




2025-11-29 17:15:37
नई दिल्ली। भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बी. आर. गवई ने महाराष्ट्र के अमरावती में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि मैं एससी के लिए आरक्षित कोटे में क्रीमीलेयर को शामिल न करने के पक्ष में हूँ। क्रीमीलेयर की जो अब धारणा अन्य पिछड़ा वर्ग पर लागू होती है वह एससी पर भी लागू होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘आरक्षण के मामले में एक एससी आईएएस अधिकारी के बच्चों की तुलना एक गरीब खेतिहर मजदूर के बच्चों से नहीं की जा सकती है’। गवई साहब का तर्क और सोच एकदम मानवतावादी है अमीर और गरीब के बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा-दीक्षा में बहुत अंतर होता है इसलिए उनकी तुलना नहीं की जा सकती है लेकिन भारतीय परिवेश में यह बदल जाती है।
देश को आजाद हुए 78 वर्ष हो चुके है। संविधान को लागू हुए 75 वर्ष हो चुके हैं। संविधान के द्वारा एससी समाज के लिए सभी सरकारी संस्थानों तथा विभागों में आरक्षण की व्यवस्था की गई है, परंतु आज तक भी केंद्र तथा राज्य सरकारों के किसी भी विभाग में आरक्षण पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है। केंद्र तथा राज्य सरकारों के सभी स्तर के अधिकारियों तथा कर्मचारियों क्लास-1, क्लास-2 तथा क्लास-3 में यहाँ तक सफाई कर्मचारियों को छोड़कर क्लास-4 में आरक्षण पूरा नहीं है।
आरक्षण पुरा न करने का कारण बता दिया जाता है कि उंल्ल्िरंि३ी ं१ी ल्लङ्म३ र४्र३ुं’ी (योग्य उम्मीदवार नहीं है) आईएएस और अमीर एससी लोगों के बच्चों के होते हुए आरक्षण पूरा नहीं हो रहा तो क्रीमीलेयर लागू कर देने पर तो शायद एक या डेड प्रतिशत लोगों का चयन भी मुश्किल से हो पाएगा और बाकी अयोग्य होने का तगमा लगाकर आरक्षित सीटों को खाली छोड़ उन्हें जनरल लोगों से भर दिया जाया करेगा। अत: यह होना चाहिए कि एससी बच्चों को विशेष कोचिंग देकर योग्य बनाया जाये तथा हर हालत में एससी के लिए आरक्षित पदों पर एससी लोगों के चयन को निश्चित अवधि में पूर्ण रूप से पूरा किया जाना चाहिए।





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