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अनुसूचित जातियों का ये कैसा कल्याण

30 फीसदी बजट किया कम और खर्च का 2345 करोड़ रुपया किया सरेंडर
News

2026-03-21 16:40:27

एससी यानी अनुसूचित जातियों के कल्याण वाले काम में भयंकर लापरवाही बरती जा रही है या फिर जानबूझकर ऐसी योजनाओं पर खर्च ही नहीं किया जा रहा है? संसद की एक स्थायी समिति ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समिति ने कहा है कि मंत्रालय ने अनुसूचित जातियों के कल्याण की योजनाओं के लिए मिले पैसे का एक बड़ा हिस्सा वापस लौटा दिया है। यह बात बहुत चिंताजनक है क्योंकि ये पैसे समाज के सबसे गरीब और कमजोर वर्गों के लिए हैं। इतना ही नहीं, बजट जारी होने से पहले संशोधित अनुमान ही करीब 30 फीसदी तक कम कर दिया गया था। तो सवाल है कि आखिर यह क्यों हो रहा है? संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में एससी विभाग के लिए कुल 10309 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। लेकिन मंत्रालय ने इनमें से 2345 करोड़ रुपये यानी करीब 23% मतलब एक चौथाई राशि सरेंडर कर दी। इसका साफ मतलब यह है कि यह पैसा योजनाओं पर खर्च नहीं किया गया और इसे वापस लौटा दिया गया। समिति ने इसे समझ से परे बताया है। समिति ने कहा, हम समझ नहीं पा रहे कि गरीबों में सबसे गरीब वर्ग यानी अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और विनिर्दिष्ट जनजातियों यानी डिनोटिफाइड ट्राइब्स (डीएनटी) के लिए बनी योजनाओं के लिए इतनी बड़ी राशि क्यों वापस लौटानी पड़ी।

बजट का संशोधित अनुमान 30% कम किया

यह 31 सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति सामाजिक न्याय और अधिकारिता पर है। इसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद पी.सी. मोहन कर रहे हैं। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार समिति ने मंत्रालय की वित्तीय प्रबंधन पर सख्त टिप्पणी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कई सालों से मंत्रालय को मिले बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट अनुमान यानी बजट एस्टिमेट में राशि बढ़ाई जाती है, लेकिन संशोधित अनुमान यानी रिवाइज्ड एस्टिमेट में इसे करीब 30% तक कम कर दिया जाता है। फिर भी बाकी बचे पैसे का पूरा इस्तेमाल नहीं होता। दो छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी चिंता जताइ। समिति ने खासकर दो अहम छात्रवृत्ति योजनाओं पर चिंता जताई है। ये हैं- एससी छात्रों के लिए टॉप क्लास एजुकेशन और ओबीसी, ईबीसी तथा डीएनटी के लिए टॉप क्लास स्कूल एंड कॉलेज। इन योजनाओं में भी 20-25% बजट वापस लौटाया गया। ये योजनाएँ 12वीं के बाद मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए मदद करती हैं।

योजना ठीक नहीं बनी या लागू सही से नहीं हुई?

समिति ने कहा कि इतनी राशि वापस लौटने का मतलब है कि या तो सही से योजना नहीं बनाई गई या फिर लागू करने वाली एजेंसियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं। समिति ने मंत्रालय के उस बहाने को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकारों से कम प्रस्ताव आए। समिति ने इस तर्क को बिल्कुल नहीं मानने योग्य बताया। समिति ने साफ कहा कि पैसे वापस लौटने का कोई और कारण नहीं हो सकता सिवाय गलत आकलन या खराब क्रियान्वयन के। समिति ने मंत्रालय से कहा है कि वह अपनी योजनाओं की बेहतर योजना बनाए, क्रियान्वयन को मजबूत करे और पैसे का समय पर सही इस्तेमाल सुनिश्चित करे। क्योंकि ये योजनाएँ समाज के उन लोगों के लिए हैं जो सबसे ज्यादा जरूरतमंद हैं। अगर पैसे वापस लौटते हैं तो इन वर्गों का उत्थान प्रभावित होता है। यह मामला देश में सामाजिक न्याय की योजनाओं की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सरकार को अब इन कमियों को जल्दी दूर करना चाहिए ताकि असली लाभार्थी समय पर मदद पा सकें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो विपक्ष को यह आरोप लगाने का एक और मौका मिलेगा कि सरकार दलितों और पिछड़ों की जानबूझकर उपेक्षा कर रही है।

देश का दलित उपेक्षित समाज अच्छे से जानता है कि मनुवादी संघी सरकारों में ऐसा होना उनकी मूल मानसिकता के अनुरूप है। भाजपा चुन-चुनकर ऐसे अयोग्य सांसदों को मंत्री बनाती है जो अक्षम हो, सिर्फ वे संघीयों की जी हजूरी करते हों, उनमें अपना कोई दम ना हो। मोदी ने अपने 12 वर्षों में यही किया है। सोचना समाज को होगा वे अक्षम व्यक्तियों को चुनाव में वोट न दें।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05