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मोदी सरकार में ‘जंगलराज’ की डबल रफ्तार

प्रकाश चंद
News

2026-01-24 14:57:21

‘जंगलराज’ एक राजनीतिक और सामाजिक स्थिति है, जहां-जहां पर कानून व्यवस्था चरमरा जाती है, अपराध पनपते हैं, शक्तिशाली अपराधी या माफिया बिना किसी डर के सक्रिय होते हैं, जो अब मोदी के डबल इंजन की सरकारों में आम बात हो चली है। सरकारों का कानून व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं है। आज की सरकारें अक्सर गुंडे-मवाली व अपराधियों को राजनैतिक संरक्षण देती हंै, जिसके कारण राज्य में अपहरण, डकैती, भ्रष्टाचार आदि अपराध राजनैतिक संरक्षण में पलते हैं, उसे ही जंगलराज का पर्याय माना जाता है। जंगलराज एक ऐसी व्यवस्था है जहां पर ताकतवर ही कानून होता है और आम आदमी की सुरक्षा और उसकी आवाज सुनने की किसी को परवाह नहीं होती। देश में सिर्फ मोदी और उनके चहेते व्यापारी मित्र, भाजपा संघियों से जुड़े गुंडे-मवाली ही देश में अब जंगलराज के पर्याय बन हुए है।

मोदी ने बंगाल कहा

=टीएमसी के राज में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। यहां की शिक्षा व्यवस्था माफिया, भ्रष्टाचारियों के कब्जे में है। भाजपा को आपका एक वोट पक्का करेगा कि कॉलेज में रेप-हिंसा की घटनाओं पर लगाम लगे। आपका वोट तय करेगा कि बंगाल में संदेशखाली जैसी घटना ना हो।

=टीएमसी का छोटे से छोटा नेता खुद को बंगाल का माईबाप समझने लगा है। हुगली को इन्होंने शिक्षक भर्ती घोटाले के लिए बदनाम किया है। आपको एक बात याद रखनी है कि बंगाल में निवेश तभी आएगा, जब यहां माफिया, दंगाइयों को हटाया जाएगा।

=मैं बंगाल के नौजवानों, किसानों, माताओं-बहनों की हर संभव सेवा करूं, ये मेरा प्रयास रहता है। यहां की टीएमसी सरकार केंद्र की योजनाओं को आप तक पहुंचने नहीं देती। इनको मोदी से दिक्कत है, ये मुझे समझ आता है, लेकिन टीएमसी बंगाल के लोगों से अपनी दुश्मनी निकाल रही है।

भाजपा-संघी सरकारों का जंगलराज: मोदी के शासन काल के जंगलराज की पड़ताल करने के लिए एनसीआरबी रिपोर्ट 2025 के प्रकाशित आंकड़े बताते हैं कि मोदी सरकार के दौरान देश में मजबूत वर्गों का कमजोर वर्गों पर शोषण और दमन, मोदी की पोल खोलता है। मोदी के 11 सालों के कुशासन के दौरान अपराध की घटनाएँ तेजी से बढ़ी है। चाहे हत्या और अपहरण जैसे जघन्य अपराध हों, अथवा महिलाओं, बच्चों, दलितों, और आदिवासियों के विरूद्ध अपराध सभी में बीजेपी शासित राज्य शीर्ष पर हैं। यह इस देश के सामाजिक ढांचे, लैंगिक असमानता, जातिगत भेदभाव, बाल असुरक्षा और बीजेपी आरएसएस शासन में गिरती कानून-व्यवस्था की सच्चाई को एक साथ उजागर करती है, जिसे बीजेपी- आरएसएस के अंधभक्त झुठला नहीं सकते। 2025 एनसीआरबी के आंकड़े बीजेपी के सुशासन के झूठे दावों पर कालिख पोत रहे है?

भाजपा शासित प्रदेशों के आपराधिक मामले

1. हत्या, शीर्ष 3 राज्य (2025): उत्तर प्रदेश-3,491, महाराष्ट्र-2,785 बिहार-2,621 मामले।

2. अपहरण/बंधन में शीर्ष 3 राज्य: उत्तर प्रदेश-17,421, बिहार-12,981, महाराष्ट्र में 11,935 मामले। अपहरण के बढ़ते मामलों से स्पष्ट है कि पुलिस निगरानी और सामुदायिक सुरक्षा वहाँ पर बहुत कमजोर हुई है।

3. महिलाओं के खिलाफ अपराध: उत्तर प्रदेश-66,381, महाराष्ट्र-47,101 व राजस्थान में 45,450 मामले। ये आँकड़े दिखाते हैं कि महिला सुरक्षा भारत में एक राष्ट्रीय आपदा का विषय बन चुकी है। इन सभी राज्यों में मोदी-भाजपा की डबल इंजन की सरकारें हैं।

4. बच्चों के खिलाफ अपराध: मध्य प्रदेश-22,393, महाराष्ट्र-22,390 व उत्तर प्रदेश में 18,852 मामले। बच्चों से जुड़े अपराधों में पिछले साल की तुलना में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्य अपराध श्रेणियाँ बाल अपहरण, यौन शोषण (पोस्को), बाल श्रम और परित्याग हैं। यह वृद्धि न केवल कानून-व्यवस्था की कमजोरी, बल्कि समाज के नैतिक पतन को भी दर्शाती है।

5. अनुसूचित जातियों (एससी) के खिलाफ अपराध: उत्तर प्रदेश- 15,130, राजस्थान-8,449 व मध्य प्रदेश में 8,232 मामले। दलितों पर अत्याचार के मामले विशेषकर ग्रामीण इलाकों में सामाजिक-भेदभाव और पुलिस-पक्षपात से जुड़े हैं। यह स्थिति दिखाती है कि सामाजिक न्याय अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट) के बावजूद, जमीनी स्तर पर भेदभाव समाप्त नहीं हुआ है। एससी समुदायों पर अपराध संवैधानिक समानता की असफलता को दर्शाता है। गवाह-सुरक्षा, पुलिस-संवेदनशीलता और न्यायिक विलंब इस समस्या को और गहरा बनाते हैं।

6. अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ अपराध: मणिपुर-3,399, मध्य प्रदेश-2,858 व राजस्थान में 2,453 मामले। एसटी समुदायों पर अपराधों में लगभग 29 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। यह स्पष्ट करता है कि आदिवासी संरक्षण नीतियाँ और मोदी सरकारों की विकास योजनाएँ जमीनी स्तर पर विफल हैं।

संरचनात्मक कारक: बेरोजगारी, लैंगिक असमानता, एससी/एसटी कानून को कमजोर करना, महिला और बाल सुरक्षा कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन न होना, जातिगत भेदभाव, और पुलिस-सुधारों की अनुपस्थिति अपराध-वृद्धि के मुख्य कारण हैं। एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। पुलिस-प्रशिक्षण और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। बीजेपी-आरएसएस कुशासन में बढ़ते अपराध सिर्फ सांख्यिकीय तथ्य नहीं, बल्कि यह वर्तमान मोदी सरकार के असली न्यायिक व राजनीतिक चरित्र को भी दर्शाता है, नफरत, भेदभाव और कमजोर वर्गों के शोषण पर केंद्रित है। न्याय, समानता और मानवता जैसे शब्द संघियों की डिक्शनरी में तो पहले भी नहीं थे, और न आज मौजूद हैं।

मोदी-संघियों की कार्यशैली: मोदी-संघियों की सामाजिक/आर्थिक दशा के अनुसार, जिस राज्य या क्षेत्र में जब चुनाव होने का समय आए तब वहाँ पर 3-6 माह पूर्व उस क्षेत्र के लिए विशेष परियोजनाओं की घोषणा करो; जनता से लंबे-लंबे वायदे करो; मुफ्त की रेवड़ियाँ बांटने की घोषणा करो; घोषणा की गयी योजनाओं को क्रियान्वित बिलकुल मत करो; एक-दो साल ऐसे ही निकाल दो; और फिर कुछ नया शगूफा जनता के बीच जाकर छोड़ दो। अपने संघी प्रचारकों, कथावाचकों, कथित पाखंडी साधु-संतों को क्षेत्र की गली-गली, पार्क आदि में बैठाकर अशिक्षित महिलाओं को इकट्ठा करो और हर रोज वहाँ पर मजमा लगाओ, सभी को हिन्दू बताओ और उनके बच्चों को हिन्दू रक्षक दल, बजरंग दल आदि में शामिल करो। किसी भी प्रकार का उपद्रव व तनाव होने पर उन्हें ही अग्रिम मोर्चे पर लगाओ। ताकि अगर वहाँ पर कोई जान-माल का नुकसान होता है, तो वह भी उन्हीं वर्गों का हो।

मोदी बोले- टीएमसी राज में बेटियां सुरक्षित नहीं है : भाजपा को दिया आपका एक वोट पक्का करेगा कि कॉलेज में रेप-हिंसा की घटनाओं पर लगाम लगे। एक वोट तय करेगा कि बंगाल में संदेशखाली जैसी घटना फिर ना हो।

दिल्ली में भी एक ऐसी ही सरकार थी। जो केंद्र की योजनाओं को लागू नहीं होने देती थी। हम कहते रहे दिल्ली के गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान योजना लागू करो। उन्होंने नहीं सुना, राजनीतिक हिसाब किताब में लगे रहे। दिल्ली की जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया।

टीएमसी जनता से दुश्मनी निकाल रही है: टीएमसी सरकार केंद्र की योजनाओं को आप तक पहुंचने नहीं देती। इनको मोदी से दिक्कत है, ये मुझे समझ आता है, लेकिन टीएमसी बंगाल के लोगों से अपनी दुश्मनी निकाल रही है।

बंगाल की धरती ने देश की आजादी को जो नेतृत्व दिया, बीजेपी उस प्रेरणा को राष्ट्र के कोने-कोने तक ले जा रही है। भाजपा सरकार ही है जिसने दिल्ली में कर्तव्य पथ पर इंडिया गेट के सामने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तस्वीर लगाई है। आजाद हिंदी फौज के त्याग को नमन किया गया। नेताजी के नाम पर अंडमान में द्वीप का नाम रखा गया। पहले 26 जनवरी के कार्यक्रम 24-25 से शुरू होकर 30 तारीख को पूरे होते थे। अब ये 23 जनवरी सुभाष बाबू की जयंती से शुरू होकर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर समाप्त होगा।

जंगलराज को विदा करने आए मोदी: बीजेपी-एनडीए ने बिहार में अभी जंगलराज को रोका है और अब वे बंगाल में टीएमसी के महाजंगलराज को विदा करना चाहते हैं।

लोगों का उत्साह बंगाल की कहानी बयां कर रहा : सिंगूर का ये जनसैलाब आप सभी का ये जोश, उत्साह और मैं तो देख रहा हूं कि पीछे खड़े लोग देख भी नहीं पाते होंगे। दूर-दूर तक लोग ही लोग हैं। यह उत्साह और जोश पश्चिम बंगाल की नई कहानी गढ़ने जा रहा है!

कोलकाता पोर्ट में कार्गो हैंडलिंग के नए रिकॉर्ड: केंद्र सरकार पोर्ट लैंड बनाने पर जरूरी मदद दे रही है। पोर्ट-नदियों से जुड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इन पिलर पर बंगाल को मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेड और लॉजिस्टिक का हब बनाया जा सकता है। केंद्र सरकार ने बीते 11 साल में पोर्ट की कैपेसिटी बढ़ाने पर काम किया, इसकी कनेक्टिविटी सुधारी गई है। इसके लिए सड़कें बनाई गई हैं। पिछले साल कार्गो हैंडिलिग के रिकॉर्ड कोलकाता पोर्ट ने बनाए हैं।

बंगाल को 24 घंटे में कई सौगाते दीं: विकसित भारत के लिए पूर्वी भारत का विकास जरूरी है। इसके लिए केंद्र सरकार काम कर रही है। मैंने प. बंगाल से जुड़े विकास के सैकड़ों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का शिलान्यास, उद्धाटन किया। तीन अमृत भारत एक्सप्रेस और एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। पिछले 24 घंटे में बंगाल में रेल कनेक्टिविटी की कई योजनाएं शुरू की गई हैं। शायद 100 साल में पहले इतना काम नहीं हुआ होगा!

अकल के अंधे भारत के पिछड़े समुदायों के लोग आंकलन नहीं करते कि कितने भाजपा और संघ से जुड़े मंत्रियों के बच्चे गौरक्षक है, कितने बजरंग दल में हैं और कितने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद हुए है। भाजपा-संघी वे लोग है जो दूसरों की चिताओं पर हाथ सेंककर अपने को नेता बनाकर प्रदर्शित करते। कुल मिलाकर मनुवादी लोग देश और मानवता के दुश्मन है। पिछड़े समुदायों के लोगों को गौरक्षक या हिन्दू रक्षक दल में शामिल करके समाज में जब भी कोई तनाब या उपद्रव हो तब इन्हें ही अग्रिम मोर्चे पर भेजा जाता है ताकि वहाँ पर अगर कोई जान-माल की क्षति होती है तो वह भी इन्हीं समुदायों की होगी, ब्राह्मण व अन्य सवर्ण समाज के लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा। यह एक ब्राह्मण संस्कृति का षड्यंत्र है। जबतक इस देश के उच्च वर्गों में संवेदनशीलता, तथा कमजोर वर्गों को शिक्षा और अवसर की समानता नहीं मिलेगी, कमजोर वर्गों के विरूद्ध होने वाले अपराधों की यह ऊँचाई घटेगी नहीं। इन्हीं कड़वी सच्चाई को जनता से छुपाने के लिए, बीजेपी-आरएसएस हर चुनावों से पहले हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद और हिंदुस्तान-पाकिस्तान का खेल खेलती है, ताकि बहुसंख्यक आबादी का ध्यान असल मुद्दों से भटकाकर उनका वोट हासिल किया जा सके!

(लेखक सीएसआईआर से सेवानिवृत वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं)

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05