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बाबा साहेब द्वारा बहिष्कृत भारत पत्रिका का प्रकाशन

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2026-03-28 18:17:41

अगर कोई इंसान, हिंदुस्तान के कुदरती तत्वों और मानव समाज को एक दर्शक के नजरिए से फिल्म की तरह देखता है, तो ये मुल्क नाइंसाफी की पनाहगाह के सिवा कुछ नहीं दिखेगा। डॉक्टर भीमराम आम्बेडकर ने 31 जनवरी 1920 को अपने अखबार मूकनायक के पहले संस्करण के लिए जो लेख लिखा था, ये उस का पहला वाक्य है. तब से बहुत कुछ बदल चुका है. लेकिन, बहुत कुछ जस का तस भी है. आम्बेडकर और मीडिया का रिश्ता साथ-साथ चलता दिखता है। उन्होंने कई मीडिया प्रकाशनों की शुरूआत की. उनका संपादन किया. सलाहकार के तौर पर काम किया और मालिक के तौर पर उनकी रखवाली की। इस के अलावा, आम्बेडकर की बातों और गतिविधियों को उन के दौर का मीडिया प्रमुखता से प्रकाशित करता था।

अगर हम उनकी पहुंच की और उनके द्वारा चलाए गए सामाजिक आंदोलनों की बात करें, तो डॉक्टर आम्बेडकर अपने समय में संभवत: सब से ज्यादा दौरा करने वाले नेता थे. उन्हें ये काम अकेले अपने बूते ही करने पड़ते थे. न तो उन के पास सामाजिक समर्थन था. न ही आम्बेडकर को उस तरह का आर्थिक सहयोग मिलता था, जैसा कांग्रेस पार्टी को हासिल था. इस के विपरीत, आम्बेडकर का आंदोलन गरीब जनता का आंदोलन था. उन के समर्थक वो लोग थे, जो समाज के हाशिए पर पड़े थे। जो तमाम अधिकारों से महरूम थे. जो जमीन के नाम पर या किसी जमींदार के बंधुआ थे. आम्बेडकर का समर्थक, हिंदुस्तान का वो समुदाय था जो आर्थिक रूप से सब से कमजोर था. इस का नतीजा ये हुआ कि आम्बेडकर को सामाजिक आंदोलनों के बोझ को सिर से पांव तक केवल अपने कंधों पर उठाना पड़ा।

उन्हें इस के लिए बाहर से कुछ खास समर्थन नहीं हासिल हुआ. और ये बात उस दौर के मीडिया को बखूबी नजर आती थी. आम्बेडकर के कामों को घरेलू ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी जाना-माना जाता था. हमें हिंदुस्तान के मीडिया में आम्बेडकर की मौजूदगी और उनके संपादकीय कामों की जानकारी तो है। लेकिन, उन्हें विदेशी मीडिया में भी व्यापक रूप से कवरेज मिलती थी, ये बात ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम है. बहुत से मशहूर अंतरराष्ट्रीय अखबार, डॉक्टर आम्बेडकर के छुआछूत के खिलाफ अभियानों और गांधी से उन के संघर्षों में काफी दिलचस्पी रखते थे। लंदन का द टाइम्स, आॅस्ट्रेलिया का डेली मर्करी, न्यूयॉर्क टाइम्स, न्यूयॉर्क एम्सटर्डम न्यूज, बाल्टीमोर अफ्रो-अमरीकन, द नॉरफॉक जर्नल जैसे अखबार अपने यहां आम्बेडकर के विचारों और अभियानों को प्रमुखता से प्रकाशित करते थे। इसके अलावा अमरीका के अश्वेतों द्वारा चलाए जाने वाले कई समाचार पत्र-पत्रिकाएं, आम्बेडकर के विचारों और आंदोलनों को अपने यहां जगह देते थे. भारत के संविधान के निर्माण में आम्बेडकर की भूमिका हो या फिर संसद की परिचचार्ओं में आम्बेडकर के भाषण, या फिर नेहरू सरकार से आम्बेडकर के इस्तीफे की खबर। इन सब पर दुनिया बारीकी से नजर रखती थी।

उन्होंने मराठी भाषा मे अपने पहले समाचार पत्र मूकनायक की शुरूआत क्षेत्रीयता के सम्मान के साथ की थी। मूकनायक के अभियान के दिग्दर्शन के लिए तुकाराम की सीखों को बुनियाद बनाया गया. इसी तरह, आम्बेडकर के एक अन्य अखबार बहिष्कृत भारत का मार्गदर्शन संत ज्ञानेश्वर के सबक किया करते थे। आम्बेडकर ने इन पत्रिकाओं के माध्यम से भारत के अछूतों के अधिकारों की मांग उठाई। उन्होंने मूकनायक के पहले बारह संस्करणों का संपादन किया। जिसके बाद उन्होंने इसके संपादन की जिÞम्मेदारी पांडुरंग भाटकर को सौंप दी थी। बाद में डी डी घोलप इस पत्र के संपादक बने। मूकनायक का प्रकाशन 1923 में बंद हो गया था। इसकी प्रमुख वजह ये थी कि आम्बेडकर, इस अखबार का मार्गदर्शन करने के लिए उपलब्ध नहीं थे. वो उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए थे. इसके अलावा अखबार को न तो विज्ञापन मिल पा रहे थे और न ही उसके ग्राहकों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उससे अखबार के प्रकाशन का खर्च निकाला जा सके। शुरूआती वर्षों में राजश्री शाहू महाराज ने इस पत्रिका को चलाने में सहयोग दिया था. आम्बेडकर की पत्रकारिता का अध्ययन करने वाले गंगाधर पंतवाने कहते हैं कि, मूकनायक का उदय, भारत के अछूतों के स्वाधीनता आंदोलन के लिए वरदान साबित हुआ था। इसने अछूतों की दशा-दिशा बदलने वाला विचार जनता के बीच स्थापित किया। मूकनायक का प्रकाशन बंद होने के बाद, आम्बेडकर एक बार फिर से पत्रकारिता के क्षेत्र में कूदे। जब उन्होंने 3 अप्रैल 1927 को बहिष्कृत भारत के नाम से नई पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया। ये वही दौर था, जब आम्बेडकर का महाद आंदोलन जोर पकड़ रहा था. बहिष्कृत भारत का प्रकाशन 15 नवंबर 1929 तक होता रहा।

बहिष्कृत भारत का प्रकाशन

कुल मिलाकर इसके 43 संस्करण प्रकाशित हुए थे. हालांकि, बहिष्कृत भारत का प्रकाशन भी आर्थिक दिक़्कतों की वजह से बंद करना पड़ा. मूकनायक और बहिष्कृत भारत के हर संस्करण की कीमत महज डेढ़ आने हुआ करती थी। जब कि इस की सालाना कीमत डाक के खर्च को मिलाकर केवल 3 रुपए थी। इसी दौरान समता नाम के एक और पत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ, जिससे बहिष्कृत भारत को नई जिÞंदगी मिली. उसे 24 नवंबर 1930 से जनता के नए नाम से प्रकाशित किया जाने लगा. जनता, भारत में दलितों के सब से लंबे समय तक प्रकाशित होने वाले अखबारों में से है. जो 25 वर्ष तक छपता रहा था। जनता का नाम बाद में बदल कर, प्रबुद्ध भारत कर दिया गया था। ये सन 1956 से 1961 का वही दौर था, जब आम्बेडकर के आंदोलन को नई धार मिली थी. इस तरह हम ये कह सकते हैं कि बहिष्कृत भारत असल में अलग-अलग नामों से लगातार 33 वर्षों तक प्रकाशित होता रहा था।

स्वतंत्र दलित मीडिया

ये भारत में सब से लंबे समय तक प्रकाशित होने वाला स्वतंत्रत दलित मीडिया प्रकाशन था. इस दौरान, आम्बेडकर ने अपने मिशन को चलाने में बड़ी चतुराई से सवर्ण जाति के पत्रकारों और संपादकों को इस्तेमाल किया। आम्बेडकर ने जिन प्रकाशनों की शुरूआत की, आगे चल कर उनमें से कई के संपादक ब्राह्मण रहे थे। इनमें से जो प्रमुख नाम थे,- देवरुखकर नायक (जिन्होंने समता का भी संपादन किया) और ब्राहमन ब्राह्मनेत्तर, बी.आर. कादरेकर (जनता) और जी.एन. सहस्रबुद्धे (बहिष्कृत भारत और जनता)। इन ब्राह्मण संपादकों के अलावा दलित संपादकों जैसे बी सी काम्बले और यशवंत राव आम्बेडकर ने जनता का संपादकीय काम-काज संभाला था।

हालांकि, बहिष्कृत भारत के लिए लिखने वालों का बहुत अभाव था. इसका नतीजा ये हुआ कि संपादक को ही अखबार के 24-24 कॉलम भरने के लिए अकेले लिखना पड़ता था। यशवंत आम्बेडकर, मुकुंद राव आम्बेडकर, डी.टी. रुपवते, शंकर राव खरात और बी.आर. कारदेकर ने जब तक मुमकिन हुआ तब तक प्रबुद्ध भारत का संपादन जारी रखा था।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05