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बहुजन समाज किसे वोट दें?
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2026-08-29 17:24:38

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है, चुने गए प्रतिनिधियों से ही सरकार का निर्माण होता है। चुने हुए प्रतिनिधि सरकार के सामने जनता के मुद्दों को उठाते हैं, और उनका संविधान सम्मत तर्क आधारित समाधान कराते हैं। वर्तमान समय में देश में मनुवादी संघी सरकार है। मनुवादी संघी सरकारें जनता से जुड़ी हुई समस्याओं पर ध्यान नही देती है, बल्कि वह अपने संघी एजेंडे के तहत छिपे ढंग से काम करती है। संघी सरकार कभी भी जमीनी सतह के ऊपर दिखाई नहीं देती वह षड्यंत्रकारी तरीके से जमीन की सतह के नीचे रहकर और जनता को प्रत्यक्ष रूप में न दिखकर अपने षडयंत्रों के माध्यम से मानवता और राष्ट्र विरोधी गतिविधियां चलाती है।

देश में मोदी संघी सरकार का तांडव जारी है, इसलिए पिछले 12 वर्षों से देश में कोई भी मानवतावादी कार्य नहीं हो रहा है, वह जनता के बीच हिन्दू-मुसलमान का राग अलापकर घृणा का भाव पैदा कर रहे हैं। देशभर में हिन्दू-मुसलमान, गाय-गोबर और मंदिर-मस्जिद के मुद्दों को उछालकर जनता से जुड़े असली मुद्दों से ध्यान भटकाकर उन्हें लूटा जा रहा है। देशभर में पेपर लीक, मंदिरों से चंदा चोरी, चुनावी चंदा इत्यादि के मामले उछालकर उनका ध्यान भटकाने के लिए नए-नए बनावटी मुद्दे हर रोज गड़े जा रहे हैं। राम मंदिर से अकूत धन सम्पदा की चोरी से जुड़ा मुद्दा संघी मानसिकता के लोगों के द्वारा ही रचा गया है। देशभर में आज तक जितने भी धन सम्पदा से जुड़े बड़े-बड़े मामले घटित हुए हैं, वे सभी संघी मानसिकता के ब्राह्मणों और वैश्यों (बनियों) की भागीदारी के बगैर नहीं हुए हैं।

सामान्यत: सभी समाज में अच्छी और बुरी मानसिकता वाली सोच के व्यक्ति हमेशा ही मौजूद रहते हैं मगर गिना उनको जाता है जो समाज में अधिक दिखाई देते हैं। यहाँ पर यह साफ करना उचित होगा कि सवर्ण समाज के जातीय घटकों में भी अच्छी मानसिकता व मानवतावादी व्यक्ति विद्यमान है। मगर उनकी गिनती इसलिए फीकी पड़ जाती है, चूंकि उनकी मानसिकता में आतातायी मानसिकता के लोग अधिक सक्रिय होकर मानवता विरोधी कार्यों को बढ़-चढ़कर अंजाम देते हैं। इसलिए सवर्ण समाज के जो लोग पिछड़े वर्ग के आरक्षण का विरोध कर रहे हैं उन्हें अपने अतीत में जाकर देखना चाहिए कि पिछले 3 हजार वर्षों से ब्राह्मण समुदाय का शिक्षा और श्रेष्ठता के क्षेत्र में निर्बाध एकाधिकार रहा है। आज सवर्ण समाज के जो आतातायी मानसिकता के लोग पिछड़े वर्ग के आरक्षण का विरोध कर रहे हैं वे पहले पिछड़े वर्ग के सामने जाकर अपनी यह सफाई दें कि जब पिछड़े व वंचित समुदायों ने ब्राह्मणों और वैश्यों के एकाधिकार रूपी 100 प्रतिशत आरक्षण के विरुद्ध आवाज उठाई थी क्या? वर्तमान में तथाकथित सवर्ण समाज के लोग स्पष्ट तौर पर पिछड़े वर्ग के जातीय घटकों को यह बताएं कि अभी तक क्या वे और उनके पूर्वज ब्राह्मणों और वैश्यों के एकाधिकार को लेकर नपुंशक मुद्रा में क्यों बने हुए थे? साथ ही वे यह भी बताए कि देश 755 वर्षों तक विदेशी शासकों का गुलाम रहा तब उनका शौर्य और क्षत्रियपन कहाँ चला गया था? आज सर्व समाज पढ़-लिखकर विद्वता हासिल कर रहा है। उन्हें इतिहास में ब्राह्मणों और क्षत्रियों द्वारा की गई विदेशी शक्तियों के साथ मिलीभगत का भी पूरा तथ्यात्मक ज्ञान है। वर्तमान में जो पिछड़े वर्ग के आरक्षण का विरोध हो रहा है या वह कराया जा रहा है, वह सिर्फ मनुवादी संघी ताकतों के उकसावे में किया जा रहा है। पिछड़े वर्ग के जातीय घटकों से अनुरोध है कि वे मनुवादी सवर्ण समाज के षड्यंत्र को समझें इनके बहकावे में आकर अपने जातीय घटकों की एकता को विखंडित न होने दे। सभी को साथ लेकर एकता के साथ अपने हक अधिकारों की लड़ाई लड़े। आप सभी को यह भी ध्यान रखना होगा कि चुनाव में किसी भी ऐसे प्रत्याशी को वोट न देने का संकल्प लें, पिछड़े वर्ग के आरक्षण का विरोधी प्रत्याशी यदि मैदान में हैं तो उन्हें एकता के साथ वोट न देने का संकल्प लें।

पिछड़े वर्ग के जातीय घटकों की विडम्बना यह है कि वे सभी ब्राह्मणवादी-मनुवादी कुचक्र में फंसे हुए है, उन सभी में आज तक यह धारणा नहीं विकसित हो पायी है कि चाहे कृषक समाज हो, चाहे तकनीकी श्रमिक समाज हो, वे आपस में एक-दूसरे को अपने से भिन्न समझते हैं। भिन्नता का कारण उनके मस्तिष्क में ब्राह्मणवाद और सवर्णवाद की अंतर्निहित संरचना है। उसे उन्हें त्यागना होगा सबको एक साथ एक प्लेटफार्म पर इकट्ठा होकर सबको अपने हक अधिकार की लड़ाई स्वयं ही लड़नी होगी। अति पिछड़ों के आरक्षण के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक लगता है कि पिछड़ों के आरक्षण की आवाज सबसे पहले दलित शोषित वंचित समाज से आने वाले महानायक मान्यवर कांशीराम जी ने उठाई थी और उसके लिए देश व्यापी आंदोलन भी चलाया गया था। मान्यवर साहेब कांशीराम जी के आंदोलन में भी यह देखा गया था कि पिछड़े वर्ग के जातीय घटक मनुवादी-ब्राह्मणवादियों का बिना सोचे-समझें साथ दे रहे थे और मान्यवर साहेब कांशीराम जी के आंदोलन का विरोध कर रहे थे। उदाहरण के तौर पर उस आंदोलन में मनुवादी संघी षड्यंत्र के तहत ‘राजीव गोस्वामी’ नाम के छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाया था। उसने पिछड़े वर्ग के आंदोलन के विरोध में आत्महत्या की थी। यहाँ पर गौर करने वाली बात यह है कि राजीव गोस्वामी नाम का छात्र पिछड़े वर्ग से ही संबन्धित था। ब्राह्मणवादी संघियों की कार्यशैली का यह अहम पहलू है कि वे जिनके हक-अधिकारों के विरोध में खड़े होते हैं, वे उसी समाज से गुलाम मानसिकता के कम समझ व्यक्ति को ढूंढकर उसे ही अपने हथियार के रूप में आंदोलन की आग में झोंक देते हैं। उनके षड्यंत्र का सीधा सा मतलब है, जो अतीत काल से ही चला आ रहा है कि दलितों-पिछड़ों, शोषित के हक-अधिकारों के लिए लड़ने वालों में से गुलाम मानसिकता का व्यक्ति चुनो और उसी की आंदोलन में बलि दे दो। पिछड़े वर्ग के जातीय घटकों से निवेदन है कि वे मनुवादी ब्राह्मणवादी षड्यंत्र को समझें और पिछड़े वर्ग के जातीय घटकों व अन्य वंचित समाज के जातीय घटकों को साथ लेकर अपने हक व अधिकारों की लड़ाई मिलकर लड़े। आरक्षण का कारवां तभी सफलता प्राप्त कर सकता है। वर्तमान मोदी संघी सरकार ने पिछड़ों के आरक्षण को शून्य करने के लिए पिछड़े वर्ग से बनाए गए गुलाम मानसिकता के मंत्री, विधायक, सांसद आदि को मैदान में उतार दिया है। उनको साफ आदेश दिया गया है कि अपने समाज को समझाओ कि वे आरक्षण की मांग न करें हमने सरकार में मंत्री आपको इसी काम के लिए बनाया है। वर्तमान आरक्षण विरोधी सरकार की मानसिकता और पिछड़े वर्ग की जनगणना को देखकर पिछड़ों को मनुवादी संघी सरकार का गहरा षड्यंत्र दिखाई दे रहा है।

वर्तमान समय में अपने हक अधिकारों की लड़ाई के लिए सभी पिछड़े वर्ग के जातीय घटकों को एकता के साथ सरकार के सामने मैदान में आना होगा और अपने इस संघर्ष में दलित-पिछड़े व अल्पसंख्यकों को भी साथ लेना होगा। मोदी संघी सरकार ने जो अपने 12 वर्षों के शासन काल में सांप्रदायिक जहर घोलकर समाज और देश का जो नुकसान किया है, उसकी भरपाई सबको एक साथ लाकर ही की जा सकती है। यहाँ पर यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि आरक्षण के लिए हक अधिकारों की लड़ाई की पहल पिछड़े वर्ग के जातीय घटकों से ही होनी चाहिए। वे आंदोलन में तमाशबीन न बने, बल्कि आंदोलन की अगुआई करने के लिए स्वयं सामने आए और बाकी सभी को साथ ले। पिछड़े समाज के जो जातीय घटक आपके हक अधिकारों की लड़ाई में साथ नहीं देते हैं, उनका बहिष्कार करें, उनके द्वारा अपने जातीय घटक से नामित प्रत्याशी को किसी भी कीमत पर अपना वोट न देने का संकल्प लिया जाये। ऐसी मानसिकता के लोगों को ग्राम पंचायत का प्रधान भी न चुना जाए यह तभी संभव हो पाएगा जब आप अपने सभी जातीय घटकों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ेंगे और संघर्ष करेंगे।

देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र चुनाव होने की घोषणा हो चुकी है, इन छात्र संगठनों में जो भी छात्र एबीवीपी के माध्यम से चुनाव में उतरे, और आरक्षण का विरोध करे, तो उस शिक्षण संस्थान के सभी छात्रों का कर्तव्य बनता है कि वे सभी पिछड़े वर्ग के आरक्षण विरोधी शक्तियों को परास्त करने के लिए एबीवीपी के बैनर से चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी को वोट न देकर उसे भारी मतों से हराए, ताकि आने वाले किसी भी चुनाव में मनुवादियों का मनोबल रसातल में चला जाए। सभी प्रबुद्ध जनों को याद दिलाना चाहते हैं कि साँप के बच्चे भी सांप ही बनते हैं जो बड़े होकर सभ्य समाज को डसने का काम करते हैं। इसी प्रकार एबीवीपी के माध्यम से जो छात्र चुनावी मैदान में उतारा जा रहा है उसे सभी दलित-पिछड़े समाज के छात्र मिलकर हराएं, और आगे के लिए भी संकल्प ले कि हम साँप के बच्चे को वोट कभी नहीं देंगे।

लोकतन्त्र को कमजोर करने का मुख्य कारण है कि देश के पिछड़े वर्ग की जातियाँ अपने अधिकारों के लिए न जागरूक है और न अपने अधिकारों के लिए संघर्षशील है। उनमें बाबा साहब द्वारा दिये गए तीन मंत्रों ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’ का पालन करने का भी आधार नजर नहीं आता, वे तो सिर्फ मंदिरों के पुजारियों, कथावाचकों के चंगुल में फँसकर मंदिरों में चढ़ावा चढ़ाकर यह मान रहे है कि मंदिर में चढ़ावा चढ़ाकर ही हमारा और हमारी आने वाली पीढ़ी का कल्याण होगा। जो स्वत: एक भ्रामक और मिथ्त ही है। इस स्थिति से बाहर निकलकर उन्हें अपने आपको अपने बुद्धिबल से अपना दीपक बनना होगा। जिसका आधार शिक्षा और ज्ञान ही है। अत्यंत पिछड़े जातीय घटकों से निवेदन है कि वे अपना अमूल्य वोट ब्राह्मणवादी कुतर्को में फँसकर, ब्राह्मणवादी/मनुवादी मानसिकता के प्रत्याशी को न दे। तभी आप सब अपने विकास के मार्ग पर अग्रसर हो सकेंगे। आपका वोट सिर्फ और सिर्फ ऐसे प्रत्याशी को जाना चाहिए जो आपके समुदाय के लिए कल्याणकारी योजनाओं का निर्माण कर सके और चुनाव में निर्वाचित होने के बाद उन योजनाओं को लागू करा सके।

अपने आपको हिन्दू मानकर और समझकर नफरती भाषणबाजों और सामाजिक एकता को तोड़ने वालों का साथ न दें। भारत का संविधान देश में बसने वाले सभी नागरिकों को समता और स्वतंत्रता के आधार पर बराबरी का हक देता है। आप सभी इसी बात को समझकर अपने समुदायों को इकट्ठा करके एक साथ मिलकर अपना वोट एक न्यायवादी, समतावादी, अच्छी मानसिकता के प्रत्याशी को ही देने का संकल्प ले ताकि देश में समतावादी सरकारों का निर्माण हो सके और देश में बढ़ते विषमतावादी जहर को खत्म किया जा सके।

देश की जागरूक जनता से अनुरोध है कि वह ऐसी सोच वाले व्यक्तियों को न वोट दे, न सपोर्ट करें, नफरती सोच वाले व्यक्तियों का पूरी तरह से विरोध करें। हिन्दू मुसलमान, गाय-गोबर के छलावे में न फंसे, चुनाव कोई भी हो आप सिर्फ अपना वोट अच्छे मानवतावादी, अंबेडकरवादी, बुद्धवादी प्रत्याशी को ही दे, जिससे देश में शांति और मानवतावाद स्थापित हो सके।

सांप्रदायिकता के आधार पर जो प्रत्याशी आपकी वोट का ध्रुवीकरण करे उसे अपना वोट न दे चूंकि ऐसे प्रत्याशी समाज के विभाजक और देश विरोधी मानसिकता के होते हैं। इनकी जीत को किसी भी माध्यम से असफल करें तभी यह देश प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हो सकेगा और देश में भाईचारा मजबूत हो सकेगा।

चुनाव प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके द्वारा अच्छी सोच, ईमानदार और मानवतावादी व्यक्ति को चुनकर देश में विकास को बढ़ाया जा सकता है। मोदी संघी जैसे लुटेरों को देश से बाहर किया जा सकता है। संघ की जहरीली मानसिकता को भारत की पवित्र भूमि से मिटाया जा सकता है। देश में असंवेदनशील होती सरकारें, बढ़ते भ्रष्टाचार, बढ़ती बेरोजगारी, महंगी होती शिक्षा, महंगा होता ईलाज, महंगी होती खाद्य सामग्री को सुगमता के साथ जनता को उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्य किए जा सकते हैं और जनता की रोजमर्रा की जिंदगी में अमन चेन की बहार लाई जा सकती है। इसलिए आम जनता से अनुरोध है कि जो प्रत्याशी जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और उन्हें हल कराने की क्षमता रखता हो उसे ही अपना अमूल्य वोट दे। संघियों के किसी भी छलावे में न फंसे। संघी मनुवादी लोग गरीब जनता की वोट खरीदने में और उसकी चोरी करने में सबसे माहिर है।

दलित जातीय घटकों के उन गुलाम मानसिकता वाले कथित हिंदुओं से सावधान रहना है जो मनुवादी संघियों के बहकावे में आकर अपने आपको हिन्दू मान रहे हैं या कह रहे हैं। ये लोग अपने आप में समाज के दुश्मन है। दलित जातीय घटकों के ऐसे लोग संघियों के मानसिक गुलाम है उन्हें न सच्चाई पता है और न वे सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं। संघी मनुवादी मानसिकता के लोग ऐसे मूर्खों की ताकत पर ही बहुजन समाज के अन्य जातीय घटकों का वोट विखंडित करके मनुवादी संघियों की सरकारों का निर्माण करा रहे हैं। बहुजन समाज के सभी जागरूक जातीय घटकों के लोगों को ऐसे मूर्खों से सावधान रहना चाहिए, कोशिश जरूर करें कि वे आपके साथ आ जाए मगर वे आपके साथ आने में अधिक शक्ति लगवा रहे हैं, तो ऐसे लोगों को उनके हाल पर छोड़ना ही उचित होगा। इस शक्ति को अगर हम अच्छे अंबेडकरवादी समुदाय को जागरूक करने में लगाएंगे तो शायद समाज को अधिक लाभ मिलेगा। हमारा मकसद इस देश से मनुवाद, ब्राह्मणवाद, संघवाद को परास्त करना है और हमारी पूरी शक्ति उसी पर केन्द्रित होनी चाहिए तभी हम मनुवाद, ब्राह्मणवाद और संघवाद को हरा सकेंगे।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05