




2026-06-01 15:50:08
गारलैंड, टेक्सास। आस्था और स्वतंत्रता के एक ऐतिहासिक संगम में अंबेडकराइट बौद्ध एसोसिएशन आॅफ टेक्सास (एबीएटी) ने गारलैंड, टेक्सास में महाबोधि अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध केंद्र के भव्य उद्घाटन की घोषणा की है। यह आयोजन शनिवार, 4 जुलाई को होगा, जो न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रतिष्ठित महाबोधि सोसाइटी (बेंगलुरु) की पहली शाखा के रूप में एक मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के साथ भी मेल खाता है। यह संयोग स्वतंत्रता, समानता और करुणा की साझी यात्रा का प्रतीक है।
यह नया केंद्र केवल पूजा स्थल से कहीं अधिक है; इसे ध्यान, सचेतनता और सामाजिक सद्भाव के लिए एक अभयारण्य के रूप में स्थापित किया जा रहा है, जो भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और डॉ. बी. आर. अंबेडकर के सामाजिक न्याय के आदर्शों में गहराई से निहित है। एबीएटी के आयोजकों ने इस कार्यक्रम को उत्तरी अमेरिकी बौद्ध धर्म के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है, जिसमें वास्तव में एक अंतरराष्ट्रीय समागम होगा। भारत, श्रीलंका, नेपाल, बर्मा, थाईलैंड, वियतनाम और अमेरिका के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न परंपराओं और जातीय पृष्ठभूमियों से आने वाले बीस से अधिक बौद्ध भिक्षुओं के साथ-साथ अंबेडकराइट समुदाय और स्थानीय अमेरिकी श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाते हुए दो प्रतिष्ठित बौद्ध नेता, भंते कस्सप और भंते आनंद, बेंगलुरु से यात्रा करके इस अवसर पर आशीर्वाद देंगे और धम्म शिक्षाओं का मार्गदर्शन करेंगे। सुबह का सत्र, गारलैंड के 5525 मायर्स ड्राइव में आयोजित किया जाएगा, जिसमें बुद्ध प्रतिमा का उद्घाटन समारोह, पारंपरिक बुद्ध पूजा, सामूहिक मंत्रोच्चार, धम्म वार्ता और संघ को दान का अर्पण शामिल होगा। आध्यात्मिक अनुष्ठानों के बाद, समारोह 5210 लोकस्ट ग्रोव में चलेगा, जहां दोपहर के कार्यक्रम में सामुदायिक भोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और प्रेरक भाषण होंगे। गारलैंड शहर के प्रतिनिधियों सहित स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों के भी शामिल होने की संभावना है।
एबीएटी के नेताओं ने जोर देकर कहा कि महाबोधि अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध केंद्र की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका में बौद्ध शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक स्थायी आध्यात्मिक घर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। आयोजकों ने कहा, यह केंद्र न केवल पूजा स्थल है, बल्कि करुणा, ज्ञान, सामाजिक न्याय और वैश्विक सद्भाव का प्रतीक भी है। उन्होंने सभी पृष्ठभूमियों के लोगों को इस हर्षोल्लास भरे समारोह में शामिल होने के लिए हार्दिक आमंत्रण दिया। यह आयोजन सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगा, और समुदाय के सदस्य एबीएटी की वेबसाइट www.abatusa.org पर पंजीकरण करा सकते हैं या अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
(एबीएटी एक 501(सी)(3) गैर-लाभकारी संगठन है जो डॉ. बी. आर. अंबेडकर और भगवान बुद्ध के धम्म के आदर्शों से प्रेरित होकर बौद्ध शिक्षाओं, सामाजिक समानता, करुणा, सचेतनता और सामुदायिक सेवा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।)
भारत में बुद्ध और अम्बेडकर के अनुयायी कहां खड़े हैं?
भारत में बाबा साहेब और भगवान बुद्ध के लाखों की संख्या में संगठन हैं। जिनके संचालनकर्ता अधिकातश: मठाधीश बने हुए हैं और उनमें शामिल कुछेक चालाक किस्म के स्वार्थी राजनैतिक आकांक्षा पाले हुए लोग अपने आपको इन संगठनों के माध्यम से राजनीति में स्थापित करने की सोच रखते हैं। पुराने संसद भवन के प्रांगण में लगी बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा को 3-4 जून 2024 की रात को मोदी-संघी मानसिकता के लोगों ने विस्थापित कर दिया। जिसे लेकर बाबा साहेब की वैचारिकी में विश्वास रखने वाले लाखों की संख्या में लोगों ने वहां पर विरोध-प्रदर्शन किया लेकिन दलाल और बिकाऊ किस्म के राजनैतिक आकांक्षा पाले हुए लोगों ने संघी सत्ता से मिलकर उसे विफल करा दिया। ऐसे हैं भारत में अम्बेडकर के अनुयायी।





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