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मंत्री जी से सवाल किया तो जवाब मिला ‘घंटा’

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥
News

2026-01-03 14:42:45

यह रहीम के इस दोहे का अर्थ है, कि मनुष्य को अपने व्यवहार में हमेशा पानी (विनम्रता या इज्जत) बनाए रखना चाहिए क्योंकि पानी के बिना सब कुछ बेकार है। पानी गए न ऊबरे यानि पानी (चमक या जल) के चले जाने पर कोई नहीं बचता। मोती, मानुष, चून यानि मोती (चमक), मनुष्य (मान-सम्मान) और चूना (आटा) किसी का भी अस्तित्व नहीं बचता। यहाँ पानी के तीन अलग अलग अर्थ हैं मनुष्य के लिए विनम्रता और मान-सम्मान। मोती के लिए चमक या आभा (जिसके बिना मोती बेकार है)। चूने के लिए जल (जिसके बिना आटा गूँथा नहीं जा सकता और जिससे चूना बनता है)।

देश के सबसे स्वच्छ शहर मध्यप्रदेश के इंदौर में भी पानी के तीन अलग-अलग रूप देखने मिले। पानी का एक रूप भागीरथपुरा इलाके में देखने मिला। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की सप्लाई से बड़ा हादसा हुआ है। पाइपलाइन लीकेज के कारण सीवर का पानी, पीने के जल में मिल गया जिससे उल्टी-दस्त की महामारी फैली। इस महामारी से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से डेढ़ सैकड़ा से ज्यादा पीड़ित अस्पतालों में भर्ती हैं। पानी (यहां पानी का अर्थ संवेदना से है) दूसरा रूप देखने मिला मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की कार्रवाई में। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित की और तीन अधिकारियों को निलंबित कर एक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। प्रभावितों के इलाज का खर्च सरकार उठा रही है और टैंकरों से साफ पानी की व्यवस्था की जा रही है।

पानी (यहां पानी का अर्थ विनम्रता या इज्जत से है) तीसरा रूप देखने मिला कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बेशर्मी के रूप में। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सीएम की बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (जिनका विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 भागीरथपुरा में आता है) बाहर निकले। एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का रिफंड अभी तक क्यों नहीं मिला और पीने के पानी की उचित व्यवस्था क्यों नहीं हुई? इस पर मंत्री भड़क गए और बोले, अरे छोड़ो यार, फोकट प्रश्न मत पूछा करो। पत्रकार के जोर देने पर घंटा........ जैसे अपशब्दों का इस्तेमाल किया और वहां से चले गए। इस दौरान एक पार्षद (कमल वाघेला) ने भी पत्रकार से तीखी बहस की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

वीडियो वायरल होने के बाद देर रात मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर माफी मांगी। उन्होंने लिखा मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्थिति सुधारने में जुटी हुई है। दूषित पानी से मेरे लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए, इस गहरे दुख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए। इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं शांत नहीं बैठूँगा। इधर, मंत्री के बयान

पर सियासी उबाल आ गया है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने इसे सत्ता के अहंकार का प्रतीक बताया और मांग की कि मंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। दूषित पानी से हुई इतनी मौतों की घटना इंदौर के स्वच्छता अवार्ड के साथ ही जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जहां तक कैलाश विजयवर्गीय के बयान का सवाल है तो उन्हें राजनीतिक विथिकाओं में बड़बोला नेता माना जाता है। अपने काम से कम और विवादित बयानों के लिए उन्हें ज्यादा जाना जाता है। अपने बयानों को लेकर कभी वे अपनी ही सरकार को तो कभी पार्टी-संगठन को पशोपेश में डाल देते हैं। कई बार तो उनके बयानों पर सरकार की ओर से या पार्टी की ओर सफाई तक देनी पड़ गई है। ज्यादातर मौकों पर खुद विजयवर्गीय को अपने विवादित बयानों के लिए खेद जताना पड़ा या माफी मांगनी पड़ी है।

ज्यादा दिन पुरानी बात नहीं है जब मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी ही सरकार की पोल खोल दी थी। उन्होंने कहा था कि चुनावी घोषणाओं के चलते राज्यों की हालत खराब हो चुकी है। शहरी विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री ने कहा था कि चुनाव के दौरान किए गए बहुत सारे कमिटमेंट की वजह से राज्यों के बजट की हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। भोपाल में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक का आयोजन किया था। इसी बैठक में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राजनीतिक मजबूरी के कारण जो घोषणाएं की गई थीं उनके कारण समस्या खड़ी हो रही है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, राज्यों की राजनीतिक मजबूरियां हैं। चुनाव में बहुत सारे कमिटमेंट कर दिए। बजट अपेक्षा से परे जा रहा है और बजट बनाना मुश्किल हो रहा है। इस समय केंद्र की ओर देखना चालू कर दिया है। केंद्र की बहुत सारी योजनाएं हैं।

इसी तरह वे प्रियंका और राहुल गांधी को लेकर टिप्पणी करते हुए कह चुके हैं कि उनमें संस्कारों का अभाव है। इंदौर में लड़कियों के कपड़ों को लेकर कहा था कि मुझे कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां पसंद नहीं हैं। लड़कियां भी इतने गंदे कपड़े पहन के निकलती हैं कि सूर्पणखा दिखती हैं। बढ़ती बलात्कार की घटनाओं पर विजयवर्गीय ने कहा था कि मयार्दा का उल्लंघन होता है तो सीता हरण हो जाता है। हर किसी के लिए लक्ष्मण रेखा है, लक्ष्मण रेखा के उस पार रावण बैठा है जो सीता हरण करके ले जाएगा। इस बयान पर तो इतना विवाद हुआ था कि तत्कालीन भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा था कि पार्टी इस बयान से खुद को दूर रखती है और उन्होंने विजयवर्गीय से इस बयान को वापस लेने को कहा था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर कहा था कि जिस दिन बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ मै विदेश में था। तब एक ने कहा कि हमारे यहां जैसे लड़कियां बॉयफ्रेंड बदलती है वैसे बिहार की राजनीति है। बिहार के मुख्यमंत्री की भी वही पोजीशन है। ये बयान तब आया था जब नीतीश कुमार ने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर आरजेडी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाई थी।

मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भारत की स्वतंत्रता को लेकर ऐसा बयान दे दिया था क इस पर राजनीतिक घमासान हो गया था। विजयवर्गीय ने कहा कि जिस आजादी के लिए सरदार भगत सिंह ने फांसी का फंदा पहना था, वह आजादी हमें नहीं मिली। हमें कटी-फटी आजादी मिली है। विभाजन का हवाला देते हुए कहा कि भारत माता के दो टुकड़े हुए हैं, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा कि हम इस्लामाबाद पर तिरंगा झंडा फहराएंगे।

कैलाश विजयवर्गीय की जुबान फिसलती रही है। एक बार उन्होंने भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को ही मुदार्बाद कह दिया था। मंत्री विजयवर्गीय ने पत्रकार वार्ता में कह दिया कि जो कार्यकर्ता कल तक वीडी शर्मा जिंदाबाद बोल रहे थे, आज हेमंत खंडेलवाल मुदार्बाद बोलने लग गए। हेमंतजी हमारे नवनियुक्त अध्यक्ष हैं। यह डिसिप्लीन हमने कहीं नहीं देखा। दरअसल मंत्री भाजपा कार्यकतार्ओं के अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण की मिसाल दे रहे थे। इसी दौरान उनकी जुबान फिसली और उन्होंने जिंदाबाद की बजाय मुदार्बाद बोल दिया। मंत्री ने बयान मीडिया कैमरों के सामने दिया था। ऐसे में गलती समझ आते ही मंत्री ने रिकार्ड करने वाले पत्रकारों से कह दिया कि हां यार इसे डिलीट कर देना। इसी तरह, छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर कहा था कि शिवाजी महाराज ने पूरे मालवा में मुगलों को घुसने नहीं दिया वरना मै भी कलीमुद्दीन होता, कैलाश नहीं होता। इंदौर में आॅस्ट्रेलियाई महिला टीम की दो क्रिकेटरों का कथित तौर पर पीछा करने और छेड़छाड़ करने की घटना के दूसरे दिन विजयवर्गीय ने कहा था कि ये घटना खिलाड़ियों के लिए एक सबक है, उन्हें बाहर निकलने से पहले सुरक्षा या स्थानीय प्रशासन को जानकारी देनी चाहिए थी। जब भी वे बाहर निकलते हैं तो उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।

कैलाश विजयवर्गीय के शहरी विकास और नगर प्रशासन को लेकर जो बोला था उससे भी विपक्ष हमलावर हो गया था। भोपाल में आयोजित शहरी विकास की एक क्षेत्रीय समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूर्व में कई घोषणाएं राजनीतिक मजबूरियों के चलते की गई थीं, लेकिन अब उन घोषणाओं को जमीन पर उतारना एक बड़ी चुनौती बन गया है। मंत्री ने यह भी माना कि शहरी विकास से जुड़ी कई योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से पर्याप्त बजट की दरकार है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि केवल राज्य के संसाधनों से सभी योजनाओं को समय पर पूरा कर पाना आसान नहीं है और इसके लिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता है। यहां बता दें कि विजयवर्गीय को हर बार अपने विवादित बयानों के लिए खेद जताना पड़ा। बहरहाल, इंदौर में दूषित पानी की व्यवस्था को दुरूस्त करने की जरूरत है तो और मोहन सरकार में काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को अपने व्यवहार में पानी (विनम्रता, गंभीरता और संवेदना) लाने की।

मुस्ताअली बोहरा

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05