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दिल्ली सरकार में भ्रष्टाचार की बाढ़!

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2026-08-17 15:34:22

वर्तमान समय में दिल्ली में संघी मानसिकता की रेखा गुप्ता की सरकार है। जब से वे दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी है तभी से दिल्ली की जनता को संघी छलावे परोसे जा रहे हैं, मिला किसी को कुछ नहीं है। दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार के दौरान भ्रष्टाचार की सीमा चरम पर पहुँच चुकी है। भ्रष्टाचार का नवीनतम उदाहरण काँवड़ यात्रा के लिए शिविर लगाने का है। रेखा गुप्ता की सरकार ने दिल्ली की हर पंजीकृत संस्था को 15-15 लाख रुपए देने का फैसला किया, इसी के तहत काँवड़ यात्राओं के लिए पंजीकृत संस्थाएं रातों-रात खड़ी हो गई और उन्हें घोषणा के अनुसार 15-15 लाख रुपए वितरित किये गये। इस प्रकार की पाखंडी योजना के लिए जनता के धन का मनमानी के आधार पर कथित धार्मिक यात्राओं पर खर्च करना पहली नजर में संविधान के प्रावधान का खुला उल्लंघन है। चूंकि संविधान में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना की गई है। संविधान के अनुसार सरकार न किसी धर्म को बढ़ावा दे सकती है और न किसी की आलोचना कर सकती है, सभी को समान समझकर सरकार को आचरण करना है। धार्मिक मुद्दों पर तटस्थ रहकर काम करना है। लेकिन मोदी-योगी और रेखा गुप्ता की सरकार में ये सब प्रावधान नदारद है। संघी मानसिकता के कारण वे संविधान को अपनी धार्मिक मान्यताओं से कमत्तर मानते हैं। इसी के चलते वे सभी संविधान विरोधी कृत्यों को अंजाम देते हैं। काँवड़ यात्राओं के लिए जो धन आवंटित किया गया है उसका सरकार की निष्पक्ष संस्था द्वारा आॅडिट कराना चाहिए चूंकि इस बार प्राय देखा गया कि शिविर और शिविरों में टैंट ज्यादा लगे, और बड़े-बड़े लगे। प्रत्येक पंजीकृत संस्था को शिविर लगाने के लिए 15 लाख की अनुदान धन राशि सरकार द्वारा दी गई और 12 सौ यूनिट बिजली हर शिविर को फ्री दी गई। शिविरों में आसपास की कालोनियों से आने वाले शिव भक्तों ने भी वहाँ जाकर चढ़ावे के रूप में बड़ी मात्रा में धन दिया, उसका हिसाब किताब क्या है? किसी को नहीं पता, उसकी भी सरकार निष्पक्ष संस्था से जांच व आॅडिट कराये। इस बार शिविरों में भक्तों की संख्या कम पहुंची, जिसके कारण रेखा सरकार द्वारा दिया गया धार्मिक अनुदान कम मात्रा में ही खर्च हुआ होगा। जनता के आंकलन के अनुसार प्रत्येक शिविर पर पाँच लाख रुपए की राशि मुश्किल से खर्च हो पाई होगी, बाकी की धन राशि कहाँ और कैसे खर्च हुई इसकी भी जानकारी जनता को स्पष्ट रूप से बताई जाएँ।

जनता के आंकलन के अनुसार हर पंजीकृत शिविर को दिये गए 15 लाख रुपए में से मुश्किल से 5 लाख रुपए ही खर्च हो पाये हुए होंगे, चूंकि इसके साथ शिविरों में जनता द्वारा भारी मात्रा में चढ़ावा भी दिया गया, इसलिए प्रत्येक शिविर से बचे शेष 10 लाख का भी हिसाब जनता को स्पष्टता के साथ दिया जाये। चूंकि यह जनता का पैसा है, किसी राजनीतिक पार्टी के बाप का नहीं, इसलिए इसका हिसाब भी जनता को सही तरीके से दिया जाये। जैसा प्रचार माध्यमों से ज्ञात हुआ कि पंजीकृत काँवड़ शिविरों की संख्या 394 थी। अगर यह मान लिया जाये कि प्रत्येक शिविर में बा-मुश्किल 5 लाख रुपए खर्च हुए, और इसके अतिरिक्त जनता द्वारा दिया गया दान भी भारी मात्रा में आया, तो उसी के अनुसार प्रत्येक 394 शिविरों में 10 लाख रुपए का अनुमानित गबन है तो यह करीब 4 करोड़ रुपए की धन राशि बनती है, इसके अतिरिक्त दान के रूप में जनता से आया हुआ धन भी है, जो मोटे तौर पर 2-3 करोड़ हो सकता है, जो रेखा गुप्ता की सरकार की देख-रेख में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया होगा।

दिल्ली सरकार में चावल घोटाला: दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस द्वारा 22,000 करोड़ रुपये के कथित सब्सिडी वाले चावल घोटाले का आरोप है। सरकार ने गरीबों के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से खरीदे गए चावल को हरियाणा की किसी निजी कंपनियों को महंगे दामों पर बेचा गया। ये आरोप आम आदमी पार्टी व कांग्रेस के विधायकों ने विधान सभा में सरकार पर लगाए, जिसको लेकर दिल्ली की जनता शंकाग्रस्त है। इसलिए दिल्ली की जनता की शंका को दूर करने के लिए रेखा गुप्ता की सरकार को जनता को तथ्यों के साथ बताना चाहिए कि यह घोटाला हुआ है या नहीं! आमतौर पर संघी मानसिकता की सरकारें घोटाले और बेईमानी की हमेशा से समर्थक और सिरमोर रही है इसलिए जनता को स्पष्ट स्थिति से अवगत कराया जाये।

साइकिल घोटाला: दिल्ली की रेखा गुप्ता की सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की कक्षा 9 की छात्राओं को 1.30 लाख मुफ्त साइकिल की खरीद में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधान सभा में खड़े होकर आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने इन साइकिलों की खरीद में भारी भ्रष्टाचार किया है जो आम जनता को देखने में वास्तविक लगता है। चूंकि दिल्ली में साइकिल की कीमत 4 हजार से 42 सौ रुपए में प्राय मिलती है। थोक में खरीदने पर यह कीमत कम ही होनी चाहिए अधिक नहीं जबकि रेखा गुप्ता की सरकार ने प्रत्येक साइकिल 6957 रुपये की प्रति दर से खरीदी है। प्रति साइकिल करीब 3 हजार रुपए अधिक कीमत चुकाई है, जिसके कारण जनता को दूर से ही बड़े घोटाले की बू आ रही है। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर एक व्यापारी को ठेका दिया गया।

कोंडली के विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि आज हम उसी साइकिल से दिल्ली विधानसभा आये हैं, जिसे हमने बाजार से 4000 रुपए में खरीदा है, जबकि भाजपा सरकार ने उसी साइकिल को 6957 रुपए में खरीदा है। यह दिखाता है कि सरकार पूरी तरह से धोखेबाज और भ्रष्ट है। दिल्ली की जनता का सिर्फ एक सवाल है, जब वही साइकिल 4,200 रुपए में मिल रही थी, तो 1.30 लाख साइकिलों की खरीद के लिए 6,957 रुपए प्रति साइकिल क्यों चुकाए गए? यानी करीब 3,000 रुपए प्रति साइकिल का घपला हुआ। आखिर ये पैसा किसकी जेब में गया?

उधर, तिलक नगर विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि भाजपाइयों में भ्रष्टाचार का लालच इतना बढ़ चुका है कि वे अब बच्चियों की साइकिल तक में घोटाले कर रहे हैं। सरकार ने 1 लाख 30 हजार साइकिलें 3000 रुपए महंगी खरीदी हैं। भाजपा की यह सरकार जो दवा, अस्पताल के बेड, बेडशीट और यहां तक कि कफन में भी घोटाले करती है, उसने अब बच्चियों की साइकिलों में भी घोटाला किया है। आज सदन के अंदर भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार से जवाब मांगा जाएगा कि बच्चियों की साइकिलों में घोटाला क्यों किया गया? जितने पैसों का यह घोटाला किया गया है, उतने में 1 लाख साइकिलें और आ जातीं तथा 1 लाख अतिरिक्त बच्चियों को साइकिलें मिल सकती थीं, सरकार को इस पर शर्म आनी चाहिए!

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कहा कि हैरत की बात है कि टेंडर प्रक्रिया में हीरो साइकिल निर्माता कंपनी भी शामिल थी, लेकिन उसे टेंडर नहीं मिला और एक व्यापारी को टेंडर दे दिया गया। अगर कोई व्यापारी निर्माता कंपनी से सस्ती साइकिल दे रहा है, तो यह साफ है कि इसमें मिलीभगत जरूर हुई है। मंत्री आशीष सूद और उनके मंत्रालय ने मिलकर 90 करोड़ रुपए गटक लिए हैं। भाजपा लगातार दवा, साइकिल, चावल और चंदे की चोरी कर रही हैं। यह चोरों की सरकार है और अब दिल्ली और देश के सारे चोर भाजपा के दफ्तर में ही मिलते हैं।

नदी-नाले की सफाई व गड्ढों के घोटाले: आम जनता को देखने में आ रहा है कि पानी की निकासी के मामले में रेखा गुप्ता की सरकार पिछले कई महीनों से जोर-जोर से ढ़ोल पीटकर कह रही थी कि हमने बाढ़ व पानी निकासी के पुख्ता इंतजाम कर दिये हैं। लेकिन बारिश होने पर उसके ढ़ोल की पोल खुल गई और दिल्ली की जनता ने अपनी आँखों से देखा कि सभी सड़कों व अंडरपासो पर पानी की नदियां नजर आ रही थीं, सड़कों पर लंबा जाम भी दिखने लगा। वहीं बाहरी उत्तरी जिले के नरेला में 13 अगस्त 2026 को बारिश के पानी से भरे गड्ढे में डूबने से दो नाबालिग बच्चों की दुखद मौत हो गई। 9 और 11 वर्ष के ये बच्चे बवाना क्षेत्र के निवासी थे। दिल्ली की जनता ऐसे हालात को देखकर त्रस्त नजर आई अगर रेखा गुप्ता की सरकार ईमानदार है तो वह दिल्ली की जनता को स्पष्ट रुप से बताए कि यह स्थिति बनी क्यों? रेखा गुप्ता की सरकार के बाढ़ व निकासी से संबन्धित मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा अपने बड़-बोलेपन से बाज आएं और दिल्ली की जनता को स्पष्ट तस्वीर पेश करें झूठी और सामंतवादी मानसिकता से बात न करें।

आमतौर पर भारतीय समाज पूर्व की जनसंघ, वर्तमान भाजपा और संघी सरकारें घोटालों में हमेशा से सिरमोर रही है। उनकी कलात्मक शैली की विशेषता यही है कि वे छिपकर काम करते हैं और जनता के शासन में जनता से सबकुछ छिपाकर चलते हैं। जिसके कारण जनता में अधिक संशय पैदा होता है। इसलिए दिल्ली की जनता और देश की जनता से अनुरोध है कि वे घोटालेबाजों और छिपकर कार्य करने वालों की संस्कृति के साथी न बने और उन्हें अपना वोट ना दें, अपनी वोट की ताकत से भाजपा संघी सरकारों को दिल्ली व अन्य प्रदेशों से बाहर करने का भरसक प्रयास करें।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05