




2025-11-29 14:53:37
भारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ और इस दिवस को मोदी-संघी सरकार ने बहुजन समाज की वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए 2015 में संविधान दिवस मनाने का फैसला किया। मनुवादी संघी सरकार का यह गहरा षड्यंत्र था, जिसके तहत बहुजन समाज के मतदाताओं में हिन्दुत्व की भावना को परोसा गया, उनमें बढ़ते अम्बेडकरवाद को कमजोर करने की नियत से संविधान दिवस मनाने का फैसला लिया गया। ताकि देश के बहुजन समाज में बढ़ती अम्बेडकरवादी भावना को अशक्त किया जा सके। तभी से यह 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। 26 नवंबर 1949 को जब संविधान सभा की आखिरी सभा में संविधान को पारित किया गया तब बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर ने संविधान सभा के अपने आखिरी भाषण में देश को चेतावनी भरे शब्दों में बताया था कि ‘संविधान चाहे कितना भी अच्छा हो यदि उसको चलने वाले लोग बुरे है तो वह बुरा ही साबित होगा और यदि संविधान कितना भी बुरा हो अगर उसको चलाने वाले लोग अच्छे हैं तो वह अंतत: अच्छा ही साबित होगा’ वर्तमान समय में भारत का संविधान इसी चुनौती से गुजर रहा है चूंकि देश में मोदी के नेतृत्व में संघी सरकार है, संघियों का शुरू से ही संविधान और उसके निर्माता बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर को लेकर 36 का आंकड़ा रहा है चूंकि संघी मानसिकता के नेतृत्वकर्ता मनुस्मृति को ही अपना संविधान मानते हैं और इसी भावना के तहत जब संविधान का निर्माण हो रहा था तब संघी मानसिकता के कथित साधु-संतों ने देश व्यापी आंदोलन किये और बाबा साहब के पुतले जगह-जगह जलाए थे, उस समय कुछेक संघियों ने तो यहाँ तक कहा था कि हम इस संविधान को नहीं मानते चूंकि इसमें हिन्दुत्व की विचारधारा का कोई जिक्र नहीं है और न ही हमारे देवी-देवताओं का जिक्र है। संघी मानसिकता के लोग कभी भी स्पष्टता से बात नहीं करते वे हमेशा छिपे और षड्यंत्रकारी तरीके से ही काम करते हैं। संघी मानसिकता के लोग जमीन के ऊपर दिखाई नहीं देते, वे हमेशा जमीन की सतह के नीचे रहकर ही षड्यंत्र की रचना करते रहते है, जो सीधे-सादे लोगों को दिखाई भी नहीं देता। वर्तमान समय में मोदी-संघी सरकार में ऐसा ही हो रहा है, देश के प्रधानमंत्री मोदी ने 26 नवम्बर 2025 को पुरानी संसद में अपने भाषण के दौरान देश के लोगों से संवैधानिक कर्तव्य निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा ‘संविधान एक मजबूत लोकतंत्र की नींव है’, इस मौके पर पक्ष-विपक्ष के लोग एक ही मंच पर दिखे। महामहिम राष्ट्पति श्रीमति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ‘संविधान गुलामी की मानसिकता त्यागने, राष्ट्रवादी सोच, मार्गदर्शक का दस्तावेज है।’ संविधान दिवस के मौके पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला, पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और आएएसएस की सोच के अनुरूप संविधान के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि ‘भारत का संविधान केवल एक किताब नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक से किया गया एक पवित्र वादा है। उन्होंने कहा कि यह वादा सुनिश्चित करता है कि हर व्यक्ति, चाहे उसका धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, उसे समानता, सम्मान और न्याय का अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है। इस पर होने वाले हर प्रहार के सामने सबसे पहले मैं खड़ा रहूँगा।’
प्रधानमंत्री मोदी की 11 वर्षों की कार्यशैली को देखकर देश का लोकतंत्र उनसे जानना चाहता है?
1. प्रधानमंत्री मोदी जी देश की जनता को बताए कि नई संसद भवन में सेंगोल की स्थापना करना क्या संविधान की भावना के अनुरूप था?
2. हाल ही में हुए बिहार चुनाव में सरकार द्वारा महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये देना क्या संविधान और देश के लोकतंत्र को मजबूत करना था?
3. देश में जहां-जहां मनुवादी डबल इंजन की सरकारें हैं वहाँ-वहाँ पर दलितों, विशेषकर मुस्लिमों के घरों पर और उनके व्यवसायिक धंधों को बुलडोजर से ध्वस्त करना क्या संविधान के अनुरूप है?
4. देश में मंदिर निर्माण, पाखंडी बाबाओं, कथावाचकों, सत्संगकर्ताओं, धर्म संसदों आदि को प्राथमिक देना क्या भारत के संविधान व लोकतंत्र के अनुरूप है?
5. नॉर्थ ईस्ट के मणिपुर राज्य में महिलाओं की नग्न परेड करना क्या संविधान और सभ्य समाज की भावनाओं के अनुरूप था?
6. दलितों और मुस्लिमों के साथ मॉब लिंचिंग करना क्या संविधान और लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है?
7. लोकतंत्र में विभिन्न माध्यमों से मतदाताओं की वोट चोरी करना क्या संविधान की भावना और लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम है?
8. बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा जो बहुजनों के लंबे चले आंदोलन के बाद पुराने संसद भवन के प्रांगण में 1967 में स्थापित हुई थी। उसको मोदी सरकार ने संघी मानसिकता के तहत 3-4 जून 2024 की रात के अंधेरे में चुपचाप तरीके से हटा दिया, क्या मोदी संघियों का यह कृत्य देश की जनभावना और लोकतंत्र के अनुरूप था?
9. प्रधानमंत्री मोदी संघी मानसिकता के षड्यंत्र के तहत बार-बार संवैधानिक पदों पर बैठे अपने अंधभक्त गुलामों से यह कहलवा रहे हैं कि संसद ही सर्वोपरि है, संविधान नहीं, उनका छिपे ढंग से यह कृत्य क्या संविधान की भावना और उसकी सर्वोचता के अनुरूप है?
10. मोदी सरकार का विपक्षी नेताओं के विरुद्ध ईडी, सीबीआई, इन्कम टेक्स व अन्य संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके विपक्ष की आवाज पर ताला लगाना क्या संविधान व संसद की भावना के अनुरूप है?
11. मोदी संघी सरकार 2014 से केंद्र की सत्ता में आई है तभी से उसके द्वारा विपक्षी सरकारों के विधायकों की खरीद-फरोक्त करके मनुवादी संघी सरकारों में बदलकर डबल इंजन की सरकार बनाकर संवैधानिक व्यवस्थाओं को तरोड़ा-मरोड़ा जा रहा है, क्या इस प्रकार के कृत्य संविधान और लोकतंत्र के अनुरूप है?
12. केंद्र में बैठी मोदी संघी सरकार देश की जनता को यह बताए कि जो वादे जैसे महंगाई, शिक्षा, बेरोजगारी, स्वास्थ्य आदि पर मोदी संघियों ने सत्ता में आने से पहले जनता से किये थे क्या वे पूरे हो चुके हैं अगर नहीं हुए हैं तो क्या यह लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है?
13. मोदी संघियों की मानसिकता के अनुरूप अयोध्या में राम-मंदिर का निर्माण कराकर और वहाँ पर स्वयं मोदी के द्वारा रामलल्ला की मूर्ति की स्थापना और उसमें प्राण प्रतिष्ठा करना क्या संविधान की भावना के अनुरूप था?
14. मोदी संघी शासन के दौरान देश राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर निम्नतम स्तर पर पहुँच चुका है क्या मोदी सरकार की यह उपलब्धि भारत के लोकतंत्र को समृद्ध और मजबूत करती है?
15. मनुवादी-संघियों की मूल भावना शुरू से ही रही है कि देश में अधिकांश लोग गरीब रहे और केवल कुछेक 5-7 प्रतिशत लोग ही समृद्ध और आर्थिक रूप से मजबूत बने, उसी के अनुरूप मोदी संघी सरकार ने देश में पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा निर्मित की गई सार्वजनिक संपत्तियों जैसे- रेल, भेल, एलआईसी, बीएसएनएल आदि सैंकड़ों सरकारी कंपनियों का निजीकरण करके ओने-पौने दामों पर अपने व्यापारी मित्रों को बेच दिया है, क्या उनका यह कदम लोकहित और लोकतंत्र को मजबूत करता है?
16. भारत की जनता मोदी से पूछना चाहती है कि जब सेना की कमान मोदी सरकार के हाथ में, सुरक्षा एजेंसी की कामन मोदी सरकार के हाथ में, जांच एजेंसियों की कामन मोदी सरकार के हाथ में, गुप्तचर विभागों की कमान भी मोदी सरकार के हाथ में, सीमा सुरक्षा बलों की कमान मोदी सरकार के हाथ में आदि अन्य संबंधित एजेंसियों की कमान भी मोदी सरकार के हाथ में है तो फिर देश की जनता के ऊपर आतंकी हमले क्यों हो रहे हैं?
17. देश की सुरक्षा में चूक और आतंकी हमले भाजपा मनुवादी सरकारों में ही अधिकांशतया क्यों हुए हैं? जैसे- पुलवामा, पहलगाम, दिल्ली बम बलास्ट, विपक्ष के अनुसार 942 आतंकी हमले देश पर हुए हैं फिर भी संघियों के आँख और कान क्यों नहीं खुले? क्या इन हमलों के पीछे संघियों की छिपी रणनीति थी?
18. मोदी-संघी सरकार बड़े गर्व के साथ देशवासियों व विदेशियों से कह रही है कि हम 80 लाख लोगों को मुफ्त में राशन खिला रहे हैं, क्या इस मुफ्त की रणनीति के पीछे समाज के कमजोर वर्गों में गुलामी मानसिकता भरना नहीं है ताकि ये सभी लोग अपना वोट देते समय निरंतरता के साथ मोदी-संघी सरकार को ही अपना वोट करते रहे, संघियों की यह रणनीति क्या संविधान की भावना के अनुरूप है?
19. देशभर में एसआईआर करने के पीछे मोदी संघी सरकार तर्क दे रही है कि देश में घुसपैठिए बहुत अधिक संख्या में है उनकी पहचान करके उन्हें हमें देश से निकालना है, मोदी जी 11 साल से देश में आपकी सरकार है फिर ये घुसपैठिए देश के अंदर कैसे घुसे, क्या आपका गृह मंत्रालय देश की रक्षा करने में बिलकुल विफल हो चुका है?
20. एसआईआर के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की अकारण मौतें हो रही है जिनमें उत्तर प्रदेश की ठाकुरवादी मानसिकता की योगी सरकार सबसे अग्रणीय है। क्या बूथ लेवल अधिकारियों की मौते होना संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप है?
21. देशभर में बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमाओं को जातिवादी मानसिकता के तहत तोड़ा जा रहा है, ऐसी घटनाओं को देखकर क्या आपको लगता नहीं कि जहां-जहां पर ये घटनाएँ हो रही है वहाँ-वहाँ पर कानून का राज समाप्त हो चुका है। क्या ऐसी सरकारों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त नहीं करना चाहिए?
22. बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमाएँ युनेस्को सहित विश्वभर में बड़े पैमाने पर स्थापित की जा रही है क्या संघी मानसिकता के लोगों को यह शर्म नहीं आती कि तुम्हारी औछी हरकतों के बावजूद भी बाबा साहब के कद को छोटा नहीं किया जा सकता?
23. वर्तमान में संघियों द्वारा बड़े जोर-शोर से देश भर में नरेटिव चलाया जा रहा है कि संविधान बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर ने नहीं लिखा वह तो बी. एन. राव, जो एक ब्राह्मण थे उन्होंने लिखा था और बाबा साहब को झूठा श्रेय दिया जा रहा है, क्या ऐसी हरकतें करके मनुवादी मानसिकता के लोग बाबा साहब के विश्व स्तरीय कद को छोटा कर सकते हैं?
24. मोदी संघी शासन के 11 वर्षों में भ्रष्टाचार में लिप्त रहे लोगों को भाजपा में मिलाकर दोष मुक्त किया गया और फिर उन्हें वहाँ की सरकार तोड़कर मंत्री भी बनाया गया, क्या केंद्र में बैठी मोदी-संघी सरकार का यह कृत्य संविधान के अनुरूप है?
25. देश के शिक्षण संस्थानों में, न्यायालयों में, संवैधानिक पदों पर संघी मानसिकता के लोगों को बैठना और उनसे संघियों की जीविका को सरल व सुगम बनाना, क्या संविधान की भावना के अनुरूप है?
जनता जानती है कि संघी मोदी से उपरोक्त विषयों पर स्पष्टता के साथ जवाब नहीं मिलेगा बल्कि मोदी-संघियों के अंधभक्त और उनकी ट्रोल आर्मी संघियों से सवाल पूछने वालों के पीछे पड़ेगी और उन्हें परेशान करने के लिए लगा दी जाएगी या उन्हें देशद्रोही की संज्ञा देकर किसी मामले में फँसाने की चेष्ठा की जाएगी।
इस प्रकार के उत्पीड़नों से निपटने का जागरूक और देशभक्त समाज के पास सिर्फ एक ही इलाज है कि वे सभी इकट्ठा होकर अपनी रक्षा खुद करें, सभी साथ में मिलकर अपने-अपने सामाजिक धड़ों के लट्ठ मजबूत करें। दलित व अति पिछड़ी जातियों (भूमिहीन) व अल्पसंख्यक समुदायों के लोग मोदी और उसके संघी साथियों को हर चुनाव में एकता के साथ हराने का काम करें। अपनी वोट की रक्षा स्वयं करें और प्रदेश व देश के हर जिले में समाज की बहू-बेटियों पर होने वाले अत्याचारों का मुकाबला करने के लिए फूलन देवी जैसी विरांगनाओं का दल बनाएँ, सम्पूर्ण उत्पीड़ित समुदाय फूलन देवी जैसी बहादुर वीरांगनाओं को संरक्षण देकर उनकी रक्षा करें। तभी इस देश से जातिवादी मानसिकता का वर्चस्ववादी उत्पीड़न समाप्त हो सकेगा!
(लेखक सीएसआईआर से सेवानिवृत वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं)





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