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जुमलों के ‘मनुवादी शहंशाह’ का काम गुल, प्रचार फुल

प्रकाश चंद
News

2026-01-19 13:20:46

देश में और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रधानमंत्री मोदी को जुमलेबाज, नौटंकीबाज, झूठा और झांसा देने वाला व्यक्ति माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इसी मानसिकता से देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य समस्याओं, शिक्षा के क्षेत्र की समस्याओं को छिपाने के उद्देश्य से देश में एक ऐसी फौज खड़ी कर दी है, जिन्हें न देश का ज्ञान है, और न वैश्विक ज्ञान है। मनुवादी संघियों के आनुसंगिक संगठन जैसे आरएसएस, बजरंग दल, हिन्दू विश्व परिषद, गौरक्षा दल आदि सैंकड़ों संगठन हैं जो आए दिन भिन्न-भिन्न जगहों पर अपनी दबंगाई और गुंडाई के माध्यम से देश की भोली-भाली जनता को प्रताड़ित करते हैं। जिसके कारण देश की बहुसंख्यक जनता के मन और मस्तिष्क में बड़ा खतरा व्याप्त हो रहा है। हिन्दुत्व की वैचारिकी में संवैधानिक भावना की मान्यता नहीं है। संविधान की प्रस्तावना में समता, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, न्याय की भावना है, जिसे मनुवादी संघी वैचारिकी के लोग नहीं मानते और देश में आए दिन नफरत और वैमनष्यता के बीज बोने का काम करते हैं। संघियों में इस तरह का चरित्र अभी से नहीं है, बल्कि इस तरह की मानसिकता इनके अतीत के लोगों की भी रही है। उदाहरण के तौर पर पूरा देश जानता है जब देश की अधिसंख्यक जनसंख्या आजादी के आंदोलन में व्यस्त थी, तब मनुवादी संघी हिन्दुत्व की वैचारिकी वाले लोग आंदोलनकारियों की मुकबरी करके उनकी सूचना अंग्रेज सरकार को दे रहे थे, और बदले में ईनाम और पेंशन अंग्रेज सरकार से पा रहे थे। देश के प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत की वैचारिकी के वंशज इसी तरह की देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। इनके चरित्र के आधार पर इन्हें राष्ट्रवादी नहीं कहा जा सकता, बल्कि ये राष्ट्र विरोधी तत्व है, जनता को इनके झांसे में नहीं आना चाहिए। देश के प्रधानमंत्री मोदी आज अपने अंधभक्तों व कथित विद्वानों के द्वारा देश का इतिहास बदने की बात कर रहे हैं, और इतिहास की सच्ची घटनाओं को पुन: झूठ के आधार पर लिखवाया जा रहा है। इनके द्वारा लिखवाया जा रहा इतिहास तथ्यात्मक नहीं बल्कि वह झूठ व पाखंड से भरी पौराणिक कथाओं पर आधारित है।

जनता से जुड़े मुद्दों की बात नहीं करते मोदी: प्रधानमंत्री मोदी का चरित्र छलावामयी व जुमलेबाजी का है, देश के हित में काम करने की संस्कृति न उनकी है और न उनके पूर्वजों की रही है। 2014 में जब झूठ और पाखंड के बल पर मोदी प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने देश के युवाओं से वायदा किया था कि देश के 2 करोड़ युवाओं को प्रतिवर्ष रोजगार देंगे, मगर यह वायदा चुनावी जुमला ही रह गया। रोजगार पाने के सभी स्रोत प्रधानमंत्री मोदी ने देश की सत्ता संभालते ही खत्म कर दिये। युवाओं को रोजगार देने वाले सभी सार्वजनिक उद्यमों व कंपनियों को मोदी ने अपने व्यापारी मित्रों के हित में उन सभी का निजीकरण करके, अपने व्यापारी मित्रों को औने-पौने दाम पर बेच दिया। मोदी संघियों की सत्ता को केंद्र में आए अब करीब 12 वर्ष का समय होने जा रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 2 करोड़ की बात तो दूर, 2 लाख युवाओं को भी रोजगार मुहैया नहीं कराये। बल्कि इस दौरान जो युवा रोजगार पाने योग्य थे, उन्हें प्रधानमंत्री मोदी व उसकी डबल इंजन की सरकारों ने स्थायी रूप से बेरोजगार बना दिया है। रोजगार पाने की एक निश्चित उम्र होती है, और प्रधानमंत्री मोदी के 10-12 साल के शासन में अब रोजगार पाने लायक युवाओं की उम्र पार होकर अब वे स्थायी रूप से बेरोजगार बन चुके हैं। आंकलन करने पर मोदी ने अपने शासन काल में देश के करीब 25 करोड़ लोगों को स्थायी रूप से बेरोजगार बना दिया है। अब प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा बनाए गए बेरोजगार लोग अपनी पूरी उम्र बेरोजगार रहकर मोदी सरकार और सरकारी व्यवस्था को कोसते रहेंगे। वे अपना पूरा जीवन मजबूरी में बेरोजगार रहकर गरीबी की मार झेलने को मजबूर रहेंगे। सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री व उनके गुजराती मित्र अमित शाह ने जनता के लिए उसे चुनावी जुमला ही करार दिया था।

100 स्मार्ट सिटी बनाने का वायदा: प्रधानमंत्री मोदी ने शासन सत्ता में आने से पहले देश की भोली-भाली जनता को गुमराह करने के इरादे से 100 स्मार्ट सिटी बनाने का वायदा किया था उन्होंने अपने 12 साल के शासन में एक भी स्मार्ट शहर बनाकर नहीं दिखाया। ऐसा लगता है कि मोदी को खुद भी यह पता नहीं है कि स्मार्ट सिटी की परिभाषा और आयाम क्या है? और उस स्मार्ट शहर की विशेषताएँ क्या होगी? संघी मानसिकता के प्रधानमंत्री मोदी ने एक काम जरूर किया है, वह है पहले से बसे हुए शहरों या सड़कों के नाम बदले हैं, जिनमें कुछ भी नयापन नहीं है। उदाहरण के तौर पर ‘इलाहाबाद’ का नाम ‘प्रयागराज’ और ‘मुगल सराय स्टेशन’ का नाम बदलकर ‘दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन’ कर दिया है। ऐसे सिर्फ एक-दो उदाहरण ही नहीं है, बल्कि सैंकड़ों सड़कों और शहरों के नाम बदले गए हैं। इतिहास बदलने के नाम पर मोदी की संस्कृति यही रही है। मोदी और संघियों के अंधभक्त प्राय: देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यों को पिछले 12 साल से सत्ता के सहारे, छोटा करके दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। मगर मोदी व संघियों के अंधभक्तों को याद रखना चाहिए कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति सिर्फ और सिर्फ अपने द्वारा किए गए मानवतावादी कार्यों से ही बड़ा बन सकता है, छलावों, झूठों व पाखंडवादी रास्ते को अपनाकर बड़ा नहीं बन सकता। संघी मानसिकता के व्यक्तियों का अतीत से ही ऐसा चरित्र रहा है कि झूठ, झांसा व जुमलेबाजी को अपनाकर अपने आपको जनता के सामने देशभक्त बोलते रहो और देशभक्ति का कोई काम मत करो। मौका मिलने पर देश की मुकबरी देश के दुश्मनों के साथ मिलकर करो। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान संघी व हिन्दुत्व की वैचारिकी वाले लोगों का इस तहत का कृत्य देश के सभी लोगों ने देखा, संघियों ने गांधी की हत्या करके सभी को यह साबित कर दिया कि संघी व हिन्दुत्व की वैचारिकी के लोग किसी भी हद तक जाकर देश और देश के नागरिकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आज भारत के पड़ोसी देश चीन ने भारत की करीब 38,000 से 43,000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है, लेकिन मोदी जैसे कथित राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री मोदी में चीन के विरुद्ध कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं है। ऐसे कथित संघी राष्ट्रवादी मानसिकता के लोग अपने ही देश के अल्पसंख्यकों विशेषकर मुस्लिमों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आदि के घरों व व्यवसायिक संस्थानों पर बुलडोजर चलवा रहे हैं। लेकिन चीनी सीमा पर चीनी सरकार के विरुद्ध संघी मानसिकता के मोदी में बोलने का साहस नहीं है। यह पूरा दृश्य भारत की जनता पिछले 12 वर्षों से देख रही है। देश की जनता क्या करे वह तो मोदी के झूठ और छलावों में फँसी हुई है।

हवाई जहाज में बैठाने का वायदा: पीएम मोदी ने अपने वायदे के खिलाफ काम किया, हवाई जहाज में बैठाने की बात तो दूर, उसने अब उसके पैरों की हवाई चप्पल को भी गायब कर दिया और उन्हें बिना चप्पल के चलने को मजबूर कर दिया। आज सभी मजदूर बिना हवाई चप्पल के सरकार द्वारा बांटे जा रहे मुफ्त के 5 किलो अनाज पर निर्भर कर दिये हैं। संघी मानसिकता के प्रधानमंत्री और उसके संघी सहयोगियों ने ऐसा जानबूझकर किया है चूंकि जो लोग अपने परिश्रम से रोजी-रोटी कमा रहे थे, सरकार ने उनके संसाधनों और रोजगार को खत्म कर दिया है। संघियों का यह खेल देश की गरीब जनता को मुफ्त की रेवड़ियां खाने की आदत डालकर उन्हें मानसिक रूप से गुलाम बनाना है और उन्हें सिर्फ मनुवादी संघियों को वोट देने वाला पशु बना दिया है ताकि मनुवादी संघियों की सत्ता देश में अधिकतम समय तक बनी रहे। देश की गरीब जनता को अपने नागरिक अधिकारों के बारे में कोई जानकारी न हो और न सरकार के सामने वे कोई सवाल उठा सकें। मोदी संघी व उनके संघी साथी हर समय चुनावी मोड में रहते हैं, उनका मूल मंत्र है किसी भी तरह, किसी भी कीमत पर चुनाव जीते और सत्ता में रहे। जनता से किए गए वायदे को न याद रखना है और न उन्हें निभाना है।

मंदिर-मस्जिद विवाद को जिंदा रखना है: संघी मानसिकता के व्यक्तियों को पता है कि देश में लोकतन्त्र है और यहाँ के शासन के लिए सभी धर्म समान है। किसी एक धर्म को मानने वाले व्यक्तियों का यहाँ पर आधिपत्य नहीं हो सकता। भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष है जिसके अनुसार देश में रहने वाले सभी धर्मावलम्बी बराबर है और उनके अधिकार भी समान है। परंतु हिन्दुत्व की वैचारिकी वाले लोग इस देश में जाति, धर्म के आधार पर नफरत और वैमनष्यता की खेती करके सत्ता हासिल कर रहे हैं और फिर सत्ता बल से देश भर में कथित साधु-संत, पाखंडियों से प्रचार करा रहे हैं कि ‘हिन्दू खतरे में हैं’ इन धूर्तों से कोई यह पूछे कि जब तुम्हारे मुताबिक इस देश में हिन्दू अधिसंख्यक है, देश का प्रधानमंत्री हिन्दू है, देश का गृहमंत्री हिन्दू है, देश का रक्षामंत्री हिन्दू है तो फिर खतरा किससे और कहाँ से आ रहा है? इतना ही नहीं देश में जब अंग्रेजों का राज था तब यहाँ पर रहने वाले हिदुत्व की वैचारिकी वालों को कोई खतरा नहीं हुआ, उससे पहले मुस्लिम शासकों के शासन में हिन्दुत्व की वैचारिकी के मतावलंबियों को कोई खतरा नहीं हुआ तो अब यह खतरा कहाँ से आ रहा हैं? इस तरह के झूठे प्रचार के पीछे संघियों का पहला मकसद है कि देश में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध नफरत और घृणा के भाव को जोर-जोर से हल्ला मचाकर जमीन पर उतारो, ताकि भारत के कम समझ लोग संघियों के छलावों में फँसकर हिन्दुत्व की जहरीली मानसिकता वालों को वोट देते रहे, और हिन्दुत्व की वैचारिकी वाले सत्ता में बने रहे।

जनता के सामने दूसरा तथ्य यह भी है कि देश में जितने भी आतंकी हमले आजतक हुए हैं वे अधिकांशतया संघियों की सत्ता के दौरान ही हुए हैं। इसके अलावा भिन्न-भिन्न जगहों पर जितने भी बम ब्लास्ट हुए हैं उनकी जांच में अधिकाशतया संघी मानसिकता के लोग ही लिप्त पाये गए हैं। जिनके विरुद्ध संघी सरकार के चलते उनपर कठोरतम कार्यवाई नहीं की जा रही है बल्कि मोदी संघी सरकार उनको संरक्षण दे रही है। तीसरा वास्तविक तथ्य यह है कि देश में जितने भी भ्रष्टाचारी है, बलात्कारी है, हत्यारे व अपराधी है वे अधिकांशतया अब भाजपा सरकार में मंत्री, विधायक या सांसद है। अगर मोदी संघी सरकार लोकतन्त्र और न्याय के सिद्धान्त पर चले तो इन सभी अपराधियों को पकड़ना बहुत ही आसान है मगर मोदी संघी सरकार ऐसा न करके इन सभी किस्म के अपराधियों को भाजपा की सरकार में मिलाकर उन्हें निरापराध घोषित करके उन्हें बचाने के प्रयास में रहती है।

देश की जनता से आग्रह है कि ऐसी संघी सरकारों से देश को फायदा नहीं बल्कि नुकसान है इसलिए जितना जल्दी हो इन संघियों को सत्ता से बाहर करके, देश बचाओ।

(लेखक सीएसआईआर से सेवानिवृत वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं)

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05