी और संघियों का ऐसा छिपा हुआ कृत्य उनकी नियत और मंशा पर सवाल खड़े करता है?

इलेक्ट्राल बांड के बहाने मोदी सरकार ने व्यापारियों से लिया चंदा: इलेक्ट्राल बॉन्ड के बहाने मोदी-भाजपा को 6986 करोड़ रुपए का चंदा मिला था। इस चंदे की विशेषता यह थी कि जिन कंपनियों का लेन-देन बहुत ही कम था उन्होंने भी भाजपा मोदी सरकार को सैकड़ों करोड़ के चंदे दिये। यहाँ पर तार्किक सवाल यह भी पैदा होता है जिस कंपनी का टर्न ओवर चंदे देने की रकम से भी कम था तो उस कंपनी ने इतनी भारी रकम का चंदा कहाँ से और कैसे दिया? देश की जनता के द्वारा तार्किक सवाल पूछने पर मोदी-संघी सरकार ने जनता को कोई जवाब नहीं दिया सवालों के ऊपर लीपा-पोती करके जनता को मूर्ख बनाने की भरपूर कोशिश की गई।

कंपनियों द्वारा दिये गए चुनावी चंदे के बदले सरकार ने उन्हें नकली दवाई बाजार में बेचने की खुली छूट दी। देश की जनता ने इन नकली दवाइयों का इस्तेमाल करने के बाद पाया था कि दवाइयाँ खाने से मरीज को कोई आराम नहीं हो रहा है। ऐसी हजारों शिकायतों के बाद देश की जनता को पता चला की बाजार में नकली दवाइयाँ बिक रही है, इसलिए मरीजों को नकली दवाईयां लेने से कोई फायदा नहीं हो पा रहा है। मोदी ने अपनी षड्यंत्रकारी योजना के तहत इस घोटाले को दबाने के लिए ‘आयुष्मान कार्ड’ की सेवा शुरू की। जिसके तहत मरीजों को मोदी के आयुष्मान केन्द्रों से इलाज कराना अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद भी कुछ मजीजों की शिकायत रही कि आयुष्मान केन्द्रों से जो दवाइयाँ मिल रही है उनसे मरीज को कोई आराम नहीं मिल रहा है। तब जाकर मोदी के आयुष्मान केन्द्रों से पब्लिक का भरोसा उठने लगा और वे खुले तौर पर यह कहने लगे कि मोदी के आयुष्मान केन्द्रों से दवाइयाँ मत खरीदों चूंकि इनसे खरीदी गई दवाइयों से मरीज ठीक नहीं होता।

जनता का सवाल ‘मोदी हटाओ देश /बचाओ’: मोदी शासन में उपरोक्त मामलों के अलावा ऐसी हजारों बातें हैं जिनसे जनता त्रस्त है और अब वह कहने लगी है कि अगर जनता को देश बचाना है तो उसे एक मत से इकट्ठा होकर सामने आना होगा। मोदी को देश की शासन सत्ता से हटाने की मांग करनी होगी, जिसके लिए देश की जनता को एक बड़े आंदोलन की जरूरत पड़ेगी। संघी मानसिकता के प्रशासन तंत्र में बैठे कर्मचारी/अधिकारियों के द्वारा की गई प्रताड़नाओं और शोषण को भी झेलना पड़ेगा। याद रहे कि संघ भाजपा के पास एक ऐसा तंत्र है जिसके माध्यम से वह देश की जनता में भ्रामकता का प्रचार करता है, अंधभक्त पैदा करता है, पाखंड फैलाता है, हिन्दू-मुसलमान, गाय-गोबर के नाम पर देश की जनता का बंटवारा करता है और इसी आधार पर उसी जनता का वोट लेकर सत्ता में स्थापित होता है। देश की भोली-भाली जनता को इन सभी छलावामयी बातों का संज्ञान लेना होगा और मोदी संघी शासन सत्ता को देश से बेदखल करना होगा।

पप्पू यादव बने पुजारी, राहुल ने दान पात्र में डाले पैसे

नई दिल्ली। संसद परिसर में बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का अनोखा रूप देखने को मिला। वह पुजारी के वेश में जमीन पर बैठे नजर आ रहे थे। उनके बगल में दान पात्र रखा हुआ था और राहुल गांधी उसमें पैसे डालते नजर आ रहे थे। वहीं, उनके पीछे मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी समेत अन्य विपक्षी सांसद दिख रहे थे और उनके हाथ में अमित शाह संसद से गायब क्यों वाला पोस्टर दिख रहा था। विपक्षी सांसदों ने संसद में विरोध के दौरान एक शॉर्ट प्ले किया। इसमें सांसद पप्पू यादव पुजारी बनकर आए। राहुल गांधी ने भी चंदा दानपात्र में डाला और पुजारी अयोध्या सांसद के पैर छूते दिखाई दिए। फिर पुजारी बने पप्पू यादव दानपात्र लेकर भाग गए। दरअसल, इस वीडियो में अयोध्या के राम जन्मभूमि से कथित चढ़ावा चोरी को दिखाया गया है। पप्पू यादव पिछले दिन भी संसद भवन के बाहर घायल और लाठीचार्ज के शिकार व्यक्ति का भेष धारण करके एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में यह प्रदर्शन किया था। इससे पहले भी मई 2026 में वे पूर्णिया के जलालगढ़ स्थित एक निजी स्कूल में एक शिक्षक की तरह कक्षा में पहुंच गए थे और बच्चों को नैतिकता व जीवन के उद्देश्य का पाठ पढ़ाया था। उन्हें देखकर वहां के शिक्षक और बच्चे भी हैरान रह गए थे। पप्पू यादव ने अब तक 6 बार लोकसभा चुनाव जीता है। उन्होंने 1991, 1996, 1999, 2004, 2014 और 2024 के आम चुनावों में पूर्णिया समेत बिहार के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की है। वे निर्दलीय के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), लोक जनता पार्टी और राजद के टिकट पर भी सांसद रह चुके हैं। बता दें कि वे अक्सर बाढ़ के समय लोगों के बीच खुलेआम पैसे बांटते नजर आते हैं। इसके अलावा वह दावा भी करते हैं कि वह अब करोड़ रुपये से अधिक जनता के बीच में बांट चुके हैं। इसके चलते अक्टूबर 2025 में आयकर विभाग ने नोटिस भी जारी किया था।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05