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‘बहुजन स्वाभिमान संघ’ के कार्यालय में मनायी गई मान्यवर साहेब कांसीराम जी की जयंती

संवाददाता
News

2026-03-28 18:15:44

नई दिल्ली। रविवार 15 मार्च 2026 को बहुजन स्वाभिमान संघ के कार्यालय में मान्यवर साहेब कांसीराम जी की जयंती मनायी गयी। इस कार्यक्रम में संस्था से जुड़े सदस्यों ने भारी संख्या में भाग लिया और मान्यवर साहेब को याद करते हुए, उनके द्वारा समाज हित में किये गए कामों पर विस्तार से चर्चा-परिचर्चा की। इस आयोजन में मुख्यत: वे सभी प्रबुद्धजन थे जिन्होंने मान्यवर साहेब के साथ कदम से कदम मिलाकर उनके कारवां को आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात एक कर दिया था। इस कार्यक्रम में सभी सदस्यों ने अपनी-अपनी बात रखते हुए मान्यवर साहेब के बारे में चर्चा की। संस्था के अध्यक्ष प्रकाश चंद ने बताया कि मान्यवर साहेब को 1989 में दिल्ली में सिक्कों से भी तोला गया था, उस समय उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार, मौजपुर, घोण्डा, गोकलपुरी, जौहरीपुर, तुकमीरपुर भजनपुरा व उसके साथ जुड़े हुए अन्य क्षेत्रों में बहुजन समाज के कार्यक्रमों का वर्चस्व था। मान्यवर साहेब के कार्यक्रमों में हजारों की भीड़ जुट रही थी और भीड़ में आने वाले लोग मान्यवर साहेब के इस कदर दीवाने थे कि वे उनके विचारों के अनुसार और उनके कारवां को आगे बढ़ाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते थे।

साहेब का सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष: मान्यवर साहेब ने अपना सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन का संघर्ष 1965 के दशक से शुरू किया, उन्होंने अपने सामाजिक संघर्ष के दौरान तीन सामाजिक व राजनैतिक संस्थाओं का निर्माण किया। बामसेफ, डीएस-4, और बहुजन समाज पार्टी। बामसेफ (1978), डीएस-4 (1981) और बहुजन समाज पार्टी (1984) में इन संस्थाओं के निर्माण से पहले मान्यवर साहेब पुणे की डीआरडीओ लैब में कार्यरत थे। उसी लैब के दीनाभाना जो चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे, उन्होंने मान्यवर साहेब को बताया है कि हमारी लैब ने इस वर्ष बाबा साहेब अम्बेडकर जी की जयंती पर अवकाश घोषित नहीं किया है जिसे लेकर लैब से जुड़े बहुजन ममज के कर्मचारियों में रोष था। मान्यवर साहेब ने बाबा साहेब की जयंती पर छुट्टी न होने के विरोध स्वरूप डीआरडीओ की लैब से त्यागपत्र दे दिया और बाबा साहेब से जुड़े कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सबसे पहले आरपीआई से जुड़े लोगों से संपर्क किया और कुछ दिनों तक आरपीआई को मजबूत रूप देने के लिए कार्य किया। लेकिन उन्होने वहाँ पर देखा कि महाराष्ट्र के अलंबरदार लोग जो दिन में तो बाबा साहेब के मिशन, संघर्ष और आरपीआई की बात करते थे वही अधिकांशतर लोग रात को कांग्रेसियों से मिलकर विधान सभा या राज्य सभा की टिकट मांगने की जुगत में लगे रहते हैं। जिसकी वजह से बाबा साहेब द्वारा बनाई गई आरपीआई का कारवां आगे नहीं बढ़ पा रहा था। उन्होंने वहाँ ऐसा देखकर आरपीआई को छोड़ दिया और फिर 1978 में एक स्वतंत्र संस्था बामसेफ की स्थापना की। जिसका उद्देश्य बहुजन समाज के नौकरी पेशा व अन्य जागरूक लोगों को जोड़ना था ताकि वे बहुजन समाज के संघर्ष को आवश्यक धन राशि मुहैया करा सकें। बामसेफ का मुख्य उद्देश्य समाज को जोड़ना और संघर्ष के लिए आवश्यक धन राशि एकत्रित करना था।

1981 में किया डीएस-4 का निर्माण: डीएस-4 का मुख्य उद्देश्य था कि हाशिये पर पड़े बहुजन समाज के जातीय घटकों के लोगों को राजनैतिक रूप से जागरूक करना और उनमें से जिन लोगों को चुनाव लड़ने की लालसा थी उन्हें पहचानकर उन्हें चुनाव लड़ने का प्रशिक्षण देना था। डीएस-4 के माध्यम से मान्यवर साहेब ने देश के कई प्रदेशों में दिल्ली समेत बहुत सारे लोगों को चुनाव लड़ाया और उन्हें राजनीतिक रूप से प्रशिक्षित किया।

बहुजन समाज पार्टी: इस पार्टी की स्थापना मान्यवर साहेब ने 14 अप्रैल 1984 को की जिसके बैनर तले बहुजन समाज के अनेक राजनीतिक इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और वे प्रदेशों से विधायक और लोक सभा से सांसद भी बने। मान्यवर साहेब के अथक परिश्रम और संगठनात्मक काबलियत के बल पर बहुजन समाज पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी बनी जिसके तहत बहन कु. मायावती उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री बनी। बहन कु. मायावती जी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सम्राट अशोक के शासन काल की शासन व्यवस्था को प्रदेश की जमीन पर उतारा और प्रदेश का सकारात्मक दृष्टिकोण से शासन-प्रशासन चलाया। उनकी प्रशासनिक क्षमता का प्रदेश की जनता आज भी गुणगान करती है और सपना देखती है कि बहन जी के शासन को बहुजन समाज के हित में दोबारा स्थापित किया जाये।

मान्यवर साहेब की जयंती पर विस्तार से चर्चा के बाद मास्टर रामपाल सिंह जी ने सभी सदस्यों का धन्यवाद दिया और मान्यवर साहेब को कोटि-कोटि नमन करते हुए सभी देशवासियों की ओर से मान्यवर साहेब की जन्म जयंती की हार्दिक बधाई दी।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05