




2026-01-31 14:15:52
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की हालिया रिपोर्ट और संसदीय समिति तथा सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत डेटा के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति छात्रों के खिलाफ जाति आधारित भेदभाव, अत्याचार और असमानता की शिकायतें तक 118.4 प्रतिशत बढ़ गई है। यूजीसी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की हालिया रिपोर्ट और संसदीय समिति तथा सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत डेटा के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों के खिलाफ जाति आधारित भेदभाव, अत्याचार और असमानता की शिकायतें 2019-20 से 2023-24 तक 118.4 प्रतिशत बढ़ गई हैं, जहां 2019-20 में 173 मामले दर्ज हुए थे जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गए। कुल मिलाकर 1,160 शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें से 1,052 का निपटारा किया गया जो 90.68 प्रतिशत निपटान दर दशार्ता है लेकिन लंबित मामलों की संख्या 18 से बढ़कर 108 हो गई है जो चिंताजनक है क्योंकि यह दर्शाता है कि आरक्षण नीतियों और कानूनी सुरक्षा के बावजूद सामाजिक पूर्वाग्रह, शिक्षकों एवं प्रशासन की उदासीनता तथा अपर्याप्त जागरूकता के कारण एससी/एसटी छात्रों को प्रवेश, मूल्यांकन, छात्रावास आवंटन और सामाजिक बहिष्कार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है और ड्रॉपआउट दर बढ़ती है, साथ ही कभी-कभी आत्महत्या जैसे दुखद घटनाएं भी सामने आती हैं।
यूजीसी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए 2026 में नए नियम अधिसूचित किए हैं जो उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी को बढ़ावा देने के लिए भेदभाव की परिभाषा को विस्तृत करते हैं जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों को शामिल किया गया है, संस्थानों को इक्विटी कमेटी गठित करने, हेल्पलाइन स्थापित करने, शिकायत निवारण तंत्र मजबूत करने और उल्लंघन पर मान्यता रद्द करने तक के दंड का प्रावधान है, साथ ही जागरूकता कार्यक्रम और संवेदीकरण कार्यशालाओं को अनिवार्य बनाया गया है।
इस समस्या के समाधान के लिए सरकार, संस्थानों और समाज को मिलकर काम करने की जरूरत है जैसे कि नियमित आॅडिट, छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना और कानूनी सहायता प्रदान करना ताकि शिक्षा में समानता वास्तविकता बन सके और एससी/एसटी छात्रों का सशक्तिकरण हो सके।
2026 में नए नियम अधिसूचित किए हैं जो उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी को बढ़ावा देने के लिए भेदभाव की परिभाषा को विस्तृत करते हैं जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों को शामिल किया गया है, संस्थानों को इक्विटी कमेटी गठित करने, हेल्पलाइन स्थापित करने, शिकायत निवारण तंत्र मजबूत करने और उल्लंघन पर मान्यता रद्द करने तक के दंड का प्रावधान है, साथ ही जागरूकता कार्यक्रम और संवेदीकरण कार्यशालाओं को अनिवार्य बनाया गया है, इस समस्या के समाधान के लिए सरकार, संस्थानों और समाज को मिलकर काम करने की जरूरत है जैसे कि नियमित आॅडिट, छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना और कानूनी सहायता प्रदान करना ताकि शिक्षा में समानता वास्तविकता बन सके और एससी/एसटी छात्रों का सशक्तिकरण हो सके।





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